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घोड़े जिस स्रोत से पानी पीते हैं, उसी स्रोत से पानी पियो – घोड़ा कभी खराब पानी नहीं पीता।जहाँ बिल्ली सोती है, वहीं अपना बिस्तर बिछाओ।वही फल खाओ जिसे कीड़े ने छुआ हो।निर्भय होकर वही कुकुरमुत्ता तोड़ो जिस पर कीड़े बैठे हों।जहाँ तिलचट्टा (मोल) ज़मीन में खुदाई करता है, वहीं पेड़ लगाओ।जहाँ साँप धूप सेंकने के लिए बैठता है, वहीं अपना घर बनाओ।जहाँ पक्षी गर्मी से बचने के लिए छिपते हैं, वहीं अपनी बावड़ी खोदो।पक्षियों के साथ सोओ और उनके साथ जागो – तुम्हें दिन के सभी सुनहरे अनाज मिलेंगे।ज्यादा हरी सब्जियाँ खाओ – तुम्हारे पैर मजबूत होंगे और तुम्हारा हृदय शक्तिशाली बनेगा, जैसे जंगल के प्राणियों का होता है।अक्सर तैरो, और तुम धरती पर वैसे ही सहज महसूस करोगे जैसे पानी में मछली।अक्सर आकाश की ओर देखो, और तुम्हारे विचार हल्के व स्पष्ट होंगे।बहुत चुप रहो, कम बोलो – और मौन तुम्हारे हृदय में बस जाएगा, जिससे तुम्हारा मन शांत होगा और शांति से भर जाएगा।– संत सेराफिम सारोव (1754-1833)

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घोड़े जिस स्रोत से पानी पीते हैं, उसी स्रोत से पानी पियो – घोड़ा कभी खराब पानी नहीं पीता। जहाँ बिल्ली सोती है, वहीं अपना बिस्तर बिछाओ। वही फल खाओ जिसे कीड़े ने छुआ हो। निर्भय होकर वही कुकुरमुत्ता तोड़ो जिस पर कीड़े बैठे हों। जहाँ तिलचट्टा (मोल) ज़मीन में खुदाई करता है, वहीं पेड़ लगाओ। जहाँ साँप धूप सेंकने के लिए बैठता है, वहीं अपना घर बनाओ। जहाँ पक्षी गर्मी से बचने के लिए छिपते हैं, वहीं अपनी बावड़ी खोदो। पक्षियों के साथ सोओ और उनके साथ जागो – तुम्हें दिन के सभी सुनहरे अनाज मिलेंगे। ज्यादा हरी सब्जियाँ खाओ – तुम्हारे पैर मजबूत होंगे और तुम्हारा हृदय शक्तिशाली बनेगा, जैसे जंगल के प्राणियों का होता है। अक्सर तैरो, और तुम धरती पर वैसे ही सहज महसूस करोगे जैसे पानी में मछली। अक्सर आकाश की ओर देखो, और तुम्हारे विचार हल्के व स्पष्ट होंगे। बहुत चुप रहो, कम बोलो – और मौन तुम्हारे हृदय में बस जाएगा, जिससे तुम्हारा मन शांत होगा और शांति से भर जाएगा। – संत सेराफिम सारोव (1754-1833)