Posts

Showing posts from June, 2020

वो मेरे चेहरे तक अपनी नफ़रतें लाया तो था..मैंने उसके हाथ चुमे और बेबस कर दिया...-वसीम बरेलवी

वो मेरे चेहरे तक अपनी नफ़रतें लाया तो था.. मैंने उसके हाथ चुमे और बेबस कर दिया... -वसीम बरेलवी

दिल में उलझनों और बेलगाम ख्वाहिशों का मेला है!!मगर फिर भी चेहरे पर मेरे, मुस्कराहट का पहरा है!!

दिल में उलझनों और बेलगाम ख्वाहिशों का मेला है!! मगर फिर भी चेहरे पर मेरे, मुस्कराहट का पहरा है!!                  ✍️

जिन्दगी की हर तपिश को मुस्कुरा कर झेलिएधूप कितनी भी हो समंदर सूखा नही करते

नज़रों से इशारे रुख़ पर #नकाब होता है , थोड़ा-थोड़ा तो हर कोई #ख़राब होता है . .

नज़रों से इशारे रुख़ पर #नकाब होता है ,थोड़ा-थोड़ा तो हर कोई #ख़राब होता है ..

नज़रों से इशारे रुख़ पर #नकाब होता है , थोड़ा-थोड़ा तो हर कोई #ख़राब होता है . .

साथ साथ घूमते है, हम दोनों रात भर…!लोग मुझे आवारा, उसे चाँद कहते है।😏🙂

साथ साथ घूमते है, हम दोनों रात भर…! लोग मुझे आवारा, उसे चाँद कहते है।😏🙂

यह समझ लीजिए कि संसार में जो आदमी अपनी रक्षा नहीं कर सकता, वह सदैव स्वार्थी और अन्यायी आदमियों का शिकार बना रहेगा! - #मुंशी_प्रेमचंद..!!

यह समझ लीजिए कि संसार में जो आदमी अपनी रक्षा नहीं कर सकता,  वह सदैव स्वार्थी और अन्यायी आदमियों का शिकार बना रहेगा!  - #मुंशी_प्रेमचंद..!!

जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी,अब धुऐं.....पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी-📖🖊️

जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी, अब धुऐं..... पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी 📖🖊️

अपनी #कहानी ख़ुद लिखते हैं ,ख़ुद ही #डायरेक्टर होते हैं ,हम लोग #वकील हैं ,हमारे अपने #पर्दे अपने #थियेटर होते हैं .

अपनी #कहानी ख़ुद लिखते हैं , ख़ुद ही #डायरेक्टर होते हैं , हम लोग #वकील हैं , हमारे अपने #पर्दे अपने #थियेटर होते हैं .

जब सज़ा दी ही चुके हो तो हाल मत पूंछो...................अगर हम बेक़सूर निकले तो तुम्हे तकलीफ बहुत होगी !!

वो मुसाफ़िर का दर्द क्या समझेंजो फ़क़त टहलने निकलते हैं#फ़हमी बदायूनी

वो मुसाफ़िर का दर्द क्या समझें जो  फ़क़त  टहलने निकलते हैं #फ़हमी बदायूनी

संभव, असंभव से पूछता है तुम्हारा निवास स्थान कहा है..?असंभव उत्तर देता है... आलसी लोगो के सपने में । 🙏 सुप्रभात🙏

संभव,  असंभव से पूछता है तुम्हारा निवास स्थान कहा है..? असंभव  उत्तर देता है... आलसी लोगो के सपने में ।              🙏 सुप्रभात🙏

ग़ज़ल अच्छा अच्छा सोच रहे हैं, मीठा मीठा सोच रहे हैं,बस इतना सा अंतर है सब, अपना अपना सोच रहे हैं.कुछ मज़हब की दीवारों में, कुछ सपनों की मीनारों में,अपने अपने पिंजरों में सब जाने क्या क्या सोच रहे हैं.बाहर बाहर टीका चन्दन ढोल मजीरे, जाप, कथाएं, भीतर भीतर मन में लेकिन कैसा कैसा सोच रहे हैं.बरबादी तक पहुँच गई है आख़िर क्यों दीवानी दुनिया, बेबस धरती, प्यासे बादल, सूखे दरिया सोच रहे हैं.कुछ जाने पहचाने सपने मेरी बोझिल सी आँखों में, किसकी बातें सोच रहे हैं, किसका चेहरा सोच रहे हैं.आगे जाकर सोच रहे हैं बच्चे दुनिया भर की बातें, हम भी कैसे हैं जो अब भी काशी मथुरा सोच रहे हैं.उनसे कहिए आगे जाकर सोचें कुछ बुनियादी बातें, मंजन साबुन तेल किराना बस जो इतना सोच रहे हैं.जेब में बंडल हाथ में बीड़ी चौराहे चौराहे मुखिया,चाय समौसे पान तंबाकू चूना कत्था सोच रहे हैं.हैरत होती है सुन सुन कर उफ़ ये मेरे भाग्य विधाता, कैसी बोली बोल रहे हैं कैसी भाषा सोच रहे हैं.

