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Showing posts from June, 2021

भागवत गीता की पोल खोल*

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*भागवत गीता की पोल खोल*  *💥चारों वर्णों को मेरे(ईश्वर के) द्वारा ही बनाया गया है (श्लोक 4, अध्याय 13)*   * *,भारत के अलावा कही भी वर्णव्यवस्था नहीं है 🤣 , तो क्या‌ इस  ईश्वर की भारत के अलावा कही नहीं चलती थी 😂   *💥पापयोनि युक्त शूद्र , नारी ,चाण्डाल, वैश्य को मेरे (क्रष्ण के) शरण में आकर ही परमगति प्राप्त होती है (अध्याय 9, श्लोक 32)*   * *ये मनुवादी भगवान शूद्र , स्त्री, चाण्डाल, वैश्य को पापयोनि बता रहा है , और खुद को खुद ही ईश्वर घोषित कर रहा है 🎭 युद्ध के वक्त ये जातिवादी मानसिकता कोई क्यों दिखायेगा ‽ और भागवत गीता में विज्ञान बताने वाले , बताएं कि इस बात में विज्ञान किधर है 😂  _*अब आते हैं भगवत् गीता के उस विज्ञान पर जो नासा को भी परेशान कर देता है*  😰😂_    *💥"हे अर्जुन , ये दिव्य ज्ञान मैंने तुमसे पहले सूर्य को दिया था" (अध्याय 4 starting)*    * *अब भागवत गीता में विज्ञान बताने वाले बताएं कि सूर्य कोई इंसान हैं क्या 🤣‌ या फिर उसका दिमाग होता है🧠 जो उसको ज्ञान दे दिया 🤣  *💥"सभी प्राणी अन्न से उत...

हरिशंकर परसाईं की बेहतरीन कहानी....एक गोभक्त से भेंटएक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए, ऊंचे, गोरे और तगड़े साधु थे.

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हरिशंकर परसाईं की बेहतरीन कहानी.... एक गोभक्त से भेंट एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए, ऊंचे, गोरे और तगड़े साधु थे. चेहरा लाल. गेरुए रेशमी कपड़े पहने थे. पांवों में खड़ाऊं. हाथ में सुनहरी मूठ की छड़ी. साथ एक छोटे साइज़ का किशोर संन्यासी था. उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था और वह गुरु को रफ़ी के गाने सुनवा रहा था. मैंने पूछा,‘स्वामी जी, कहां जाना हो रहा है? स्वामीजी बोले,‘दिल्ली जा रहे हैं, बच्चा!’ मैंने कहा,‘स्वामीजी, मेरी काफ़ी उम्र है, आप मुझे ‘बच्चा’ क्यों कहते हैं? स्वामीजी हंसे. बोले,‘बच्चा, तुम संसारी लोग होटल में साठ साल के बूढ़े बैरे को ‘छोकरा’ कहते हो न! उसी तरह हम तुम संसारियों को बच्चा कहते हैं. यह विश्व एक विशाल भोजनालय है जिसमें हम खाने वाले हैं और तुम परोसने वाले हो. इसीलिए हम तुम्हें बच्चा कहते हैं. बुरा मत मानो. संबोधन मात्र है.’ स्वामीजी बात से दिलचस्प लगे. मैं उनके पास बैठ गया. वे भी बेंच पर पालथी मारकर बैठ गए. सेवक को गाना बंद करने के लिए कहा. कहने लगे,‘बच्चा, धर्मयुद्ध छिड़ गया. गोरक्षा-आंदोलन तीव्र हो गया है. दिल्ली में संसद के सामने सत्याग्रह करेंगे.’...

रामायण और महाभारत।भारत मे ये वितर्कित मुद्दा है। आधा देश इसकी सत्यता साबित करने मे लगा है तो आधा देश इसे झुठलाकर मजाक बनाने मे लगा है। लेकिन ये अशल मे है क्या? वास्तविक सच या काल्पनिक झूठ।

