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Showing posts from July, 2021

ज्योतिषियों से दूर रहने के उपाय --*1-स्वयं पर विश्वास करें आत्मविश्वास को बढ़ाएँ ।

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*ज्योतिषियों से दूर रहने के उपाय --* 1-स्वयं पर विश्वास करें आत्मविश्वास को बढ़ाएँ । 2- किसी भी कार्य के होने या न होने के पीछे ग्रह नहीँ है - स्वयं आप ही है. अत: कहां कमी रह गई उन पर विचार करें। 3- लक्ष्य की प्राप्ति के लिए परिश्रम करेँ. लक्ष्य प्राप्ति की दिशा मे ही आगे बढ़ते रहेँ. दिन रात उसी के सपने देखे. जो लक्ष्य तय किया है उसी अनुसार परिश्रम करेंगें तो सफलता निश्चित है। 4-कार्य को करने से पहले लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपने पास मौजूद साधनों और सहयोगीयों पर अवश्य विचार करें। 5- कर्म पर विचार करे - जो कर भी रहेँ है या नहीँ कर रहे क्या वे ठीक है?  क्योँकि वही है जो आपको पता है और आपके सामने है , उन के लिए उतरदायी भी आप ही है। *6- तर्कवादी बने. क्या ,क्योँ और कैसे इन शब्दो का प्रयोग करना सीखे. किसी भी बात को ऐसे ही सच न माने. स्वयं विचार कर के अच्छी तरह से तथ्य को परख कर ही विश्वास करे. फिर कोई भी आपको मूर्ख नहीँ बना पाएगा।* 7- किसी टोटके आदि मे विश्वास करना त्याग दें. नहीँ त्याग सकते है तो एक बार इस बात पर विचार करे कि जिस काम को मनुष्य होकर भी आप कर नहीँ पाए उसे मसूर दाल, बताशे, ...

क्या? #मृत्यूभोज़ एवं #श्राद्ध करना जरूरी है?सोचिएगा जरूर....🤔🤔

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क्या? #मृत्यूभोज़ एवं #श्राद्ध करना जरूरी है? सोचिएगा जरूर....🤔🤔 एक बार गुरु #रामानंद ने #कबीर से कहा, कि हे कबीर, आज #श्राद्ध का दिन है और #पितरो के लिये #खीर बनानी है, आप जाइये,  पितरो की खीर के लिये दूध ले आइये, कबीर उस समय 9 वर्ष के ही थे, कबीर दूध का बरतन लेकर चल पडे...चलते चलते आगे उन्होंने देखा कि एक #गाय मरी हुई पडी हुई है, कबीर ने आस पास से घास को उखाड कर,  गाय के पास डाल दिया और वही पर बैठ गये...! दूध का बरतन भी पास ही रख लिया, जब काफी देर हो गयी,  कबीर लौटे नहीं,  तो गुरु रामानंद ने सोचा, पितरो को छिकाने का टाइम हो गया है, कबीर अभी तक नही आया....तो रामानंद जी खुद ही दूद लेने के लिए चल पड़े, रामानंद जी चले जा रहे थे उन्होंने आगे देखा कि कबीर एक मरी हुई गाय के पास बर्तन रखकर बैठा हुआ है, गुरु रामानंद बोले,  अरे कबीर...तू दूध लेकर नही गया? कबीर बोले: स्वामी जी,  ये गाय पहले घास खायेगी तभी तो दूध देगी...! रामानंद बोले: अरे ये गाय तो मरी हुई है,  ये घास कैसे खायेगी? कबीर बोले: स्वामी जी,  ये गाय तो आज मरी है...जब आज मरी गाय घास नही खा सकती...

जब भी कोई दावा करे कि वह अपने मेरिट से और अपने संघर्ष से बड़ा बना/बनी है तो उस व्यक्ति का सोशल कैपिटल यानी नेटवर्क, कनेक्शन, संपर्क, पैरवी करा पाने की क्षमता, जान पहचान का दायरा ज़रूर चेक करना चाहिए।