ग़ज़ल  अच्छा अच्छा सोच रहे हैं, मीठा मीठा सोच रहे हैं, बस इतना सा अंतर है सब, अपना अपना सोच रहे हैं. कुछ मज़हब की दीवारों में, कुछ सपनों की मीनारों में, अपने अपने पिंजरों में सब जाने क्या क्या सोच रहे हैं. बाहर बाहर टीका चन्दन ढोल मजीरे, जाप, कथाएं,  भीतर भीतर मन में लेकिन कैसा कैसा सोच रहे हैं. बरबादी तक पहुँच गई है आख़िर क्यों दीवानी दुनिया,  बेबस धरती, प्यासे बादल, सूखे दरिया सोच रहे हैं. कुछ जाने पहचाने सपने मेरी बोझिल सी आँखों में,  किसकी बातें सोच रहे हैं, किसका चेहरा सोच रहे हैं. आगे जाकर सोच रहे हैं बच्चे दुनिया भर की बातें,  हम भी कैसे हैं जो अब भी काशी मथुरा सोच रहे हैं. उनसे कहिए आगे जाकर सोचें कुछ बुनियादी बातें,  मंजन साबुन तेल किराना बस जो इतना सोच रहे हैं. जेब में बंडल हाथ में बीड़ी चौराहे चौराहे मुखिया, चाय समौसे पान तंबाकू चूना कत्था सोच रहे हैं. हैरत होती है सुन सुन कर उफ़ ये मेरे भाग्य विधाता,  कैसी बोली बोल रहे हैं कैसी भाषा सोच रहे हैं.

धुप में तो कांच के टुकड़े भी चमकते हैं,पर हिरे की पहचान तो अंधेरे में होती हैं…आप हमारे लिय हीरा से ज्याद महत्व रखते है l

धुप   में तो कांच के टुकड़े भी चमकते हैं, पर हिरे की पहचान तो अंधेरे में होती हैं… आप हमारे लिय हीरा से ज्याद महत्व रखते है l  

आइए हिसाब करें आजादी के बाद के इन 72 सालों का ! आजादी के बाद केंद्र में इन 72 सालों में से 52 साल कांग्रेस ने, 12 साल भाजपा ने और 8 साल अन्य गठबंधन की सरकारों ने शासन किया. इस हिसाब से इन 72 सालों में से 1/6 हिस्सा भाजपा ने शासन किया. तो क्या भाजपा ने देश निर्माण में 1/6 हिस्से का योगदान दिया है ? आइये देखते हैं --1) क्या देश के 18लाख स्कूलों में से 3लाख स्कूल भाजपा ने खुलवाए ?2) क्या देश के 8200रेलवे स्टेशनों में से 1300 भाजपा ने बनवाये हैं ?3) क्या देश के 45000 कन्या विद्यालयों में से 7500 भाजपा ने खुलवाए ?5) क्या देश भर के 1200नहरों में से 200 नहर भाजपा ने खुदवाये ?6) क्या देश के लगभग 65 बैंकों (सरकारी व गैर सरकारी ) बैकों में से भाजपा ने कोई खुलवाया ?7) क्या कोई स्टील प्लांट, गैस प्लांट, परमाणु संयंत्र, इसरो, आईआईटी, एम्स, एयरपोर्ट, सेल, गेल, भेल, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल आदि आदि भाजपा शासन में शुरू हुआ या बना ?8) देश भर के 200 राष्ट्रीय राजमार्गों में से भाजपा ने कितनों का निर्माण कराया ? 9) कितने केंद्रीय विद्यालय, सैनिक विद्यालय, नवोदय विद्यालय का निर्माण भाजपा शासन में हुआ ? 10 )एलआईसी, जीआईसी, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या अन्य सरकारी संस्थानों में से कितनों का निर्माण भाजपा ने कराया ? 11)देशभर में कितने कल कारखानों का निर्माण भाजपा शासन में हुआ ?12) निर्माण भवन, शास्त्री भवन, उद्योग भवन, रेल भवन, शास्त्री भवन, विज्ञान भवन आदि आदि में से क्या किसी का निर्माण भाजपा शासन में हुआ ?13) आरटीआई, मनरेगा, आधार, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन जैसी कोई कल्याणकारी योजना भाजपा शासन में शुरू हुई ?नहीं न !ये भाजपाई किसके बनाए विद्यालयों में पढ़े हैं ? इनसे केवल बकवास या उन्माद सीख सकते हैं. दूसरों की बहन बेटियों की बेइज्जती करना, गाली देना ही उनसे आप सीख सकते हैं, देश हित में कोई एक अच्छा सा काम इन्होंने किया हो तो बताना.इसके उलट देश भर में धर्म जाति के नाम पर नफरत फैलाकर दंगा कराना और लोगों की हत्या कराना ही इनका शगल रहा है.इनसे सावधान रहें ! इसी में आपकी भी भलाई है और देश की भी भलाई है ! जय भारत.