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रामायण और महाभारत। भारत मे ये वितर्कित मुद्दा है। आधा देश इसकी सत्यता साबित करने मे लगा है तो आधा देश इसे झुठलाकर मजाक बनाने मे लगा है। लेकिन ये अशल मे है क्या? वास्तविक सच या काल्पनिक झूठ। मेरे विचार मे ये मनुवादियो द्वारा विक्रीत की गई वास्तविक कल्पना है। विस्तार से समझते है। इसके लिए पहले कथा शब्द को समझना होगा। कथा।  कथा दो प्रकार के होते है पहला इतिहास और दूसरा पुराण। इतिहास। भूतकाल मे घटित विवरण को ऐतिहासिक कथा कहते है। जिसे इतिहासकार अपने शोध से आनुसंधान करते है।ये मात्र वास्तविक घटना है, इस से विशेष कोई शिक्षा नही मिलती है। पुराण। भूतकाल मे विभिन्न समय मे और विभिन्न परिस्थिति पर लगभग एक तरह कि होनेवाली घटनाओ का निचोड़ है पौराणिक कथा। जिसे कुछ विद्वानो ने इतिहासकारो या ऐतिहासिक लेखा जोखा कि मदद से रचना करते है। जिसे हम वास्तविक कल्पना कह सकते है। जो कल्पना मात्र होती है लेकिन वास्तविक जीवन का ज्ञान भरा रहता है। इस रचना के लिए काल्पनिक चरित्रों का निर्माण किया जाता है जो वास्तविकता के करीब हो। ईसप कि कहनियो मे भी ज्ञान है परन्तु चरित्र सब जानवर है। और किसी वास्तविक स्थान को च...

हिन्दू धर्म पहले ब्राह्मण धर्म के नाम से जाना जाता था। हिन्दू नाम मुगलों का दिया नाम कहा जाता है। ब्राह्मणों ने असंख्य ग्रन्थ लिखे और असंख्य जातियाँ बनाई। जातियों की उपजातियां बनाई और हर जाति को ऊंची, नीची श्रेणी में रखा। आज भले ही लड़ाई सबको हिन्दू बनाने या समझने की हो लेकिन कालांतर में ऐसा नहीं था। स्वयं ब्राह्मणों में कितनी जातियाँ थी आधुनिक ब्राह्मणों को स्वयं भी इसका अनुमान नहीं है।

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हिन्दू धर्म पहले ब्राह्मण धर्म के नाम से जाना जाता था। हिन्दू नाम मुगलों का दिया नाम कहा जाता है। ब्राह्मणों ने असंख्य ग्रन्थ लिखे और असंख्य जातियाँ बनाई। जातियों की उपजातियां बनाई और हर जाति को ऊंची, नीची श्रेणी में रखा। आज भले ही लड़ाई सबको हिन्दू बनाने या समझने की हो लेकिन कालांतर में ऐसा नहीं था। स्वयं ब्राह्मणों में कितनी जातियाँ थी आधुनिक ब्राह्मणों को स्वयं भी इसका अनुमान नहीं है। पोस्ट थोड़ी लंबी है लेकिन ब्राह्मण जातियों का अनुमान आप जरूर  लगा सकेंगे। यह पोस्ट बदरीनाथ के विधायक जैसे उन सभी लोगों तक जरूर पहुंचनी चाहिए जो जातियों को निराधार या आधुनिक मानते हैं।  भारतवर्ष में ब्राह्मण मामलों के प्रथम जानकर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी जन्में जिन्होंने ब्राह्मणों, ब्राह्मण ग्रन्थों और ब्राह्मणवाद पर विस्तार से मंथन व विश्लेषण किया। यही कारण है कि ब्राह्मण उसे चिढ़ते भी हैं और सीखते भी हैं। उनकी किताब "अस्पर्श्य का विद्रोह, गांधी और उनका अनशन, पूना पैक्ट" में वे एक अध्याय लिखते हैं "जाति प्रथा का अभिशाप" इसमें उन्होंने केवल ब्राह्मण जातियों के वर्गीकरण का इतिहास प्रस्त...

ये प्रश्न भी पूछे जाने चाहिए के बी सी और अन्य परीक्षाओं में।.....1.किस ग्रंथ में लिखा है

