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Showing posts from May, 2020

कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं, जीता वही जो डरा नहीं.

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कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं, जीता वही जो डरा नहीं.       

जा के ये कह दे कोई शोलों से चिंगारी से फूल इस बार खिले हैं बड़ी तय्यारी से... बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के न लिए हम ने #ख़ैरात भी माँगी है तो ख़ुद्दारी से... #राहत_इंदौरी

जा के ये कह दे कोई शोलों से चिंगारी से फूल इस बार खिले हैं बड़ी तय्यारी से... बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के न लिए हम ने #ख़ैरात भी माँगी है तो ख़ुद्दारी से... #राहत_इंदौरी

शख्स मामूली वो लगता था ,मगर ऐसा न था सारी दुनिया जेब में थी , हाथ में पैसा न था...

शख्स मामूली वो लगता था ,मगर ऐसा न था सारी दुनिया जेब में थी , हाथ में पैसा न था... 

जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी,अब धुऐं.....पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी-📖🖊️

जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी, अब धुऐं..... पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी 📖🖊️

वो मुसाफ़िर का दर्द क्या समझेंजो फ़क़त टहलने निकलते हैं#फ़हमी बदायूनी

वो मुसाफ़िर का दर्द क्या समझें जो  फ़क़त  टहलने निकलते हैं #फ़हमी बदायूनी

' कैसा पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं , साफ़ छुपते भी नहीं , सामने आते भी नहीं/'

' कैसा पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं ,   साफ़ छुपते भी नहीं , सामने आते भी नहीं/'

सफ़र दो कश्तियों में आदमी कर ही नहीं सकतामुहब्बत को बचाने में क़बीला छूट जाता है...#शकील_🙏

गँवा दिया उन्हें तूने जमाल-ए-मस्ती में  जमाल-ए-मस्त मिले थे तुझे कमाल के लोग... #जौनएलिया #Shair #Log

गँवा दिया उन्हें तूने जमाल-ए-मस्ती में जमाल-ए-मस्त मिले थे तुझे कमाल के लोग...#जौनएलिया#Shair #Log

गँवा दिया उन्हें तूने जमाल-ए-मस्ती में  जमाल-ए-मस्त मिले थे तुझे कमाल के लोग... #जौनएलिया #Shair #Log

lवक़्त के हाथ का.....फेंका हुआ पत्थर हूँ मैंअब तो मुझ को किसी शीशे में उतर जाने दो

हमारी अफवाह के धुंए वहीं से उठते हैं,   जहाँ हमारे नाम से आग लग जाती है..!!🔥😈

हज़ार छेद किए झोलियों में अपनों कीतुम्हारे नाम पे,,,,,, ख़ैरात करने वालों ने--अज़लान शाह

हज़ार छेद किए झोलियों में अपनों की तुम्हारे नाम पे,,,,,, ख़ैरात करने वालों ने --अज़लान शाह

हमारी अफवाह के धुंए वहीं से उठते हैं, जहाँ हमारे नाम से आग लग जाती है..!!🔥😈

हमारी अफवाह के धुंए वहीं से उठते हैं,   जहाँ हमारे नाम से आग लग जाती है..!!🔥😈

ज़ख़्म तो ज़ख़्म है..कुछ देर में भर जाएगा लफ़्ज़ नश्तर है रग-ए-जाँ* में उतर जाएगा--

ज़ख़्म तो ज़ख़्म है..कुछ देर में भर जाएगा  लफ़्ज़ नश्तर है रग-ए-जाँ* में उतर जाएगा

लगा के काटें ये न सोचो गुलाब आएंगे ..सवाल जैसे होंगे वैसे ही जवाब आएंगे..!!💜

लगा के काटें ये न सोचो गुलाब आएंगे  . . सवाल जैसे होंगे वैसे ही जवाब आएंगे..!!💜

क़ातिल का है क्या नाम....सब पूछ रहे हैंक्या हम भी हैं हम-नाम बता क्यूँ नहीं देते--अलीम उस्मानी

क़ातिल का है क्या नाम....सब पूछ रहे हैं क्या हम भी हैं हम-नाम बता क्यूँ नहीं देते --अलीम उस्मानी

चैन मिलता नहीं है ना दिन रैन में,तुम हो उलझे कहां लेन देन में,हमरे जीवन की उखड़ी पड़ी पटरियां,आग लगि जाए तुम्हरी बुलेट ट्रेन में।

चैन मिलता नहीं है ना दिन रैन में, तुम हो उलझे कहां लेन देन में, हमरे जीवन की उखड़ी पड़ी पटरियां, आग लगि जाए तुम्हरी बुलेट ट्रेन में।

न कमरा जान पाता है, न अँगनाई समझती हैकहाँ देवर का दिल अटका है भौजाई समझती है...हमारे और उसके बीच एक धागे का रिश्ता हैहमें लेकिन हमेशा वो सगा भाई समझती है...#मुनव्वर_राणा

न कमरा जान पाता है, न अँगनाई समझती है कहाँ देवर का दिल अटका है भौजाई समझती है... हमारे और उसके बीच एक धागे का रिश्ता है हमें लेकिन हमेशा वो सगा भाई समझती है... #मुनव्वर_राणा

पैदा हुए हैं अब तो..........मसीहा नए नएबीमार अपनी मौत से पहले ही मर न जाए--फ़ना निज़ामी कानपूरी

पैदा हुए हैं अब तो..........मसीहा नए नए बीमार अपनी मौत से पहले ही मर न जाए --फ़ना निज़ामी कानपूरी