आइए हिसाब करें आजादी के बाद के इन 72 सालों का !  आजादी के बाद केंद्र में इन 72 सालों में से 52 साल कांग्रेस ने, 12 साल भाजपा ने और 8 साल अन्य गठबंधन की सरकारों ने शासन किया. इस हिसाब से इन 72 सालों में से 1/6  हिस्सा भाजपा ने शासन किया. तो क्या भाजपा ने देश निर्माण में 1/6 हिस्से का योगदान दिया है ? आइये देखते हैं -- 1) क्या देश के 18लाख स्कूलों में से 3लाख स्कूल भाजपा ने खुलवाए ? 2) क्या देश के 8200रेलवे स्टेशनों में से 1300 भाजपा ने बनवाये हैं ? 3) क्या देश के 45000 कन्या विद्यालयों में से 7500 भाजपा ने खुलवाए ? 5) क्या देश भर के 1200नहरों में से 200 नहर भाजपा ने खुदवाये ? 6) क्या देश के लगभग 65 बैंकों (सरकारी व गैर सरकारी ) बैकों में से भाजपा ने कोई खुलवाया ? 7) क्या कोई स्टील प्लांट, गैस प्लांट, परमाणु संयंत्र, इसरो, आईआईटी, एम्स, एयरपोर्ट, सेल, गेल, भेल, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल आदि आदि भाजपा शासन में शुरू हुआ या बना ? 8) देश भर के 200 राष्ट्रीय राजमार्गों में से भाजपा ने कितनों का निर्माण कराया ?  9) कितने केंद्रीय विद्यालय, सैनिक विद्यालय, नवोदय विद्...

हमें मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा ,परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए /

हमें मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा , परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए  /

जब सज़ा दी ही चुके हो तो हाल मत पूंछो...................अगर हम बेक़सूर निकले तो तुम्हे तकलीफ बहुत होगी !!

जब सज़ा दी ही चुके हो तो हाल मत पूंछो ................... अगर हम बेक़सूर निकले तो तुम्हे तकलीफ बहुत होगी !!

तुम्हारा रिजल्ट डिसाइड नहीं करता हैकी तुम लूज़र हो कि नहीं ...तुम्हारी कोशिश तय करती है आज भी याद है ये डायलॉग ...#RIP_SushantSinghRajput

तुम्हारा रिजल्ट डिसाइड नहीं करता है की तुम लूज़र हो कि नहीं ... तुम्हारी कोशिश तय करती है  आज भी याद है ये डायलॉग .. . #RIP_SushantSinghRajput

*लोग बुरे नहीं होते...**बस जब आपके मतलब**के नहीं होते....**तो बुरे लगने लगते है...॥**समझनी है जिंदगी* *तो पीछे देखो,**जीनी है जिंदगी को* *तो आगे देखो .....**हम भी वहीं होते हैं,**रिश्ते भी वहीं होते हैं* *और रास्ते भी वहीं होते हैं**बदलता है तो बस.....**समय, एहसास, और नज़रिया...!!"*

*लोग बुरे नहीं होते...* *बस जब आपके मतलब* *के नहीं होते....* *तो बुरे लगने लगते है...॥* *समझनी है जिंदगी*  *तो पीछे देखो,* *जीनी है जिंदगी को*  *तो आगे देखो .....* *हम भी वहीं होते हैं,* *रिश्ते भी वहीं होते हैं*  *और रास्ते भी वहीं होते हैं* *बदलता है तो बस.....* *समय, एहसास, और नज़रिया...!!"*