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ये प्रश्न भी पूछे जाने चाहिए के बी सी और अन्य परीक्षाओं में। ..... 1.किस ग्रंथ में लिखा है  'पुत्री कष्ट प्रदा और दुख देने वाली होती है' उत्तर-ऐतरेय ब्राह्मण 7-3 2.किस ग्रंथ में लिखा है'भली स्त्रियों को मृत पति के साथ आग में कूद जाना चाहिए? उत्तर-वृद्धहारीत स्मृति 11/202 3.किस ग्रंथ में लिखा है 'स्त्रियों को मंत्रों के जाप का अधिकार नही है।स्त्रियां असत्य के समान अपवित्र हैं उत्तर- मनुस्मृति4/205 4.किस ग्रंथ में लिखा है 'स्त्री बचपन में पिता के,जवानी में पति के और बुढापे में पुत्र के वश में रहे,स्वतंत्र कभी न रहे। उत्तर-मनुस्मृति 5/178 5.'स्त्रियों के साथ मैत्री नहीं हो सकती ,इनके दिल लकड़बग्घों के दिलों से क्रूर होते हैं उत्तर- श्रग्वेद 10-95-15 6.'जो शूद्र अपने प्राण, धन तथा स्त्री को ब्राह्मण की सेवा में अर्पण कर दे उस शूद्र का अन्न भोजन करने योग्य है और शेष शूद्रों का अन्न भोजन करने योग्य नही है' किस ग्रंथ में लिखा है? उत्तर-विष्णु स्मृति 5/11 7.'जो अच्छे काम करते हैं वे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य इन अच्छी जातियों को प्राप्त होते हैं और जो अशुभ ...

झारखंड के रामगढ़ - बोकारो मार्ग पर गोला के निकट बौद्ध खीरी मठ की हालत खास्ता है.....

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झारखंड के रामगढ़ - बोकारो मार्ग पर गोला के निकट बौद्ध खीरी मठ की हालत खास्ता है..... पुरातत्व विभाग कृपया ध्यान दें, इसकी जीवन - लीला कभी भी खत्म हो सकती है.... खीरी बौद्ध मठ करीब 40 वर्गफीट के घेरे में कोई 80 फीट ऊँचा है.... मठ से कुछ दूरी पर भिक्खुओं के स्नान के लिए सरोवर है..... पूरब और पश्चिम दिशा में 5 फीट ऊँचा दो द्वार बने हैं...... पूरबी द्वार के ठीक ऊपर 40 फीट की ऊँचाई पर भूमि स्पर्श मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति लगी है, पास में बुद्धिज्म के प्रतीक दो मछलियाँ हैं..... पश्चिमी द्वार के ऊपर सिर्फ मछलियों की आकृति है..... खीरी मठ की पूरी संरचना बोध गया के महाबोधि मठ से मेल खाती है.... महाबोधि मठ की स्थापना सम्राट असोक ने की थी, बाद में उसका विस्तार हुआ है..... ऐसा जान पड़ता है कि खीरी बौद्ध मठ की स्थापना भी सम्राट असोक ने की होगी, बाद में इसका विस्तार हुआ है.....

ओबीसी को आरक्षण देने की वजह से शोषक जातियां वीपी सिंह से हमेशा के लिए नाराज हो गईं. लेकिन पहेली ये है कि देश के ओबीसी ने उन्हें गर्मजोशी के साथ अपनाया क्यों नहीं? ओबीसी की भारत में आज जो दुर्दशा है, उसकी वजह इसी पहेली में है. #HBDVPSingh

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ओबीसी को आरक्षण देने की वजह से शोषक जातियां वीपी सिंह से हमेशा के लिए नाराज हो गईं. लेकिन पहेली ये है कि देश के ओबीसी ने उन्हें गर्मजोशी के साथ अपनाया क्यों नहीं? ओबीसी की भारत में आज जो दुर्दशा है, उसकी वजह इसी पहेली में है. #HBDVPSingh    ओबीसी को आरक्षण देने की वजह से शोषक जातियां वीपी सिंह से हमेशा के लिए नाराज हो गईं. लेकिन पहेली ये है कि देश के ओबीसी ने उन्हें गर्मजोशी के साथ अपनाया क्यों नहीं? ओबीसी की भारत में आज जो दुर्दशा है, उसकी वजह इसी पहेली में है. #HBDVPSingh

