ओबीसी कांवड़ ढोता है, यह बहुत सस्ता नैरेटिव है। - अज्ञानता और पोंगापंथ सिर्फ ओबीसी में है, यह बयान भी तथ्यों से साबित नहीं हो सकता।
- ओबीसी कांवड़ ढोता है, यह बहुत सस्ता नैरेटिव है।
- अज्ञानता और पोंगापंथ सिर्फ ओबीसी में है, यह बयान भी तथ्यों से साबित नहीं हो सकता।
- कांवड़ सिर्फ ओबीसी ढोता है, यह भी फैक्ट नहीं है।
- सारे ओबीसी कांवड़ ढोते हैं, यह भी ग़लत वक्तव्य है।
ओबीसी के बारे में यह एक जनरल स्टेटमेंट हैं कि वह अधिकारों के प्रति सजग नहीं है। सोता रहता है वग़ैरह।
ऐसा कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं। पुराने इतिहास को छोड़ भी दें तो महात्मा फुले से लेकर, शाहूजी महाराज और पेरियार से लेकर कर्पूरी ठाकुर की परंपरा आपके सामने है। भिड़ने वाले अभी भी भिड़े हुए हैं। समझौतापरस्त कहाँ नहीं हैं।
जातिवाद के ख़िलाफ़ कुछ सबसे साहसिक लड़ाई ओबीसी ने लड़ी है और लड़कर हक़ हासिल किया है।
केरल में नाडार औरतों का अपने वक्ष ढकने का आंदोलन कितना साहसिक था, यह दुनिया जानती है।
अनुसूचित जाति के हित में एक ओबीसी सीएम कर्पूरी ठाकुर की सरकार का ये फ़ैसला देखिए। (वर्ष 1979)
उस समय तक अनुसूचित जाति के लिए मीडिया “हरिजन” शब्द का प्रयोग करता था।
बिहार के अख़बारों की संभवतः सबसे बड़ी आर्काइव मेरे पास है। ऐसी हज़ारों खबरों का संकलन मेरे पास है। मुझे नहीं लगता कि ओबीसी सोता रहता है।
NEET कांग्रेस का पाप है। ऑल इंडिया कोटा में ओबीसी को आरक्षण न देने का फ़ैसला कांग्रेस के समय में आया। भारत में पीछे से जो भी बीमारी चली आ रही है, उसकी जड़ में कांग्रेस ही मिलेगी।
आज़ादी के बाद के पहले 30 साल पूरी तरह उसके थे। किसी और के लिए न सही करने का मौक़ा था, न ग़लत करने का। उसके बाद भी लंबे समय तक वहीं सत्ता में रही।
लेकिन ये लोकतंत्र है। किसी भी लोकतंत्र में आप विपक्ष के ख़िलाफ़ आंदोलन नहीं कर सकते। इसका कोई तरीक़ा ही नहीं है। आंदोलन तो सरकार के ही ख़िलाफ़ होगा।
NEET की जो व्यवस्था है, उसे अब कांग्रेस नहीं, बीजेपी ही ठीक कर सकती है।
अच्छी बात है कि कांग्रेस ने अपनी पुरानी पोजिशन बदल ली है। अब वह ओबीसी आरक्षण का समर्थन कर रही है। कम से कम ऐसा बोल रही है।
कांग्रेस ने अपनी पोजिशन न बदली होती तो भी आंदोलन बीजेपी के ख़िलाफ़ ही हो सकता है। कांग्रेस के ख़िलाफ़ आप केंद्र में आंदोलन कर ही नहीं सकते। कोई तरीक़ा नहीं है।
RSS कितना धूर्त है यह इस बात से समझिए कि NEET में ओबीसी कोटा लागू नहीं होगा ये आदेश एक ओबीसी मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जारी करवाया। जबकि ये फ़ैसला रमेश पोखरियाल निशंक से भी जारी करवा सकते थे। भाई से भाई की पीठ में छुरा घोंपवा दिया।
कांग्रेस सरकार ने साल 2010 में NEET की अवधारणा रखी.
NEET को क्यों लाया गया ?
स्टेट बोर्ड के अंतर्गत स्थानीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों को डॉक्टर इंजीनियर बनने से रोकने के लिए NEET सिस्टम को लाया गया. राज्यों की भाषा में पढ़ाई सरकारी स्कूलों में होती है जहां OBC SC ST वर्ग के गरीब घरों के छात्र पढ़ते हैं.
NEET किस तरह स्थानीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहा है ?
NEET का पाठ्यक्रम NCERT के पाठ्यक्रम पर आधारित है. NEET का पेपर 720 अंक का होता है. राज्यों के स्टेट बोर्ड का पाठ्यक्रम NEET से बिल्कुल अलग होता है.
प्रमाण 1 - 2018 के NEET परीक्षा में 600 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले 3000 छात्र अंग्रेजी मीडियम से थे. केवल एक छात्र राज्य भाषा से था.
प्रमाण 2 - 500 से ज्यादा अंक पाने वाले 23,000 छात्र अंग्रेजी मिडियम से पढ़े थे. और सिर्फ 84 छात्र राज्य भाषा से पढ़ने वाले थे.
इन आंकड़ों से येही लगता है अंग्रेजी माध्यम के छात्र बेहतर हैं और ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र कमतर हैं ? नही, ऐसा नही है. NEET का सिस्टम ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है.
तमिल नाडु स्टेट बोर्ड के बारहवीं की परीक्षा में 98% अंक हासिल करने वाली स्कॉलर अनिता NEET में काफी कम अंक हासिल किया और डॉक्टर बनने से महरूम हो गयी.
अनुसूचित जाति की अनिता सुप्रीम कोर्ट से NEET से भिड़ गयी. अनिता की याचिका में दलील.
1 - राज्यों का पाठ्यक्रम और NEET के पाठ्यक्रम में ज़मीन आसमान का अंतर.
2 - बिना कोचिंग के NEET पास करना कठिन है. अच्छे कोचिंग संस्थान शहरों में हैं जहां लाखों रुपए फीस वसूली जाती है. ग्रामीण इलाकों के छात्रों कोचिंग क्लास नही कर पाते.
3 - NEET में अंग्रेजी माध्यम का पेपर सरल और आसान आता है, जबकि राज्यों की भाषा में पेपर काफी कठिन होते हैं.
4 - NEET का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम बिल्कुल अनजान सा लगता है. राज्य के बोर्ड में 98% अंक लाने वाले ग्रामीण छात्र हताश महसूस करते हैं.
अनिता और अन्य आठ छात्रों की याचिका के खिलाफ BJP सरकार ने NEET के पक्ष में बहस करने लिए पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम को खड़ा किया. NEET सुप्रीम कोर्ट में केस जीत गया और अनिता डॉक्टर बनने का सपना हार गयी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के नौ दिन बाद 1 सितंबर 2017 को अनिता ने आत्महत्या कर NEET और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ विद्रोह कर दिया.
NEET का पूरा सिस्टम द्रोणाचार्य ने ऐसा बनाया है सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले OBC SC ST छात्र अंग्रेजी माध्यम के छात्रों से कॉम्पिटिशन नही कर पाए.
NEET को पूरी तरह खत्म करने की मांग होनी चाहिए.


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