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Showing posts from August, 2022

🙏लालू राज मतलब जनता का राज.. 🙏

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◾बिहार : समझिए लालू सरकार होने का मतलब...यूं ही नहीं मशीहा कहा जाता....!   ◾तस्वीर में जो लड़कियां दिख रही हैं वो बिहार की राजधानी पटना में ग्रेजुएट चायवाली के नाम से मशहूर है। कल (18/08/2022) इनकी चाय के ठेले को नगर निगम वाले उठा ले गए थे, इनके अलावा भी बहुतों का ठेला नगर निगम वाले उठा ले गए थे। ◾जब इन बेटियों काे मालूम हुआ कि लालूजी पटना आ चुके हैं,वे पहुंच गई लालूजी के पास, गरीबा, शाेषित, वंचित, के मसीहा एवं पूर्व रेल मंत्री भारत सरकार  तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री Lalu Prasad Yadav जी ने कहा कि एक एप्लिकेशन लिख दो मुख्यमंत्री के नाम, मैं आपकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचा दूंगा। इन बेटियों ने एप्लिकेशन लिखा,लालूजी के साथ फोटो खिंचवाई और वापस आ गई। ◾शाम को न्यूज देखा कि सारे ठेले खोमचे वाले अपना ठेला खोमचा वापस ले जा रहे हैं नगर निगम के गोदाम से, पत्रकार जब निगम कर्मियों से पूछ रहे थे कि इनका ठेला क्यों उठाया था और अब किसके आदेश छोड़ रहे हैं...? किसी के पास कोई जवाब नहीं था। ◾ यही होती है लालू सरकार, जिस सरकार में समाज का अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी सरकार...

भगत_सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी (वाल्मीकि) का नाम #बोघा था. भगत सिंह उसको #बेबे (मां) कहकर बुलाते थे.

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भगत_सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी (वाल्मीकि) का नाम #बोघा था. भगत सिंह उसको #बेबे (मां) कहकर बुलाते थे. जब कोई पूछता कि भगत सिंह ये बोघा तेरी बेबे कैसे हुआ? तब भगत सिंह कहते, 'मेरा मल-मूत्र या तो मेरी बेबे ने उठाया, या इस भले पुरूष बोघे ने. बोघे में मैं अपनी बेबे (मां) देखता हूं.ये मेरी बेबे ही है." यह कहकर भगत सिंह बोघे को अपनी बाहों में भर लेता. भगत सिंह जी अक्सर बोघा से कहते, "बेबे ! मैं तेरे हाथों की रोटी खाना चाहता हूँ," पर बोघा अपनी जाति को याद करके झिझक जाता और कहता,... "भगत सिंह तू ऊँची जात का सरदार, और मैं एक अदना सा वाल्मीकि, भगतां तू रहने दे, ज़िद न कर." सरदार भगत सिंह भी अपनी ज़िद के पक्के थे, फांसी से कुछ दिन पहले जिद करके उन्होंने बोघे को कहा.... "बेबे! अब तो हम चंद दिन के मेहमान हैं, अब तो इच्छा पूरी कर दे!" बोघे की आँखों में आंसू बह चले. रोते-रोते उसने खुद अपने हाथों से उस वीर शहीद ए आजम के लिए रोटिया बनाई, और अपने हाथों से ही खिलाई. भगत सिह के मुंह में रोटी का ग्रस डालते ही बोघे की रुलाई फूट पड़ी. "ओए भगतां, ओए मेरे...