घोड़े जिस स्रोत से पानी पीते हैं, उसी स्रोत से पानी पियो – घोड़ा कभी खराब पानी नहीं पीता।जहाँ बिल्ली सोती है, वहीं अपना बिस्तर बिछाओ।वही फल खाओ जिसे कीड़े ने छुआ हो।निर्भय होकर वही कुकुरमुत्ता तोड़ो जिस पर कीड़े बैठे हों।जहाँ तिलचट्टा (मोल) ज़मीन में खुदाई करता है, वहीं पेड़ लगाओ।जहाँ साँप धूप सेंकने के लिए बैठता है, वहीं अपना घर बनाओ।जहाँ पक्षी गर्मी से बचने के लिए छिपते हैं, वहीं अपनी बावड़ी खोदो।पक्षियों के साथ सोओ और उनके साथ जागो – तुम्हें दिन के सभी सुनहरे अनाज मिलेंगे।ज्यादा हरी सब्जियाँ खाओ – तुम्हारे पैर मजबूत होंगे और तुम्हारा हृदय शक्तिशाली बनेगा, जैसे जंगल के प्राणियों का होता है।अक्सर तैरो, और तुम धरती पर वैसे ही सहज महसूस करोगे जैसे पानी में मछली।अक्सर आकाश की ओर देखो, और तुम्हारे विचार हल्के व स्पष्ट होंगे।बहुत चुप रहो, कम बोलो – और मौन तुम्हारे हृदय में बस जाएगा, जिससे तुम्हारा मन शांत होगा और शांति से भर जाएगा।– संत सेराफिम सारोव (1754-1833)

घोड़े जिस स्रोत से पानी पीते हैं, उसी स्रोत से पानी पियो – घोड़ा कभी खराब पानी नहीं पीता।
जहाँ बिल्ली सोती है, वहीं अपना बिस्तर बिछाओ।
वही फल खाओ जिसे कीड़े ने छुआ हो।
निर्भय होकर वही कुकुरमुत्ता तोड़ो जिस पर कीड़े बैठे हों।
जहाँ तिलचट्टा (मोल) ज़मीन में खुदाई करता है, वहीं पेड़ लगाओ।
जहाँ साँप धूप सेंकने के लिए बैठता है, वहीं अपना घर बनाओ।
जहाँ पक्षी गर्मी से बचने के लिए छिपते हैं, वहीं अपनी बावड़ी खोदो।

पक्षियों के साथ सोओ और उनके साथ जागो – तुम्हें दिन के सभी सुनहरे अनाज मिलेंगे।
ज्यादा हरी सब्जियाँ खाओ – तुम्हारे पैर मजबूत होंगे और तुम्हारा हृदय शक्तिशाली बनेगा, जैसे जंगल के प्राणियों का होता है।
अक्सर तैरो, और तुम धरती पर वैसे ही सहज महसूस करोगे जैसे पानी में मछली।
अक्सर आकाश की ओर देखो, और तुम्हारे विचार हल्के व स्पष्ट होंगे।
बहुत चुप रहो, कम बोलो – और मौन तुम्हारे हृदय में बस जाएगा, जिससे तुम्हारा मन शांत होगा और शांति से भर जाएगा।

– संत सेराफिम सारोव (1754-1833)

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है