ज़ख़्म तो ज़ख़्म है..कुछ देर में भर जाएगा लफ़्ज़ नश्तर है रग-ए-जाँ* में उतर जाएगा--
ज़ख़्म तो ज़ख़्म है..कुछ देर में भर जाएगा
लफ़्ज़ नश्तर है रग-ए-जाँ* में उतर जाएगा
सामाजिक न्याय की लड़ाई में और समाज को संगठित करने में जो भी हमारी भूमिका और हमारा प्रयास हो सकेगा और गरीबों को विधिक सहायता और जो भी सहायता हो सके कि हम अपने पूरे सामर्थ्य और कर्तव्य निष्ठा के साथ करते रहेंगे और इसमें सभी जुड़ने वाले आने वाले सभी एडवोकेट और अन्य लोगों का स्वागत और अभिनंदन है धन्यवाद
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