#हां_मैं_आरक्षण_हूं... हूँ वही आरक्षण, जिसे खत्म करने के लिए आज अगड़ी जातियों ने तांडव मचाया हुआ है। इसलिए आज मैं बहुत दुखी हूं। मै तिलमिला रहा हूँ। मै आज जोर-जोर से रो रहा हूँ। लेकिन रोने की मेरी आवाज कोई नही सुन रहा है। मेरे इतने बुरे हालात होंगे। ये मुझे मालूम क्या अहसास भी नहीं था। कोई मुझे बचाने भी नहीं आएगा ये भी मैने कभी सोचा नही था। आज मेरे शरीर पर चारो तरफ से हमले हैं- शब्द वाण, व्यंग्य वाण, योजनायें, दुरभिसंधियां ! मेरी छाँव में रहकर कमजोर से कमजोर लोगों ने उन ऊंचाइयों को छुआ, जिसकी वो कल्पना भी नही कर सकते थे। लेकिन आज वे ही मेरे लिए लड़ने के बजाय मुझ पर और मेरे जन्मदाताओं पर बड़े-बड़े इल्जाम लगा रहे हैं। मुझ पर मेरे अपने ही हमलावर हो रहे हैं। मुझ पर सबसे बड़ा इल्जाम ये है कि मैंने जातियो में आपस की खाई को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। जबकी सच्चाई इसके एकदम विपरीत है। मै ही हूँ जिसके कारण दलित, पिछड़े, महिलाओं, कमजोरों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति में हिस्सेदारी मिली। उनको आगे बढ़ने का मौका मिला। सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक कुछ हद तक समानता मिली। जिनको इंसान का दर्जा भी नही दिया जाता था। उनको मुख्य धारा में लाने का काम बहुत हद तक मैंने ही किया है। कमजोर तबकों के हजारो सालो से पाँव में पड़ी गुलामी की बेड़ियां तोड़ने में मेरा बहुत बड़ा योगदान है। मुझ पर दूसरा आरोप है कि मेरे कारण अयोग्य व्यक्ति आगे बढ़ रहे हैं। यह आरोप भी सरासर बेबुनियाद है। अयोग्य व्यक्ति तो उस समय बढ़ते थे और आज भी बढ़ रहे हैं, कुछ खास जात, धर्म या रुपये वालों का कब्जा संसाधनों पर होता है। एक सामाजिक, राजनितिक, आर्थिक सम्पन परिवार अपने बच्चे का नाम अच्छे स्कूल में लिखवाते हैं, फिर भी वो बच्चा नही पढ़ता, उसके बाद उसके अभिभावक उच्च शिक्षा में उसका एडमिशन डोनेशन दे कर करवाते हैं और फिर डोनेशन से ही नौकरी हासिल कर लेते हैं। लेकिन एक बच्चा, जिसके माँ-बाप मजदूर हैं, सामाजिक असमानता झेली है, जिसने जातीय उत्पीड़न झेला है, पिछड़े स्कूल में पढ़ा है, पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी की है, उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए कुछ कम नम्बर आये हैं, इसलिए आरक्षण के सहारे एडमिशन ले लेता है। उसके बारे में आर्थिक संपन्न लोग कहते हैं कि मेरिट खराब हो गयी, अयोग्य आ गए। आज मै आपको मेरी जन्म से लेकर अब तक का दास्तान सुनाता हूँ। जब मेरा जन्म हुआ था तो मानव जाति में जो सबसे कमजोर तबका था उसको बहुत ख़ुशी हुई थी। मेरा तो जन्म ही उस कमजोर मानव के लिए हुआ था। कमजोर मतलब सामाजिक, राजनितिक तौर पर कमजोर और जो सामाजिक, राजनितिक तौर पर कमजोर होता है, वह बहुसंख्य आर्थिक तौर पर भी कमजोर होता है। मुझे केंद्र में लाने का बहुत छोटा पर बहुत ही मजबूत प्रयास करने का साहस एक महान योद्धा ने किया। महाराष्ट्र के कोल्हापुर के महाराजा साहूजी महाराज, जिन्होंने महान शिक्षाविदव् दलितों, पिछड़ो, कमजोरों और महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाने वाले जोतिबा फुले और सावित्र बाई फुले से प्रभावित होकर, अपनी रियासत में पिछड़ों के लिए शिक्षा, रोजगार और राजनीति में आरक्षण का प्रावधान किया। कोल्हापुर राज्य में पिछड़े वर्गों/समुदायों को नौकरियों में आरक्षण देने के लिए 1902 में अधिसूचना जारी की गयी थी। यह अधिसूचना भारत में दलित वर्गों के कल्याण के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने वाला पहला सरकारी आदेश है। विंध्य के दक्षिण में प्रेसिडेंसी क्षेत्रों और रियासतों के एक बड़े क्षेत्र में पिछड़े वर्गों के लिए आजादी से बहुत पहले आरक्षण की शुरुआत की गयी। 