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जब भी कोई दावा करे कि वह अपने मेरिट से और अपने संघर्ष से बड़ा बना/बनी है तो उस व्यक्ति का सोशल कैपिटल यानी नेटवर्क, कनेक्शन, संपर्क, पैरवी करा पाने की क्षमता, जान पहचान का दायरा ज़रूर चेक करना चाहिए।  संघर्ष के क़िस्सों के पीछे पहला मौक़ा या अमिताभ बच्चन जैसे केस में असफल होने के 17 मौक़े कैसे मिले, ये समझने की ज़रूरत है। शाहरुख खान को मुंबई में पहला मौक़ा क्यों और कैसे मिला। उसे पहला फ़्लैट रहने को किसने दिलाया? वे मेहनती हैं। लेकिन मेहनत करने का मौक़ा उन्हें कैसे मिला? किसने दिलाया?  इन तस्वीरों में अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ खान की माताएँ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से गपशप कर रही हैं। समझिए नेटवर्क की ताक़त। Kranti Kumar सोशल कैपिटल के बारे में ज़्यादा जानने के लिए अपने आसपास के सफल लोगों का बैकग्राउंड चेक करें या पियरे बॉरद्यू (Bourdieu) की थीसिस - The Forms of Capitals पढ़ें। जिन परिवारों के लोग तीन या चार पीढ़ी से अमेरिका जा रहे हैं, वे कनेक्शन के दम पर वहाँ जाते हैं और कहते हैं कि मैं अपने टैलेंट के कारण यहाँ पहुँचा हूँ। करोड़ों स्टूडेंट्स को यही नहीं पता कि GRE और...

My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

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My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred) 1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I can be dumb or even illiterate.... (Cont.) (Inspired by Peggy Mcintosh) 2. If I am a Brahmin, there will not be any difficulty in getting public accommodation. I need not fear that people of my caste cannot get in or will be mistreated in the places they choose. 3. Almost all public places will be open for me.... 4. I will find restaurants serving food according to my cultural choices. Asking food of my choice will not be considered a bad thing. Rather, that will enhance my stature. 5. If my neighbour or co-traveller knows my caste identity, he/she will not hate me or look down upon me.6. I can upload my profile on Brahmin matrimonial sites and not face prejudice. 7. There is every possibility that the interview board I will be facing in a university department will have representatives of my ca...

ओबीसी कांवड़ ढोता है, यह बहुत सस्ता नैरेटिव है। - अज्ञानता और पोंगापंथ सिर्फ ओबीसी में है, यह बयान भी तथ्यों से साबित नहीं हो सकता।

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- ओबीसी कांवड़ ढोता है, यह बहुत सस्ता नैरेटिव है।  - अज्ञानता और पोंगापंथ सिर्फ ओबीसी में है, यह बयान भी तथ्यों से साबित नहीं हो सकता।  - कांवड़ सिर्फ ओबीसी ढोता है, यह भी फैक्ट नहीं है।  - सारे ओबीसी कांवड़ ढोते हैं, यह भी ग़लत वक्तव्य है।  ओबीसी के बारे में यह एक जनरल स्टेटमेंट हैं कि वह अधिकारों के प्रति सजग नहीं है। सोता रहता है वग़ैरह।  ऐसा कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं। पुराने इतिहास को छोड़ भी दें तो महात्मा फुले से लेकर, शाहूजी महाराज और पेरियार से लेकर कर्पूरी ठाकुर की परंपरा आपके सामने है। भिड़ने वाले अभी भी भिड़े हुए हैं। समझौतापरस्त कहाँ नहीं हैं।  जातिवाद के ख़िलाफ़ कुछ सबसे साहसिक लड़ाई ओबीसी ने लड़ी है और लड़कर हक़ हासिल किया है।  केरल में नाडार औरतों का अपने वक्ष ढकने का आंदोलन कितना साहसिक था, यह दुनिया जानती है।  अनुसूचित जाति के हित में एक ओबीसी सीएम कर्पूरी ठाकुर की सरकार का ये फ़ैसला देखिए। (वर्ष 1979) उस समय तक अनुसूचित जाति के लिए मीडिया “हरिजन” शब्द का प्रयोग करता था।  बिहार के अख़बारों की संभवतः सबसे बड़ी आर्काइव मेरे...

कांग्रेस सरकार ने साल 2010 में NEET की अवधारणा रखी.NEET को क्यों लाया गया ?

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कांग्रेस सरकार ने साल 2010 में NEET की अवधारणा रखी. NEET को क्यों लाया गया ? स्टेट बोर्ड के अंतर्गत स्थानीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों को डॉक्टर इंजीनियर बनने से रोकने के लिए NEET सिस्टम को लाया गया. राज्यों की भाषा में पढ़ाई सरकारी स्कूलों में होती है जहां OBC SC ST वर्ग के गरीब घरों के छात्र पढ़ते हैं.  NEET किस तरह स्थानीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहा है ? NEET का पाठ्यक्रम NCERT के पाठ्यक्रम पर आधारित है. NEET का पेपर 720 अंक का होता है. राज्यों के स्टेट बोर्ड का पाठ्यक्रम NEET से बिल्कुल अलग होता है. प्रमाण 1 - 2018 के NEET परीक्षा में 600 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले 3000 छात्र अंग्रेजी मीडियम से थे. केवल एक छात्र राज्य भाषा से था. प्रमाण 2 - 500 से ज्यादा अंक पाने वाले 23,000 छात्र अंग्रेजी मिडियम से पढ़े थे. और सिर्फ 84 छात्र राज्य भाषा से पढ़ने वाले थे. इन आंकड़ों से येही लगता है अंग्रेजी माध्यम के छात्र बेहतर हैं और ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र कमतर हैं ? नही, ऐसा नही है. NEET का सिस्टम ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों को ...

