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Showing posts from September, 2019

हज़ार उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब, इसी का नाम है ज़िन्दगी चलते रहिये जनाब..!!

शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं - वसीम बरेलवी

अहंकार कभी ना करे, ☝️ एक छोटा सा कंकर भी मुँह में गया हुआ निवाला बाहर निकाल सकता है ll 🙏सुप्रभात🙏

टांगो के बगैर आप कैसे लगेंगे🤔 यकीनन बुरे लगेंगे, इस लिए अपनी टांगे मेरे कामो में मत अड़ाए😂 #टांग_तोड़_दूंगा🤣🤣

जातिगत आरक्षण अगर तुमको तकलीफ देता है तो सोचो जातिवाद हमें कितना तकलीफ देता होगा 🤔

कौन सीखा है सिर्फ़ बातों से, सबको एक हादसा ज़रूरी है..!!😊

हम एक दिन निकल आए थे ख़्वाब से बाहर सो हम ने उठाए रंज..........हिसाब से बाहर इसी उम्मीद पे............गुज़री है ज़िंदगी सारी कभी तो हम से मिलोगे......हिजाब से बाहर --फ़हीम शनास काज़मी

खरोंच लेती हूँ खुद को... हर दफा... क्योंकि घाव भर जाए, तो अक्सर सबक़ भूल जाया करते है...!!

कल शीशा था सब देख देख कर जाते थे;; आज टूट गया सब बच बच कर जाते हैं;; ये वक़्त है साहेब दिन सबके आते हैं;;

वक़्त और किस्मत पे कभी घमंड मत करो सुबह उनकी भी होती है जिन्हें कोई याद नही करता...!!!

कुछ खुशियाँ .. कुछ आंसू... देकर चला गया.... ज़िन्दगी फिर से अपना रुतबा दिखाने की ज़िद पर है...

हजारो गम है लेकिन आंखों से टपका नही आंसू हम अहले ज़र्फ़ है पीते हैं टपकाया नही करते

ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो फ़ासले कम करो दिल मिलाते रहो दर्द कैसा भी हो आँख नम ना करो रात काली सही कोई ग़म ना करो इक सितारा बनो जगमगाते रहो -नक़्श लायलपुरी