1902 के मध्य में साहू महाराज इंग्लैण्ड गए हुए थे। उन्होंने वहीं से एक आदेश जारी कर कोल्हापुर के अंतर्गत शासन-प्रशासन के 50 प्रतिशत पद पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित कर दिये। महाराज के इस आदेश से कोल्हापुर के ब्राह्मणों पर जैसे गाज गिर गयी। उल्लेखनीय है कि सन 1894 में, जब साहू महाराज ने राज्य की बागडोर सम्भाली थी, उस समय कोल्हापुर के सामान्य प्रशासन में कुल 71 पदों में से 60 पर ब्राह्मण अधिकारी नियुक्त थे। इसी प्रकार लिपिकीय पद के 500 पदों में से मात्र 10 पर गैर-ब्राह्मण थे। साहू महाराज द्वारा पिछड़ी जातियों को अवसर उपलब्ध कराने के कारण सन 1912 में 95 पदों में से ब्राह्मण अधिकारियों की संख्या अब 35 रह गई थी। छत्रपति साहू महाराज ने पिछड़ी जातियों समेत समाज के सभी वर्गों मराठा, महार, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, ईसाई, मुस्लिम और जैन सभी के लिए अलग-अलग सरकारी संस्थाएँ खोलने की पहल की। साहू महाराज ने उनके लिए स्कूल और छात्रावास खोलने के आदेश जारी किये। जातियों के आधार पर स्कूल और छात्रावास असहज लग सकते हैं, किंतु नि:संदेह यह अनूठी पहल थी उन जातियों को शिक्षित करने के लिए, जो सदियों से उपेक्षित थीं। उन्होंने दलित-पिछड़ी जातियों के बच्चों की शिक्षा के लिए ख़ास प्रयास किये थे। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। साहू महाराज के प्रयासों का परिणाम उनके शासन में ही दिखने लग गया था। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाले पिछड़ी जातियों के लड़के-लड़कियों की संख्या में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी।#अंगडाई जन्म के बाद मेरा चरणबद्ध विकास शुरू हुआ. 1908 में अंग्रेजों द्वारा बहुत सारी जातियों और समुदायों के पक्ष में, प्रशासन में जिनका थोड़ा-बहुत हिस्सा था, के लिए आरक्षण शुरू किया गया। 1921 में मद्रास प्रेसीडेंसी ने जातिगत सरकारी आज्ञापत्र जारी किया, जिसमें गैर-ब्राह्मणों के लिए 44 प्रतिशत, ब्राह्मणों के लिए 16 प्रतिशत, मुसलमानों के लिए 16 प्रतिशत, भारतीय-एंग्लो/ईसाइयों के लिए 16 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों के लिए आठ प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रस्ताव पास किया, जो पूना समझौता कहलाता है, जिसमें दलित वर्ग के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किए गए। 15 अगस्त 1947 को आजादी के बाद डॉ भीम राव आंबेडकर के प्रयासों से दलितों के लिए सविधान में आरक्षण की व्यवस्था की जाती है। लेकिन बहुत प्रयासों के बाद भी डॉ साहब पिछड़ो को आरक्षण में शामिल नही कर सके। पिछड़ो के लिए आरक्षण 1990 में मण्डल आयोग के निर्देश पर वी पी सिंह ने लागू किया। मण्डल आयोग ने पिछड़ो की परिभाषा साफ-साफ इंगित की- जो जाति सामाजिक आधार पर और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ी हुई हो, वह जाति पिछड़ी मानी जायेगी। प्रत्येक जाति की राज्य अनुसार अलग स्थिति हो सकती है। लेकिन कमजोरो को मिले आरक्षण के खिलाफ अगड़ों ने बहुत बड़े-बड़े हिंसक प्रदर्शन किए। व्यापक पैमाने पर खिलाफ में प्रचार किया। मैने दलितों-वंचितों में एक मानवीय चेतना का संचार किया है जो उनमें आत्मसम्मान की भावना को बढ़ाता है। मेरे कारण सामाजिक, शैक्षणिक असमानता की दीवार कमजोर हुई है। लेकिन दलितों-पिछड़ों को अगड़ों के बराबर खड़ा करने में मैं अभी भी नाकाम रहाहूँ। उल्टा यह भी सच है कि मेरा फायदा उठाकर दलितों में भी एक सवर्ण तबका पैदा हो गया है, जो आज मुझे गालियाँ देता है।