जब बाबा साहेब #हिन्दू_कोड_बिल तैयार रहे थे तब बनारस के सबसे बड़े धर्मगुरु करपात्री महाराज ने बाबा साहेब को बहस करने की चुनौती दे डाली।

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जब बाबा साहेब #हिन्दू_कोड_बिल तैयार रहे थे तब बनारस के सबसे बड़े धर्मगुरु करपात्री महाराज ने बाबा साहेब को बहस करने की चुनौती दे डाली।  उस महाराज ने कहा डॉ अम्बेडकर एक अछूत है, वे क्या जानते हैं हमारे धर्म के बारे मे,  हमारे ग्रन्थ और शास्त्रों के बारे में,  उन्हें कहाँ संस्कृत और संस्कृति का ज्ञान है?  यदि उन्होंने हमारी संस्कृति से खिलवाड़ किया तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।  करपात्री महाराज ने बाबा साहेब को इस पर बहस करने हेतु पत्र लिखा और निमंत्रण भी भेज दिया। बाबा साहेब बहुत शांत और शालीन स्वभाव के व्यक्ति थे, उन्होंने आदर सहित करपात्री महाराज को पत्र लिखकर उनका निमंत्रण स्वीकार किया और कहा कि #हिंदी_इंग्लिश_संस्कृत_मराठी_या_अन्य किसी भी भाषा मे, मैं आपसे शास्त्रार्थ करने को तैयार हूं।  आपके मन मे यदि कोई प्रश्न है तो आप अपने समयानुसार आकर अपनी जिज्ञासा पूरी कर सकते हैं। यह पढ़ते ही करपात्री महाराज आग बबूला हो गए, और वापस बाबा साहेब को पत्र लिखा कि डॉ अम्बेडकर आप शायद भूल रहे हैं  कि आप एक साधू, सन्यासी को अपने स्थान पर बुला रहे हैं आपको यहां आक...

दलित कौन -ओबीसी कहता है कि वह दलित नहीं है, दलित मतलब एस सी!अब सच्चाई का पड़ताल कर लेते हैं ।

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दलित कौन - ओबीसी कहता है कि वह दलित नहीं है, दलित मतलब एस सी! अब सच्चाई का पड़ताल कर लेते हैं । १) यूपी में दो बहनों का पेड़ पर फांसी दे दिया गया था। वह जाति की कोइरी /कुशवाहा थी। वह ओबीसी में आता है, लेकिन हर न्यूज चैनल और अखबार उन्हें दलित लिखता रहा। २) फूलन देवी मल्लाह जाति की थी, वह भी ओबीसी की कटेगरी में आती हैं, लेकिन उन्हें भी न्यूज वाले /पत्रकार दलित ही कहता है। यह बड़े पैमाने पर किया जाता है। फूलन देवी पर जो पिक्चर आयी थी, उसमें में दलित कहा गया है। ३) कुख्यात भंवरी कांड में भंवरी देवी कुम्हार जाति की थी जो ओबीसी कटेगरी में आता है। भंवरी देवी को भी आज तक दलित ही कहा जाता है। इतना ही नहीं प्रख्यात क्मयुनिष्ट लेखक राजेंद्र यादव भी दलित कहते थे। ४) प्रख्यात लेखक कांचा इल्लैया जाति के गरेडी हैं, वह भी ओबीसी में आते हैं, उन्हें भी दलित लेखक लिखा जाता है। ५) दिलीप मंडल (फेसबुक सेलिब्रिटी ,पूर्व कार्यकारी संपादक, इंडिया टुडे) कलवार जाति के हैं, वह भी ओबीसी जाति के हैं उन्हें भी दलित चिंतक कहा जाता है। ६) दूरदर्शन के भूतपूर्व पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल को भी कभी कभी दलित चिंतक और विश्लेष...

