Posts

Showing posts from April, 2021

"भारत का संविधान उन आठ करोड़ अछूतों में नई आशा जगाता है, जिनकी छाया से मतांध परंपरावादी बहुसंख्यको के अनुसार भोजन भी अपवित्र हो जाता था, लेकिन अब वे भी भारत के नागरिक हैं और कानून के सामने उन्हें भी बराबरी का अधिकार है।"यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सत्ता की बागडोर अछूतों के हाथों में आए। जब तक अछूत राजनेता सत्ता में नहीं आएंगे तब तक अस्पृश्यता दूर नहीं होगी। हमें सभी को एकजुट कर राजनीतिक स्थिति स्थापित करनी चाहिए।“ *डॉ० भीमराव अम्बेडकर*

Image

बंधुता भाग-२ 'बंधुता’ का सिद्धांत और हमारा संविधान। @krishnagopalya5

Image
बंधुता भाग-२   'बंधुता’ का सिद्धांत और हमारा संविधान।        १३ दिसम्बर १९४६ में पंडित जवाहरलाल नेहरु ने ‘objective resolution’ जिसे हम हिंदी में। ‘उद्देश्य संकल्प’ कहते है संविधान  सभा के समक्ष प्रस्तुत किया. इस उद्धेश्य संकल्प में आने वाले संविधान के कुछ आधारभूत तत्व,सिद्धांत  रखे गए थे. यही उद्धेश्य संकल्प बाद में संविधान की प्रस्तावना बना.             ऑब्जेक्टिव resolution  के ओरिजिनल ड्राफ्ट में fraternity अर्थात 'बंधुता’ के सिद्धांत का उल्लेख नहीं था.        डॉ. आंबेडकर ने २१ फेब्रुअरी १९४८ को संविधान के दस्तावेज का फाइनल ड्राफ्ट संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समक्ष पेश करते हुए लिखा, “संविधान सभा ने fraternity की धारा को संविधान  की प्रस्तावना में जोड़ा है जो पहले  ‘उद्धेश्य संकल्प’ में नहीं था, क्योंकि संविधान सभा को लगता है बंधुता पूर्ण सामंजस्य की जैसी जरुरत आज है वैसी पहले कभी नहीं थी”.        डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जिनके पूरे दर्शन का ...

निजीकरण #संविधान में आर्टिकल 21, 37, 38, 39 और 300 के रहते केन्द्र सरकार निजीकरण नहीं कर सकती और न ही निजीकरण पर कोई कानून बना सकती।

Image
#निजीकरण #संविधान में आर्टिकल 21, 37, 38, 39 और 300 के रहते केन्द्र सरकार निजीकरण नहीं कर सकती और न ही निजीकरण पर कोई कानून बना सकती। यदि सरकार संविधान का उलंघन कर निजीकरण के लिए मनमाना कानून बनाती है तो सरकार अदालतों में टिक नहीं सकती वसरते न्यायालय सही न्याय करे तो  संविधान का उलंघन देश द्रोह का अपराध है और उम्र कैद की सजा का प्रावधान है और सही निर्णय होने पर सरकार भंग हो सकती है आज अच्छी शिक्षा पा रहे सभी भारतीयों के बच्चे निजीकरण के कारण पूँजीपतियों के यहाँ 5000 के नौकर होंगे। सम्मानित साथियों संविधान सभा में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई थी कि देश में प्राइवेट सेक्टर तैयार किया जाए या पब्लिक सेक्टर/ सरकारी सेक्टर संविधान सभा की पूरी बहस के बाद संविधान निर्माताओं ने यह तय किया कि देश में व्यपक स्तर पर असमानता है और असमानता को दूर करने के लिए पब्लिक सेक्टर यानि सरकारी सेक्टर तैयार किया जाए यह संविधान निर्मात्री सभा की सहमति हुई थी तथा संविधान के आर्टिकल 37, 38, 39 में भी सरकारी सेक्टर को केवल बढावा देना ही नहीं बल्कि ऐसी किसी भी प्रकार की नीति बनाने का प्रतिषेध किया है कि जिससे...