#संकट_के_बादल पिछले कुछ समय से सवर्ण मुझे मारने के लिए नया फार्मूला लेकर आये है। अब अगड़ी जातियां ही आरक्षण की मांग करने लग गयी है। उनकी एक ही मांग है या तो हमे भी दो या किसी को भी न दो। हरियाणा में जाट और गुजरात में पटेल महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन इसी के उदाहरण हैं, उसमें वे कामयाब भी होते जा रहे हैं। दूसरी तरफ राज्य सरकारें मेरे खात्मे के लिए लगी हुई है। गुजरात के बाद अब हरियाणा सरकार ने भी फैसला लिया है कि जो भी आरक्षित कोटे से फॉर्म अप्लाई करेगा वह जनरल में प्रतियोगिता नही कर सकता। मेरी मूल भावना के खिलाफ यह षड़यंत्र है। मैं शुरू से स्पष्ट था: “जो निर्दिष्ट समुदाय के तहत नहीं आते हैं, वे केवल शेष पदों के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, जबकि निर्दिष्ट समुदाय के सदस्य सभी संबंधित पदों (आरक्षित और सार्वजनिक) के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।“ लेकिन सरकारों द्वारा मेरे आधार को ही खत्म किया जा रहा है। आज मुझे खत्म करने या आर्थिक आधार पर करने की बहस करने के बजाए बहस इस बात पर केंद्रित होनी चाहिए कि मैं अब तक अपने उद्देश्य में कामयाब क्यों नहीं हो पाया। मुझे लागू करने में सरकारों की विफलता कहाँ रही?बाबा साहब के संविधान में महिलाओं के लिए किये गए विशेष उपबंध (आरक्षण)1.बहुपत्नी की परम्परा को खत्म कर नारियो को अद्भुत सम्मान दिया.2. प्रथम वैध पत्नी के रहते दूसरी शादी को अमान्य किया.3. बेटा की तरह बेटी को भी पिता की सम्पति में अधिकार का प्रावधान किया.4 . गोद लेने का अधिकार दिया.5. तलाक लेने का अधिकार दिया.6. बेटी को वारिश बनने का अधिकार दिया.7. प्रसव छुट्टी का प्रावधान किया.8.सामान काम के लिए पुरुषो सा सामान वेतन पाने का अधिकार दिया.9. स्त्री की क्षमता के अनुसार ही काम लेने का प्रावधान किया.10 भूमिगत कोल खदानों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाया.11. श्रम की अवधी 12 घंटा से घटा कर 8 घंटा किया.12. लिंग भेद को खत्म किया.13. बाल विवाह पर रोक लगाया.14. रखनी प्रथा , वेश्याव्रिति पर रोक.15. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया.16. मताधिकार का अधिकार दिया.17. प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति बनने का द्वार खोला.18. मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया.ये सारे अधिकार सभी महिलाओं के लिए बनाया. इस संविधान 1950 के पूर्व नारी, पुरुष की दासी मात्र थी जिसका गवाह धर्म के शास्त्र है.इन शास्त्रो में स्त्रियों को झूठी कहा गया, उनके मन को भेड़िये जैसा बताया गया, किसी भी पुरुष के प्रति आकर्षित हो जाने वाली बताया। मानस में तुलसी ने पशुओं की तरह नारी को पीटने योग्य बताया, गीता में पापयोनि वाला बताया, मनुसमृति में तो पूछिये मत नारी को किस स्तर तक गिरा .लेकिन संविधान के अनुच्छेद 13 में इन सारे शाश्त्रीय नियमों को ध्वस्त कर उन्हें एक इंसान के रूप में सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार दिया ! जय भीम जय संविधान जय भारत !💥 *आरक्षण पर एक नजर* 💥💥 *यह पोस्ट उन मूर्खो के लिए है जो यह कहते है की आरक्षण से देश पीछे जा रहा है*💥🔥*आज देश के युवाओ में आरक्षण को लेकर तरह तरह के भ्रम पैदा किये जा रहे है*आरक्षण की सच्चाई को छुपाया जा रहा है और भ्रम को फैलाया जा रहा हैं जिस कारण आज अनारक्षित वर्ग के मनो में आरक्षित वर्ग के लिए हिन भावना उत्पन्न हो रही है। सबसे पहले तो यह बतादू की परमपूजनीय डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने दबे कुचले पिछड़े वर्ग के लिए दलितों के लिए "आरक्षण" की मांग नही किये थे उन्होंने अपने समाज के लिए "स्वतंत्र मताधिकार" का अधिकार माँगा था पर Mr. Gandhi के हस्तक्षेप के कारण हमें "स्वतंत्र मताधिकार" का हक़ नही मिला और "पुन पैक्ट" संधि हुए जिससे देश में आरक्षण लागु किया गया🔥🔥*मंडल कमीशन रिपोर्ट के बाद देश में 27% आरक्षण का प्रावधान लागु किया गया उस 27% आरक्षण में (SC, ST, OBC, VJ, NT