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Showing posts from September, 2018
In every situation, Shri Krishna is rich in thoughts on every front. He does not go on any tie-banded leaks. According to the situation, he changed his role and even after becoming king of Dwarka, religion war became the charioteer of Arjuna in Mahabharata. So that they can guide him momentarily. श्रीकृष्ण हर स्थिति में, हर मोर्च पर विचारों के धनी रहे। वह किसी भी बंधी-बंधाई लीक पर नहीं चले। जैसी परिस्थिति थी, उसी के अनुसार उन्होंने अपनी भूमिका बदली और यहां तक की द्वारका के राजा होकर भी धर्म युद्ध महाभारत में अर्जुन के सारथी बन गये। जिससे वे उसे पल-पल गाईड कर सकें। Jai shrikrishna
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स्वामी विवेकानंद कहते हैं "कि तुम मुझे पसंद करो या मुझसे नफरत, दोनो ही मेरे पक्ष में हैं।" "क्योंकि अगर तुम मुझको पसंद करते हो तो, मैं आपके दिल में हूँ, और अगर तुम मुझ से नफरत करते हो , तो मैं आपके दिमाग में हूं !!" "पर रहूंगा आप के पास ही" 🙏Good night🙏🇮🇳
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A minute's success pays the failure of years. (एक मिनट की सफलता सालों की नाकामयाबी का भुगतान कर देती है।)
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आप वही करो जो आपके लिए सही है,, लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करे,, रही बात लोगो की '' तो '' कुछ तो लोग कहेगे क्यू की 👉लोगो का काम है कहना ☺️ Very good afternoon
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