state and minorities, राज्य एवं अल्पसंख्यक समुदाय- डा अम्बेडकर

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state and minorities, राज्य एवं अल्पसंख्यक समुदाय- डा अम्बेडकर इतिहास मैं वह लोग घूमते हैं, अतीत की बातें वह लोग कहते हैं, जिनके सामने कोई वर्तमान नहीं होता कोई भविष्य नहीं होता है अथवा वह भविष्य के लिए कोई सोच ही नहीं रखते हैं, या जो चाहते ही नहीं है कि भविष्य के विषय में कोई सोचे। बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने शूद्र कौन और अछूत कौन और कैसे यह पुस्तकें बहुत पहले लिखी थी  व्यवस्था को ध्यान में रखकर, इसके बाद उन्होंने जातिवाद का विनाश पुस्तक लिखी, तत्पश्चात 15 मार्च 1947 को संविधान सभा को इस आशय से अपना यह ज्ञापन भेजा था कि उनकी राष्ट्रीय करण की नीति को संविधान में शामिल किया जाए, लेकिन संविधान सभा के अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया था। इस ज्ञापन की चर्चा नहीं करते (state and minorities, राज्य एवं अल्पसंख्यक समुदाय) जो वर्तमान से लोकतंत्र से संविधान से जोड़ता है, तब यह ना समझ तो है ही क्योंकि यह उस अतीत की बात करते हैं जो अंग्रेजों के साथ समाप्त हो गया उनके जाने के बाद उसका कोई महत्व नहीं रहा। वर्ण व्यवस्था की, मनुस्मृति की इतनी व्याख्या करते हैं, परंतु यह नहीं समझ रहे हैं...

✍️*147 ब्राह्मण और 80 ठाकुर एसडीएम कैसे हो गए भर्ती...?🎤 एक देश एक आवाज न्यूज़ 24 सच्चाई की तह तक 🖋️ देखें एक रिपोर्ट....

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✍️*147 ब्राह्मण और 80 ठाकुर एसडीएम कैसे हो गए भर्ती...?🎤 एक देश एक आवाज न्यूज़ 24 सच्चाई की तह तक 🖋️ देखें एक रिपोर्ट.... *योगीराज में सवर्णीय जातिवाद चरम पर*        लोक सेवा आयोग में डाॅ.अनिल यादव अध्यक्ष थे,तो उनके तीन साल के कार्यकाल में 97 में यादव जाति के कुल 14 पीसीएस सलेक्ट हुए थे, तो भाजपा,आरएसएस,विहिप और विद्यार्थी परिषद की नेकरछाप जमात ने आसमान सिर पर उठा लिया था। इलाहाबाद में लोक सेवा आयोग के दफ्तर पर यादव सेवा आयोग लिख दिया था। तब इस झूठ को मीडिया ने भी खूब बढा-चढा कर दिखाया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने झूठे कुप्रचार के आधार पर फैसला सुना दिया। जबकि आरोपों में न कोई आधार थे और न कोई सबूत। हाई कार्ट को लगा था देश में सिर्फ यादव ही सभी पीसीएस बन जाएंगे। आानन-फानन में सीबीआई को पीसीएस भर्ती में कथित गडबडी की जांच सौंपने का फरमान सुना दिया। जांच प्रभावित न हो,इस आधार पर डाॅ.अनिल यादव से अध्यक्ष पद से हटने को कहा गया। डाॅ.अनिल यादव हट भी गए। अब लाख टके का सवाल, सीबीआई क्यों बताती? उसने पांच साल से हडप्पा की खुदाई की तरह यूपीपीसीएस में जांच में कुछ म...

वेदों के मन्त्रों के अलग अलग भाष्य।मै डॉक्टर सुरेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक "क्या बालू की भीत पर खड़ा है हिन्दू धर्म" पढ़ रहा था।

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वेदों के मन्त्रों के अलग अलग भाष्य। मै डॉक्टर सुरेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक "क्या बालू की भीत पर खड़ा है हिन्दू धर्म" पढ़ रहा था। उसमे वेदों के हवाले से यह सिद्ध करने की कोशिश है कि सतयुग जैसा कभी कोई युग नहीं था। युग की धारणा काल्पनिक है। सतयुग में कोई दुख, बीमारी इत्यादि नहीं थी अगर ऐसा होता हो वेदों में इस तरह के मंत्र क्यों है कि हमें बीमारियों से बचाओ, असुरों से बचाओ, शत्रुओं को समाप्त करें इत्यादि। उसमे ऋग्वेद के मंडल 7 के, सूक्त 1 में मंत्र  19 के पहले हिस्से का उदहारण दिया है। बहुत छोटा सा संस्कृत के मंत्र का एक हिस्सा है। " मा नो अग्ने वीरते परा दा" इसका उसने अर्थ बताया कि है अग्नि  हमारी संतानों को तू नष्ट मत कर। किताब का मुख्य पृष्ठ और संबंधित पन्ना नीचे पोस्ट कर दिया गया है। ( 1  और 2) बीजेपी और मोदी जुंडली द्वारा हिन्दू धर्म और वेदों के नाम पर वोट लेने के लिए लोगों को मूर्ख बनाया जाता है। भारत सरकार ने vedic heritage नामक नई वेबसाइट शुरू की है जिसमें वेदों का गायन पाठ और अर्थ बताएं गए है। आपने वेद, मण्डल नंबर, सूक्त नंबर और म...