इत्यादि) वर्ग के लोग शामिल है लेकिन आज तक देश में इन वर्गों को 27% आरक्षण नही दिया गया किसी राज्य में 20% कही 15% तो कही 12% ही आरक्षण मिल रहा है, और कही आरक्षण दिया ही नही जाता सिर्फ आरक्षण का नाम लिया जाता है* 🔥💥 आज कुछ लोग कहते है की आरक्षण के कारण कम पढ़े लिखे लोग डॉक्टर बन रहे है! ऐसे मूर्खो को यह नही पता की आरक्षित वर्ग के कुछ ही छात्र आरक्षण से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेते है पर उस मेडिकल कॉलेज में आरक्षित वर्ग का छात्र अपने मेहनत, लगन, और पढाई के बल पर डॉक्टर की डिग्री हासिल करता है आरक्षण सिर्फ एडमिशन दिलवाने में सहायक है डिग्री दिलवाने में नही। 💥🔥*कुछ लोग कहते है की नौकरियों में कॉलेजों में एडमिशन में आरक्षित वर्ग के लोग अनारक्षित वर्ग के अधिकार को छीनने का कार्य करते है, ऐसे लोगो को या तो आरक्षण के प्रावधानों का पता नही या ऐसे लोग जानबूझकर देश के युवाओ में भ्रम पैदा कर रहे है लेकिन हकीकत कुछ और है। उदहारण:- यदि किसी कॉलेज में 1000 छात्रो की VACANCY है इसमें यदि आरक्षित वर्ग को एडमिशन लेना हो तो आरक्षित वर्ग के छात्रो का सिर्फ 27% सीटो पर ही एडमिशन किया जायेगा 1000 की संख्या में यदि 27% सीट का आकड़ा निकाला जाये तो 270 सीट, मतलब 1000 सीट में से सिर्फ 270 सीट की VACANCY आरक्षित वर (SC, ST, OBC, VJ, NT इत्यादि) छात्रो की भरती की जायेगी बाकी के बचे 730 सीट में सिर्फ बड़ी जाती के लोग OPEN CASTE की VACANCY होगी, यही प्रक्रिया नौकरियों में भी किया जाता है। अब आप ही सोचिये क्या आरक्षित वर्ग के लोग अनारक्षित वर्ग का अधिकार छीन रहे है?? नही.! देश में सिर्फ इस बातो का भ्रम फैलाया जा रहा है।* 🔥💥 इस देश में सदियो से दबे कुचले दलितों को आगे आने का मौका नही दिया जा रहा है सदियो से दलितों को दबाया जा रहा था। आज दलित वर्ग के लोग आगे बढ़ रहे हैं जिससे हमारे देश की उन्नति हो रही है। *आरक्षण से देश पीछे नही जा रहा है आरक्षण से हमारा देश आगे जा रहा है क्योंकि अब सभी वर्ग के लोग उन्नति करके देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे है*आज हमें आरक्षण को आबादी के अनुपात में लागु करवाने की जरूरत है और निजी कंपनीयो में भी हमें आरक्षण को लागु करवाने की जरूरत है ताकि हमारे देश की उन्नति तेजी से हो सके दबे कुचलो को भी आगे आने का मौका मिले।💥🔥आरक्षण से पहले देश में सिर्फ ब्राह्मण, क्षत्रिय बड़े जाती के लोगो को ही पढ़ने लिखने का अधिकार, नौकरी करने का अधिकार था, पड़े पदों पर नियुक्ति का अधिकार सिर्फ इन बड़े जाती के लोगो का ही था और हम दलितों को दबे कुचले लोगो को ये मनुवादि लोग अपना गुलाम बनाकर रखते थे, इनके घरो का काम, इनके जानवरो को सँभालने का कार्य, इनके गंदगी साफ करने का कार्य ये मनुवादि लोग हमसे करवाते थे। आज आरक्षण की सहायता से हमारे दबे कुचले वर्ग के लोग थोडा आगे क्या बढ़ रहे है इनकी आँखों में जैसे कंकड़ घुस गया हो इसलिए ये लोग आरक्षण को लेकर तरह तरह के भ्रम फैला रहे है। *लेकिन दुःख और आश्चर्य हमें तब होता है जब अपने ही लोग आरक्षण के प्रावधानों को न समझकर इन मनुवादियों के बहकावे में आकार आरक्षण का विरोध करते है।* 🔥💥 *आज मनुवादी लोग आरक्षण समाप्त करने के लिए तरह तरह के भ्रम जाल फैला रहे है, लेकिन शायद ये मनुवादी लोग यह भूल रहे है की परमपूजनीय डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने जिस कलम को लिख दिये उसे तुम लाख कोशिश करलो पर तुम मनुवादि लोग उस कलम को मिटा नही सकते, जरूरत है सिर्फ हमारे समाज का युवा को हकीकत जानने की जिस दिन हमारे समाज के युवा बाबासाहेब के त्याग और समर्पण को समझकर बाबासाहेब के मिशन में शामिल हो जायेंगे उसदिन इस देश में नया इतिहास रचा जायेगा। उसदिन इस देश से मनुवाद/ ब्राह्मणवाद समाप्त होगा।