😀😀होशियार बच्चा और रामायण की कहानी 😀😀अध्यापक :-बच्चों रामचंद्र जी ने समुद्र पर पुल बनाने का निर्णय लिया

Image
😀😀होशियार बच्चा और रामायण की कहानी 😀😀 अध्यापक :-बच्चों रामचंद्र जी ने समुद्र पर पुल बनाने का निर्णय लिया  पप्पू :- सर मैं कुछ कहना चाहता हूँ।  अध्यापक :- कहो बेटा  पप्पू :- रामचंद्र जी का पुल बनाने का निर्णय गलत था।  अध्यापक :- वो कैसे।  पप्पू :- सर, उनके पास हनुमान थे  जो उडकर लंका जा सकते थे।  तो उनको पुल बनाने की कोई जरूरत नहीं थी  अध्यापक :- हनुमान ही तो उड़ना जानते थे बाकी रीछ और वानर तो नहीं उडते थे।  पप्पू :- सर वो हनुमान की पीठ पर बैठ कर जा सकते थे।  जब हनुमान पुरा पहाड़ उठाकर ले जा सकते थे।  तो..... अध्यापक :- भगवान की लीला पर सवाल नहीं उठाया करते नालायक  पप्पू :- वैसे सर एक उपाय और था।  अध्यापक :- (गुस्से में ).....क्या ?  पप्पू :- सर, हनुमान अपने आकार को कितना भी छोटा बड़ा कर सकते थे  जैसे सुरसा के मुंह से निकलने के लिए छोटे हो गये थे और सूर्य को मुंह में लेते समय सूर्य से भी बडे.......... तो वो अपने आकार को भी तो समुद्र की चौडाई से बड़ा कर सकते थे और समुद्र के ऊपर लेट जाते।  और सारे बन्दर 🙊 ...

#काला_अक्षर_भैंस_बराबर , आइये आपकी भैस से ही आपको सामंतवाद, पूँजीवाद, ब्राह्मणवाद, मार्क्सवाद, लोकतंत्र, प्रजातंत्र, जैसे कठिन शब्दों का मतलब समझाएं.........

Image
#काला_अक्षर_भैंस_बराबर , आइये आपकी भैस से ही आपको सामंतवाद, पूँजीवाद, ब्राह्मणवाद, मार्क्सवाद, लोकतंत्र, प्रजातंत्र, जैसे कठिन शब्दों का मतलब समझाएं......... #पूंजीवाद_क्या_है? – पूंजीवादी वो है लठैत/बल लेकर आये और आपकी भैंस का दूहा दूध आपसे छीन ले जाए ! पूंजीवाद का चरम ‘पूँजी’ के एकाधिकार और संकेंद्रीकरण में हैं – पहले घरेलू उद्योग उजाड़ दो, फिर छोटे उद्योग, कल-कारखाने हड़प लो, फिर मंझोले उद्योग चौपट करो और धीरे-धीरे केवल बड़े पूंजीपति रह जाएँ या केवल एक रह जाय सारी पूंजी और संपत्ति का मालिक – एक ही बड़ी मछली बचे, सारी छोटी मछलियों को खाकर … अपने आस-पास देखिये क्या ऐसा नहीं हो रहा है? – क्या छोटी-छोटी दुकानें धीरे-धीरे बंद नहीं हो रही हैं, छोटी-छोटी फैक्टरियां, घरेलू-उद्योग? …. क्या किसान खेत-खलियान बेचकर मज़दूर नहीं बन रह हैं – खेती के उत्पादन अब उतने लाभप्रद नहीं रह गए हैं? खेती की ज़मीन बेचने में किसान ज्यादा बेहतरी समझते हैं? …. क्या आपके आस-पास मज़दूरों की संख्या नहीं बढ़ी है? मज़दूर-मंडी में सुबह मज़दूर खरीद लिए जाने के बाद भी क्या बड़ी तादाद में मज़दूर बच नहीं जाते जिनके लिए कोई काम नहीं र...