लाऊँ जो दिल की बात ज़बाँ पर तो किस लिएमैं जानता नहीं हूँ.............कि तू जानता नहीं--रिफ़अत सुल्तान

लाऊँ जो दिल की बात ज़बाँ पर तो किस लिए मैं जानता नहीं हूँ.............कि तू जानता नहीं --रिफ़अत सुल्तान

दिलों का ज़िक्र ही क्या है मिलें मिलें न मिलेंनज़र मिलाओ नज़र से नज़र की बात करो--सूफ़ी तबस्सुम

देखे हैं बहुत हम ने हंगामें मोहब्बत के आग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई --सूफ़ी तबस्सुम

देखे हैं बहुत हम ने हंगामें मोहब्बत केआग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई--सूफ़ी तबस्सुम

देखे हैं बहुत हम ने हंगामें मोहब्बत के आग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई --सूफ़ी तबस्सुम

*✍ख़ुद मझधार में होकर भी,🙏**जो औरों का साहिल होता है ।*🙏🌹🙏*✍ईश्वर जिम्मेदारी उसी को देता हैं,🙏**जो निभाने के क़ाबिल होता है ।*✍🏻 *🙏🏻सुप्रभात🙏🏻*

*✍ख़ुद मझधार में होकर भी,🙏* *जो औरों का साहिल होता है ।*🙏🌹🙏 *✍ईश्वर जिम्मेदारी उसी को देता हैं,🙏* *जो निभाने के क़ाबिल होता है  ।*✍🏻            *🙏🏻सुप्रभात🙏🏻*

बख्शे हम भी न गए बख्शे तुम भी न जाओगेवक्त जानता है हर चेहरे को बेनकाब करना.

बख्शे हम भी न गए बख्शे तुम भी न जाओगे वक्त जानता है हर चेहरे को बेनकाब करना.

वक्त ने फँसाया है, लेकिन मैं परेशान नहीं हूँ.हालातों से हार जाऊं, मैं वो इंसान नहीं हूँ. 😭

वक्त ने फँसाया है, लेकिन मैं परेशान नहीं हूँ. हालातों से हार जाऊं, मैं वो इंसान नहीं हूँ. 😭

था गुरूर लंबे होने का तुझे ऐ सड़क!गरीब के हौसले ने तुम्हे पैदल ही नाप दिया!! #Lockdown(चोरित है)

था गुरूर लंबे होने का तुझे ऐ सड़क! गरीब के हौसले ने तुम्हे पैदल ही नाप दिया!! # Lockdown (चोरित है)

हज़ार छेद किए झोलियों में अपनों कीतुम्हारे नाम पे,,,,,, ख़ैरात करने वालों ने--अज़लान शाह

हज़ार छेद किए झोलियों में अपनों की तुम्हारे नाम पे,,,,,, ख़ैरात करने वालों ने --अज़लान शाह

एक आदमी रोटी बेलता है,एक आदमी रोटी खाता है। एक तीसरा आदमी भी है,जो न रोटी बेलता है न रोटी खाता है।। वह सिर्फ रोटी से खेलता है, मै पूछता हूँ।वह तीसरा आदमी कौन है, और मेरे देश की संसद मौन है।। ( कवि सुदामा प्रसाद धूमिल)

एक आदमी रोटी बेलता है,एक आदमी रोटी खाता है।  एक तीसरा आदमी भी है,जो न रोटी बेलता है न रोटी खाता है।।  वह सिर्फ रोटी से खेलता है, मै पूछता हूँ। वह तीसरा आदमी कौन है, और मेरे देश की संसद मौन है।।                                       ( कवि सुदामा प्रसाद धूमिल)

जिस ख्वाब में हो जाए दीदारे #नबी हासिल::   ऐ इश्क़ कभी हमको भी वो नींद सुला दे::

जिस ख्वाब में हो जाए दीदारे #नबी हासिल::    ऐ इश्क़ कभी हमको भी वो नींद सुला दे::      

दिल में तस्वीर तेरी आँखों में आसार तेरेज़ख़्म हाथों में..लिए फिरते हैं बीमार तेरे--फ़ौज़िया रबाब

निगाहें.....दर पे लगी हैं......उदास बैठे हैं किसी के आने की हम ले के आस बैठे हैं --सूफ़ी तबस्सुम

जान दे कर वफ़ा में नाम कियाज़िंदगी भर में एक काम किया--सूफ़ी तबस्सुम

निगाहें.....दर पे लगी हैं......उदास बैठे हैं किसी के आने की हम ले के आस बैठे हैं --सूफ़ी तबस्सुम

निगाहें.....दर पे लगी हैं......उदास बैठे हैंकिसी के आने की हम ले के आस बैठे हैं--सूफ़ी तबस्सुम

निगाहें.....दर पे लगी हैं......उदास बैठे हैं किसी के आने की हम ले के आस बैठे हैं --सूफ़ी तबस्सुम

क़ाएम थी यूँ तो दर्द की महफ़िल जगह जगहहम ही...सुना सके न ग़म-ए-दिल जगह जगह--सूफ़ी तबस्सुम

क़ाएम थी यूँ तो दर्द की महफ़िल जगह जगह हम ही...सुना सके न ग़म-ए-दिल जगह जगह --सूफ़ी तबस्सुम

दिल..हर मक़ाम-ए-शौक़ से अागे निकल गया दामन को खींचती रही.....मंज़िल जगह जगह --सूफ़ी तबस्सुम