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Showing posts from April, 2020

दीवार-ओ-दर से चाहे तो रिश्ता बना के रखलेकिन बुरा न माने तो...दस्तक बचा के रखदुश्मन भी हो तो उस के हलक़ से उतर सकेलहजे के जाम को ज़रा...मीठा बना के रख(अज्ञात)

दीवार-ओ-दर से चाहे तो रिश्ता बना के रख लेकिन बुरा न माने तो...दस्तक बचा के रख दुश्मन भी हो तो उस के हलक़ से उतर सके लहजे के जाम को ज़रा...मीठा बना के रख (अज्ञात)

मुहब्बत रूह में उतरा हुआ मौसम है जानांतआल्लुक़ ख़त्म करने से मुहब्बत ख़त्म नहीं होती...#परवीन_शाकिर

मुहब्बत रूह में उतरा हुआ मौसम है जानां तआल्लुक़ ख़त्म करने से मुहब्बत ख़त्म नहीं होती... #परवीन_शाकिर

मरूँगा पूरी तरह या मैं पूरा जी लूँगा,ज़मीं पे रहना मुझे बन के ज़िंदा लाश नहीं...

मरूँगा पूरी तरह या मैं पूरा जी लूँगा, ज़मीं पे रहना मुझे बन के ज़िंदा लाश नहीं...

बख्शे हम भी न गए बख्शे तुम भी न जाओगे वक्त जानता है हर चेहरे को बेनकाब करना।

चुप रहूँ तो शब्दों का दम घुटता है ,  और सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं . . 😊😊😊

यूं ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से ये नए मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो अभी राह में कई मोड़ हैं, कोई आएगा, कोई जाएगा तुम्हें जिसने दिल से भुला दिया, उसे भूलने की दुआ करो मुझे इश्तिहार-सी लगती हैं, ये मोहब्बतों की कहानियां जो कहा नहीं, वो सुना करो, जो सुना नहीं, वो कहा करो ये ख़िज़ां की ज़र्द-सी शाल में, जो उदास पेड़ के पास है ये तुम्हारे घर की बहार है, इसे आंसुओं से हरा करो.

चुप रहूँ तो शब्दों का दम घुटता है ,  और सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं . . 😊😊😊

चुप रहूँ तो शब्दों का दम घुटता है , और सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं ..😊😊😊

चुप रहूँ तो शब्दों का दम घुटता है ,  और सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं . . 😊😊😊

मैं पत्थर हूँ मेरे सर पर यही इल्ज़ाम आता है,कहीं भी आईना टूटे मेरा ही नाम आता है !~अज्ञात#CommunalVirus

मैं पत्थर हूँ मेरे सर पर यही इल्ज़ाम आता है, कहीं भी आईना टूटे मेरा ही नाम आता है ! ~अज्ञात #CommunalVirus