में ऋग्वेद सबसे पुराना है। वेदों में बहुत ज्ञान है, ऐसा बहुत लोग बोलतें है, लेकिन ज्ञान क्या है यह कोई नहीं बताता। शूद्रों या स्त्रियों के प्रति निरादर के लेख अगर रामायण, महाभारत या पुराणों में दिखा दो तो बोलतें है कि वेद प्रमाणिक है, उसमे ऐसा नहीं है। मुझे लगता है कि जो लोग ऐसा बोलते है उन्होंने कभी वेद की किताब देखी भी नहीं होगी। मैं ऋग्वेद के मंडल 10 सूक्त 86 के मंत्र 12 से 17 वाला पन्ना लगा रहा हूं। इसमें इन्द्र अपनी पत्नी इंदार्णी से देखो क्या बात करता है :-

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 में ऋग्वेद सबसे पुराना है। वेदों में बहुत ज्ञान है, ऐसा बहुत लोग बोलतें है, लेकिन ज्ञान क्या है यह कोई नहीं बताता। शूद्रों या स्त्रियों के प्रति निरादर के लेख अगर रामायण, महाभारत या पुराणों में दिखा दो तो बोलतें है कि वेद प्रमाणिक है, उसमे ऐसा नहीं है। मुझे लगता है कि जो लोग ऐसा बोलते है उन्होंने कभी वेद की किताब देखी भी नहीं होगी। मैं ऋग्वेद के मंडल 10 सूक्त 86 के मंत्र 12 से 17 वाला पन्ना लगा रहा हूं।  इसमें इन्द्र अपनी पत्नी इंदार्णी से देखो क्या बात करता है :- " यज्ञ करने वालों को इंद्राणी प्रेरित करती है, जिससे वह  इन्द्र के लिए  15/20 बैल  पकाते है। वृषो की हवी ( यज्ञ में  अग्नि भेट करने वाली सामग्री)  को मैं खा जाऊं। इन पके हुए (15/20) बैलों को खा कर मै मोटा होता है। सोम रस से पेट भरता हूं।" "जिस प्रकार तीखे सींगों वाला सांड गायों के बीच गरजना करता हुआ रमण करता है उसी प्रकार इंद्राणी तुम मेरे साथ रमण करो " " जिस पुरुष का लिंग दोनों जांघों के बीच लटक जाता है वह मैथुन नहीं कर सकता।" "जिसका लिंग फैलता है वहीं मैथुन कर सकता है" मोदी सरकार हिं...

विश्व का सबसे अनोखा मुकदमा:और मैं ऐसे मुकदमे हर घर मे देखना भी चाहता हूं ... ☺️😊☺️

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विश्व का सबसे अनोखा मुकदमा: और मैं ऐसे मुकदमे हर घर मे देखना भी चाहता हूं ... ☺️😊☺️ न्यायालय में एक मुकद्दमा आया, जिसने सभी को झकझोर दिया| अदालतों में प्रॉपर्टी विवाद व अन्य पारिवारिक विवाद के केस आते ही रहते हैं, मगर ये मामला बहुत ही अलग किस्म का था। एक 70 साल के बूढ़े व्यक्ति ने अपने 80 साल के बूढ़े भाई पर मुकद्दमा किया था ... 🙄🙄🙄 मुकद्दमे का कुछ यूं था कि "मेरा 80 साल का बड़ा भाई अब बूढ़ा हो चला है इसलिए वह खुद अपना ख्याल भी ठीक से नहीं रख सकता, मगर मेरे मना करने पर भी वह हमारी 110 साल की मां की देखभाल कर रहा है। मैं अभी ठीक हूं, इसलिए अब मुझे मां की सेवा करने का मौका दिया जाय और मां को मुझे सौंप दिया जाए। न्यायाधीश महोदय का दिमाग घूम गया और मुक़दमा भी चर्चा में आ गया, न्यायाधीश महोदय ने दोनों भाइयों को समझाने की कोशिश की कि आप लोग 15-15 दिन रख लो। मगर कोई टस से मस नहीं हुआ बड़े भाई का कहना था कि मैं अपने स्वर्ग को खुद से दूर क्यों होने दूँ? अगर मां कह दे कि उसको मेरे पास कोई परेशानी है या मैं  उसकी देखभाल ठीक से नहीं करता तो अवश्य छोटे भाई को दे दो। छोटा भाई कहता कि पिछले 40 साल...