अन्य वर्गों की दिवाली कब होगी भविष्य की बात, परन्तु अम्बेडकर जयंती देश के scst/obc वर्ग का अवश्य प्रकाश उत्सव है। भाजपा की चाल से सावधान! #

Image
अन्य वर्गों की दिवाली कब होगी भविष्य की बात, परन्तु अम्बेडकर जयंती देश के scst/obc वर्ग का अवश्य प्रकाश उत्सव है।      भाजपा की चाल से सावधान!   #AkhileshYadav  ने 14 अप्रैल को '#दलित_दिवाली मनाने का ऐलान किया तो चौतरफा हंगामा हो गया। अधिकतर लोगों की आपत्ति है कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को दलित वर्ग तक सीमित क्यों किया जा रहा है। जबकि उनका योगदान सभी समाज के लिए रहा है। उन्होंने संविधान बनाया, आरबीआई की नींव डाली, महिलाओं का उत्थान किया, अर्थनीतियां बनाई और सर्वजनों के लिए तमाम काम किए। इसपर बहुत कुछ लिखा जा सकता है, बहुत कुछ बोला जा सकता है मगर एक और एकमात्र उदाहरण से समझा जा सकता है कि ये विवाद बेवजह क्यों है।  देश की राजधानी दिल्ली से आते हुए, उत्तर प्रदेश में प्रवेश करते ही DND के निकट एक भव्य पार्क और स्मारक दिखाई देता है। जहां से शुरू होती है बहुजनों के इतिहास के ग्लोरिफिकेशन की कहानी।  इस भव्य पार्क और स्मारक में सबसे ज्यादा फोकस में रखे गए हैं 'डॉक्टर भीमराव अंबेडकर' और दिखाया गया है कि उन्होंने कैसे संविधान रचकर तत्कालीन राष्ट्रपति को सौंपा औ...

ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़,मेरी अपनी मंजीले, मेरी अपनी दौड....!ना कुछ खोने की फिक्र, ना कुछ पाने की फिक्र।

Image
हम देहात के निकले बच्चे थे ! पांचवी तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे ! स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी ! कक्षा के तनाव में स्लेटी खाकर हमनें तनाव मिटाया था ! स्कूल में टाट-पट्टी की अनुपलब्धता में घर से खाद या बोरी का कट्टा बैठने के लिए बगल में दबा कर भी ले जातें थे ! कक्षा छः में पहली दफा हमनें अंग्रेजी का कायदा पढ़ा और पहली बार एबीसीडी देखी ! स्मॉल लेटर में बढ़िया f बनाना हमें दसवीं तक भी न आया था ! करसीव राइटिंग तो आज तक न सीख पाए ! हम देहात के बच्चों की अपनी एक अलहदा दुनिया था कपड़े के बस्ते में किताब और कापियां लगाने का विन्यास हमारा अधिकतम रचनात्मक कौशल था ! तख्ती पोतने की तन्मयता हमारी एक किस्म की साधना ही थी ! हर साल जब नई कक्षा के बस्ते बंधते (नई किताबें मिलती) तब उन पर जिल्द चढ़ाना हमारे जीवन का स्थाई उत्सव था ! ब्लू शर्ट और खाकी पेंट में जब हम इंटरमीडिएट कालेज पहूँचे तो पहली दफा खुद के कुछ बड़े होने का अहसास हुआ ! गाँव से आठ-दस किलोमीटर दूर के कस्बें में साईकिल से रोज़ सुबह कतार बना कर चलना और साईकिल की रेस लगाना हमारे जीवन की अधिकतम प्रतिस्प...

दिल्ली तेरे भाग बड़े हैं तेरे दरवाजे पर किसान खड़े हैं . !!#किसान_कृषि_बिल_दहन_करेगे#किसान_कृषि_बिल_दहन_करेगे

Image