*🙏पोस्ट बेशक थोड़ी सी बड़ी हो गई है, लेकिन डीएनए जांच को समझने के लिए ये पोस्ट पढ़ने के लिए थोड़ा सा वक्त जरूर निकालें 🙏*

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*🙏पोस्ट बेशक थोड़ी सी बड़ी हो गई है, लेकिन डीएनए जांच को समझने के लिए ये पोस्ट पढ़ने के लिए थोड़ा सा वक्त जरूर निकालें 🙏* *👉 ब्राह्मण किसी भी ब्राह्मण विरोधी  मुद्दे पर तब तक खामोश रहते हैं, जब तक वो मुद्दा उन के अस्तित्व के लिए खतरा न बन जाए"  !* *बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय वामन मेश्राम साहब जी ने एक ऐसे मुद्दे को देश के कोने कोने तक पहुंचा दिया, जिसे ब्राह्मण छुपाए रखना चाहते थे । देश में कोई भी संगठन का कोई भी नेता चाहे वो खुद को कितना भी बड़ा तीस मार खां समझता हो, लेकिन एक भी ऐसा नेता नहीं है, जिस ने देश के सब से बड़े ब्राह्मणवादी संगठन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को इस तरह से नागपुर में जा कर उसे चुनौती दी हो और सार्वजनिक तौर पर ब्राह्मणों को विदेशी कहा हो । ब्राह्मण के विदेशी होने की चर्चा से मोहन भागवत को लगने लगा है कि अब और ज्यादा दिनों तक डीएनए जांच रिपोर्ट पर खामोश रहना उन के लिए मुसीबत बनता जा रहा है, इस लिए उसे सार्वजनिक तौर पर आ कर बोलना ही पड़ा और एक षड्यंत्र के तहत ख़ुदके विदेशीपन को छुपाने के लिए बयान दिया कि सभी भारतीयों (हिंदुओं और मुसलमा...

एक बार एक बादशाह सर्दियों की शाम अपने महल में दाखिल हो रहा था तभी उसने एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के मुख्य दरवाज़े पर बिलकुल पुरानी और फटी वर्दी में पहरा दे रहा था...।

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एक बार एक बादशाह सर्दियों की शाम अपने महल में दाखिल हो रहा था तभी उसने एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के मुख्य दरवाज़े पर बिलकुल पुरानी और फटी वर्दी में पहरा दे रहा था...।  बादशाह ने उस बूढ़े दरबान के करीब अपनी सवारी को रुकवाया और उससे पूछा... "सर्दी नही लग रही तुम्हें...इन फटे हुए कपड़ों में कैसे रात गुजारते हो ?" दरबान ने जवाब दिया..... "बहुत लग रही है हुज़ूर ! मगर क्या करूँ, गर्म कपड़े हैं नही मेरे पास, इसलिए मज़बूरी में बर्दाश्त करना पड़ता है, कोई चारा भी नहीं है.... औऱ ड्यूटी तो करनी ही है ,नहीं तो गुजारा कैसे होगा....." ?? बादशाह का दिल पसीज गया औऱ वह सोचने लगा कि इस बूढ़े के लिए क्या किया जाए ?? कुछ सोचकर बादशाह ने कहा " तुम चिंता मत करो..मैं अभी महल के अंदर जाकर तुरंत अपना ही कोई गर्म कपड़ा तुम्हारे लिए भेजता हूँ...तुम बस थोड़ी देर औऱ इंतज़ार करो...।" दरबान ने बहुत खुश होकर बादशाह को दिल से सलाम किया साथ ही उसके प्रति अपनी कृतज्ञता औऱ वफ़ादारी का भी इज़हार किया।  लेकिन...... बादशाह जैसे ही महल में दाखिल हुआ ,वह अपनी रानी औऱ बच्चों के साथ बातचीत में उलझ गया औऱ कुछ...

चरणामृत छोड़कर अंधभक्त गौमूत्र क्यों पीने लगे? *चरणामृत*- हिंदू धर्म विधान में ब्राह्मण, पुरोहित या अपने से पूज्यनीय के चरण धोए हुए पानी को चरणामृत कहा जाता है। जिसे पादोदक भी कहा जाता है। निम्न दोहे पर जरा गौर करें।