गुलामगिरी महात्मा ज्योतिबा फुले की बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक जो पड़ेगावही तो आगे बढ़ेगा फ्री में डाउनलोड करें और पढ़ें

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गुलामगिरी महात्मा ज्योतिबा फुले की बहुत दूर तक जो पड़ेगावही तो आगे बढ़ेगा फ्री में डाउनलोड करें और पढ़ें

‼️दिमागी गुलामी‼️🚥🚥🚥🚥🚥🚥जिस जाति की सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उसके मानसिक दासता के बंधन भी उतने ही अधिक होते हैं❗

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‼️दिमागी गुलामी‼️ 🚥🚥🚥🚥🚥🚥 जिस जाति की सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उसके मानसिक दासता के बंधन भी उतने ही अधिक होते हैं❗ भारत की सभ्यता पुरानी है, इसमें तो शक ही नहीं और इसलिए आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावटें भी अधिक है। मानसिक दासता प्रगति में सबसे अधिक बाधक होती है❗ हमारे कष्ट, हमारी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक समस्याएं इतनी अधिक और इतनी जटिल है कि हम तब तक उनका हल नहीं सोंच सकते जब तक की हम साफ-साफ और स्वतंत्रतापूर्वक इन पर सोचने का प्रयत्न न करें❗ वर्तमान शताब्दी के आरंभ से भारत में राष्ट्रीयता की बाढ़ सी आ गयी है, कम से कम तरुण नव शिक्षितों में। यह राष्ट्रीयता बहुँत अंशों में श्लाध्य रहने पर भी कितने ही अंशों में अंधी राष्ट्रीयता है❗ झूठ-सच जिस तरीक़े से भी हो, अपने देश के इतिहास को सबसे अधिक निर्दोष व गौरवशाली सिद्ध करने अर्थात अपने ऋषि-मुनियों, लेखकों और विचारकों, राजाओं और राज-संस्थाओं में बीसवीं शताब्दी की बड़ी से बड़ी राजनीतिक महत्व की चीजों को देखना हमारी राष्ट्रीयता का एक अंग है❗ अपने प्राचीन काल के गर्व के कारण हम अपने भूत के स्नेह में कड़ाई के साथ बंध जातें हैं और इससे हमें उत...

*एक वास्तविक विश्लेषण!**मैं ब्राह्मण समाज की महिला एडवोकेट एकता जोशी!*

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*एक वास्तविक विश्लेषण!* *मैं ब्राह्मण समाज की महिला एडवोकेट एकता जोशी!* *हमको यह मालूम है कि इस संसार में ईश्वर देवी-देवता वगैरह कुछ नहीं है, किन्तु हम लोग सतत लोगों से भगवान भगवान करने को कहते हैं! क्योंकि उससे हमारा पेट भरता है।* *सच बोलने पर कोई फूटी कौड़ी भी नहीं देता किंतु झूठ बोलकर हजारों रुपए मिलते हैं।* *पूजा-पाठ, अभिषेक, आशीर्वाद, वरदान,हस्त-पुण्य, मोक्ष यह सब बिल्कुल झूठे हैं; ऊपर स्वर्ग नहीं है और नीचे नर्क भी नहीं है है सबका सब सिर्फ बकवास!* *काल्पनिक नर्क हमने ही निर्मित किया लोगों को डर दिखाने के लिए।* *हम ही नये पंथ और नयी नयी पूजा पद्धतियों का निर्माण करते हैं।* *कारण सीधा है कि लोगों कुछ नया चाहिए होता है!* *सच कहूं तो भारत में इतने मूर्ख लोग रहते हैं कि संसार में और कहीं नहीं मिलेंगे , हम जो कहते हैं उसे वे तुरंत मान लेते हैं उसकी न जांच करते हैं और न ही कोई तर्क करते हैं।* *हम ब्राह्मण कभी भी तीर्थ यात्राओं पर नहीं जाते हमें पता है तीर्थ यात्रा पर जाकर जो ईश्वर देवी-देवता हैं ही नहीं उनका  दर्शन क्या करना? देव- दर्शन से कुछ होता जाता नहीं!* *जबतक हिन्...