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Showing posts from July, 2023

ये हैं बांके चमार...जब एक आना की दो गाएं मिलती थी, तब इन पर 50,000 का ईनाम अंग्रेजों ने घोषित किया था। 1857 की क्रांति में जौनपुर क्रांति के मुखिया जिन्हे रूपये की लालच में मुखबिर ने पकड़वा दिया, अपने 16 साथियों समेत फां'सी पर लटक गए थे और लोग कहते हैं कि आजादी चरखे से मिली थी...हद है।।मां भारती के वीर सपूत को शत-शत नमन 🙏#कॉपी

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ये हैं बांके चमार... जब एक आना की दो गाएं मिलती थी, तब इन पर 50,000 का ईनाम अंग्रेजों ने घोषित किया था। 1857 की क्रांति में जौनपुर क्रांति के मुखिया जिन्हे रूपये की लालच में मुखबिर ने पकड़वा दिया, अपने 16 साथियों समेत फां'सी पर लटक गए थे और लोग कहते हैं कि आजादी चरखे से मिली थी...हद है।। मां भारती के वीर सपूत को शत-शत नमन 🙏#कॉपी

साहिब-दिल्ही आने तक के पैसे नही है कृपया पुरुस्कार डाक से भिजवा दो!हलधर नाग-जिसके नाम के आगे कभी श्री नही लगाया गया,3 जोड़ी कपड़े,एक टूटी रबड़ की चप्पल एक बिन कमानी का चश्मा और जमा पूंजी 732रु का मालिक आज पद्मश्री से उद्घोषित होता है l।ये हैं ओड़िशा के हलधर नाग जो कोसली भाषा केप्रसिद्ध कवि हैं। ख़ास बात यह है कि उन्होंने जो भी कविताएं और 20 महाकाव्य अभी तक लिखे हैं, वे उन्हें ज़ुबानी याद हैं। अब संभलपुर विश्वविद्यालय में उनके लेखन के एक संकलन ‘हलधर ग्रन्थावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

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साहिब-दिल्ही आने तक के पैसे नही है कृपया पुरुस्कार डाक से भिजवा दो! हलधर नाग-जिसके नाम के आगे कभी श्री नही लगाया गया,3 जोड़ी कपड़े,एक टूटी रबड़ की चप्पल  एक बिन कमानी का चश्मा और जमा पूंजी 732रु का मालिक आज पद्मश्री से उद्घोषित होता है l।ये हैं ओड़िशा के हलधर नाग जो कोसली भाषा केप्रसिद्ध कवि हैं। ख़ास बात यह है कि उन्होंने जो भी कविताएं और 20 महाकाव्य अभी तक लिखे हैं, वे उन्हें ज़ुबानी याद हैं। अब संभलपुर विश्वविद्यालय में उनके लेखन के एक संकलन ‘हलधर ग्रन्थावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

साथ पढ़ा है। कमाता नहीं है। फटेहाल है। माँगने आया। राजा है। दे दिए होंगे कुछ दान में। या कह दिए होंगे कि कमा कर खाओ। पैर कौन धोता है? दोस्तों के पैर धोने का विश्व में कोई और उदाहरण हो तो बताइए। जिन लोगों ने ये कथा लिखी वे काहे नहीं दोस्तों के पैर धोते हैं? कथा लिखने वाले ने ये सब कारनामा किया है। भगवान से भी खुद को ऊपर बताने के लिए। ताकि जनता तो यूँही फ़्लैट हो जाए।

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साथ पढ़ा है। कमाता नहीं है। फटेहाल है। माँगने आया। राजा है। दे दिए होंगे कुछ दान में। या कह दिए होंगे कि कमा कर खाओ। पैर कौन धोता है?  दोस्तों के पैर धोने का विश्व में कोई और उदाहरण हो तो बताइए। जिन लोगों ने ये कथा लिखी वे काहे नहीं दोस्तों के पैर धोते हैं?  कथा लिखने वाले ने ये सब कारनामा किया है। भगवान से भी खुद को ऊपर बताने के लिए। ताकि जनता तो यूँही फ़्लैट हो जाए।

ब्राह्मणों के बीच समाज सुधार आंदोलन की सख़्त ज़रूरत है। राम मोहन राय के बाद किसी ने ब्राह्मण समाज सुधार की कोशिश की नहीं है। आज उत्तर भारत के ढेर सारे डॉन ब्राह्मण हैं। सैकड़ों श्रीप्रकाश शुक्ला और विकास दुबे इसके प्रमाण हैं।

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ब्राह्मणों के बीच समाज सुधार आंदोलन की सख़्त ज़रूरत है। राम मोहन राय के बाद किसी ने ब्राह्मण समाज सुधार की कोशिश की नहीं है। आज उत्तर भारत के ढेर सारे डॉन ब्राह्मण हैं। सैकड़ों श्रीप्रकाश शुक्ला और विकास दुबे इसके प्रमाण हैं।  ब्राह्मण युवाओं को आपराधिक मानसिकता से बचाने की सख़्त ज़रूरत है।  ठाकुर तो फ़िल्मों के कारण मुफ़्त बदनाम हैं। बॉलीवुड में राइटर्स और डायरेक्टर ठाकुर होते तो ये न होता। बढ़ते शहरीकरण और कृषि आय में कमी के कारण रहे सहे ठाकुर डॉन भी अब कुछ और करने लगे हैं। डॉन अब कहीं और से आ रहे हैं।  शासन प्रशासन और न्याय व्यवस्था में दबदबा होने पर आदमी बेलगाम हो ही जाता है। पर ये अच्छा नहीं है।

एक गिद्ध का बच्चा अपने बाप से बोला "पापा आज मुझे इंसान का गोश्त खाना है"

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एक गिद्ध का बच्चा अपने बाप से बोला "पापा आज मुझे इंसान का गोश्त खाना है" गिद्ध बोला "ठीक हैं बेटा शाम को ला दूँगा.. गिद्ध उड़ा ओर एक सुअर का गोश्त ले कर आया।"  गिद्ध का बच्चा बोला "पापा ये तो सुअर का गोश्त है , मुझे तो इंसान का गोश्त खाना है !" गिद्ध बोला "रूक शाम तक मिल जाऐगा.. गिद्ध फिर उडा ओर एक मरी गाय का गोश्त ले कर आया।" गिद्ध का बच्चा बोला "पापा ये तो गाय का गोश्त है, मुझे तो इंसान का गोश्त खाना है।" गिद्ध उडा ओर उसने सुअर का गोश्त एक मस्जिद के पास और गाय का गोश्त मंदिर के पास फेक दिया।  थोडी देर के बाद वहाँ ढेर सारी इंसानों की लाशे बिछ गई बाप-बेटे ने जम के इंसान का गोश्त खाया।  गिद्ध का बच्चा बोला "पापा ये कैसे हुआ, इतना सारा गोश्त ?"  गिद्ध बोला "बेटा ये इंसान है ही ऐसा, ऊपरवाले ने तो इसे इंसान बना के पैदा किया पर धर्म के नाम पर इसे "जानवर" से भी बदतर बनाया जा सकता है..   और ये काम इन इंसानों में बैठे कई गिद्ध पहले से कर रहे हैं।  आज पेट भरने के लिए हमने भी कर दिया।  PNGangwar