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चरणामृत छोड़कर अंधभक्त गौमूत्र क्यों पीने लगे?   *चरणामृत*-  हिंदू धर्म विधान में ब्राह्मण, पुरोहित या अपने से पूज्यनीय के चरण धोए हुए पानी को चरणामृत कहा जाता है। जिसे पादोदक भी कहा जाता है। निम्न दोहे पर जरा गौर करें। *अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम्*। *विप्रो पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न लिहयते*।।   पादोदक पीने से अकाल मृत्यु नहीं होती, सभी रोगों का विनाश हो जाता है और पुनर्जन्म भी नहीं होता है।     *चरणामृत की एक बेवकूफी भरी कहानी भी मिलती है*।     *वामन अवतार में विश्णू जब राजा बलि की यज्ञशाला में दान लेने गए। तब दान में उन्होंने तीन पग में तीन लोक नाप लिए। एक पग में आकाश, दूसरे में पाताल, ज्यों ही ब्रह्मलोक में उनका चरण गया तो ब्रह्मा जी ने कमंडल में से जल लेकर उनके पैर धोए और उस चरणामृत को फिर से कमंडल में ज्योहीं रखा, वह चरणामृत गंगा जल बन गया। वही गंगा नदी आज सारी दुनियां के पापों को धो रही है।*     *अभी कुछ महीने पहले चरणामृत का चमचागिरी का राजनैतिक महत्व भी दिखाई दिया।*     *झारखंड के गोडा कवाली गांव में पुल के शिलान्...

साथियों 1980 का दशक मान्यवर कांशीराम साहब जी कि कर्म भूमी रहा है। ये वही समय था जब साहब ने जी जान लगा कर बहुजन समाज को एक करने के लिए कोई कसर नहीं छोङी थी। और बहुजन समाज एक भी हो रहा था।

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साथियों 1980 का दशक मान्यवर कांशीराम साहब जी कि कर्म भूमी रहा है। ये वही समय था जब साहब ने जी जान लगा कर बहुजन समाज को एक करने के लिए कोई कसर नहीं छोङी थी। और बहुजन समाज एक भी हो रहा था। जहां यादवों में मुलायम जी साथ आ गए थे वही जाटो में देवी लाल जी भी साथ आ रहे थे। उस समय के कुछ नारे भी बहु चर्चित हुए थे पर मैं उनकी बात यहाँ नहीं करूंगा। पूरे उत्तर भारत में बहुजन आंदोलन एक बङा रूप ले चुका था। पर एक बात जो मुझे बचपन से परेशान करती रही है वो ये है कि ठीक एक ऐसे समय में जब बहुजन आंदोलन परवान चढने ही वाला था। लोग भ्रमजाल से निकलने लगे थे थोङा बहुत अपने पूर्वजों को महापुरुषों को पहचानने लगे थे कि अचानक एक एक काउंटर रिएक्टसन हुआ जनवरी 1987 में रामायण रिलिज हो गई। जब आप बहुजन इतिहास को जानने की कोशिश करोगे तो आप पाओगे ये संघर्ष हर पल पेचिदा हुआ है। हर एक्सन - रिएक्शन - और काउंटर रिएक्टसन के बाद जिस चैन से बहुजन समाज सोया है वो सिर्फ बहुजन को जगाने वाले समझते हैं। जब बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जी ने संविधान लिखा और आरक्षण दिया तो बहुजन समाज चैन की नींद सो गया। पूरा राज पाठ छोङकर सो गया। आजादी क...

भगवान को बनाने वाले चालक हैं और उसको मानने वाले महा मूर्ख है 1977 की बात है :-

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, *भगवान को बनाने वाले चालक हैं और उसको मानने वाले महा मूर्ख है 1977 की बात है :-  *मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका आई जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु में पेरियार की मूर्तियों के नीचे जो बातें लिखी हुई हैं, वे आपत्तिजनक हैं और लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं इसलिए उन्हें हटाया जाना चाहिए। याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ईरोड वेंकट रामास्वामी पेरियार जो कहते थे, उस पर विश्वास रखते थे इसलिए उन के शब्दों को उन की मूर्तियों के पैडेस्टर पर लिखवाना गलत नहीं है*   *पेरियार की मूर्तियों के नीचे लिखा था-   *‘ईश्वर नहीं है और ईश्वर बिलकुल नहीं है।* *जिस ने ईश्वर को रचा वह बेवकूफ है, जो ईश्वर का प्रचार करता है वह दुष्ट है और जो ईश्वर की पूजा करता है वह बर्बर है। ❓❓❓❓❓❓❓❓ *ग्रेट पेरियार नायकर के ईश्वर से सवाल :- *👉1. क्या तुम कायर हो जो हमेशा छिपे रहते हो, कभी किसी के सामने नहीं आते?*  *👉2. क्या तुम खुशामद परस्त हो जो लोगों से दिन रात पूजा, अर्चना करवाते हो?*  *👉3.क्या तुम हमेशा भूखे रहते हो जो लोगों से मिठाई, दूध, घी आदि लेते रहते हो?* *👉4. क्...