Kg

चरागों को बुझाया जा रहा है अंधेरों को बढ़ाया जा रहा है.हुक़ूमत जाने किस नशे में है ग़रीबों को मिटाया जा रहा है.लुटा के अनमोल विरासत को नया भारत बनाया जा रहा है.

चरागों को बुझाया जा रहा है  अंधेरों को बढ़ाया जा रहा है. हुक़ूमत जाने किस नशे में है  ग़रीबों को मिटाया जा रहा है. लुटा के अनमोल विरासत को  नया भारत बनाया जा रहा है.

अपनी #कहानी ख़ुद लिखते हैं ,ख़ुद ही #डायरेक्टर होते हैं ,हम लोग #वकील हैं ,हमारे अपने #पर्दे अपने #थियेटर होते हैं .

अपनी #कहानी ख़ुद लिखते हैं , ख़ुद ही #डायरेक्टर होते हैं , हम लोग #वकील हैं , हमारे अपने #पर्दे अपने #थियेटर होते हैं .

💜जो निभा दे साथ जितना,उस साथ का भी शुक्रिया💜छोड़ दे जो बीच मे उस हाथ का भी शुक्रिया.......💜💜Very good morningKrishnagopaladvocate.blogspot.com

💜जो निभा दे साथ जितना,उस साथ का भी शुक्रिया💜 छोड़ दे जो बीच मे उस हाथ का भी शुक्रिया.......💜💜 Very good morning Krishnagopaladvocate.blogspot.com

👉#घायल_तो_हर_एक_परिंदा_है_यहा....👉#जो_उठके_लढ_सका_वही_जिंदा_है_यहा....😎🤘

👉#घायल_तो_हर_एक_परिंदा_है_यहा....👉 #जो_उठके_लढ_सका_वही_जिंदा_है_यहा....😎🤘

ये जो सुना इक दिन वो हवेली यकसर बे-आसार गिरी हम जब भी साए में बैठे दिल पर इक दीवार गिरी...जूँही मुड़ कर देखा मैं ने बीच उठी थी इक दीवार बस यूँ समझो मेरे ऊपर #बिजली सी इक बार गिरी...#जौनएलिया

ये जो सुना इक दिन वो हवेली यकसर बे-आसार गिरी  हम जब भी साए में बैठे दिल पर इक दीवार गिरी... जूँही मुड़ कर देखा मैं ने बीच उठी थी इक दीवार  बस यूँ समझो मेरे ऊपर #बिजली सी इक बार गिरी... #जौनएलिया