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लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की सीबीआई को मिली मंजूरी*********

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*लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की सीबीआई को मिली मंजूरी* ******************************* लखनऊ। नौकरी के बदले जमीन घोटाले (लैंड फॉर जॉब) में गृह मंत्रालय ने CBI को लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी है। इसी के साथ लालू यादव की मुसीबतें फिर से बढ़ गई. सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की इजाजत मांगी थी।  इससे पहले दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और अन्य आरोपियों को समन जारी किया था। जिसमें उन्हें 7 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है। ईडी की चार्जशीट पर कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। समन जारी कर लालू यादव, तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को बतौर आरोपी अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। लैंड फॉर जॉब मामले मे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप मे लालू और तेजस्वी, तेजप्रताप यादव के खिलाफ ईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। लैंड फॉर जंब मामले में पहली बार तेजप्रताप यादव को पहली बार समन भेजा जा चुका है।  कोर्ट ने माना कि मा...

RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार कहा था चारा घोटाले में ब्रा/ह्मण ज....joजों की मंशा अभियुक्तों को सज़ा देने से ज्यादा रुचि केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य को Demolished करने की थी.शिवानंद तिवारी की बात सही है. इन्होंने केस को करीब से देखा है किस तरह न्यायपालिका के द्वारा लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की कोशिश हुई.लालू प्रसाद यादव उसी दिन मनुवाद की आंखों में किरकिरी बन गए जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में पहली बार लालू प्रसाद यादव पर केस दर्ज हुआ. लालू प्रसाद यादव पर कठोर शिकंजा उन्ही की पार्टी के प्रधानमंत्री एच डी देवी गौड़ा ने शासन में कसा गया.लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और उन्ही की पार्टी के नेताओं लालू प्रसाद यादव को मिटाने की कोशिश की.लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पूरा ECO सिस्टम क्यों हो गया ?इसके दो कारण है, मनुवादी शक्तियों ने लालू प्रसाद यादव को खतरे के रूप में देखा. 1990 के बाद बिहार में कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय मुख्यमंत्री नही बन पाया.दूसरा करण जनता पार्टी के भीतर OBC नेताओं ने निजी महत्वकांक्षा के चलते लालू प्रसाद यादव को किनारे लगाना चाहा.गाली खाई, जेल गए, अपमान सहन किया और भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा अपमान लालू प्रसाद यादव के परिवार का किया जाता है.इसके बावजूद लालू प्रसाद यादव को कोई माई का लाल मिटा नही पाया.

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RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार कहा था चारा घोटाले में ब्राह्.ण ज.jo.. की मंशा अभियुक्तों को सज़ा देने से ज्यादा रुचि केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य को Demolished करने की थी. शिवानंद तिवारी की बात सही है. इन्होंने केस को करीब से देखा है किस तरह न्यायपालिका के द्वारा लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की कोशिश हुई. लालू प्रसाद यादव उसी दिन मनुवाद की आंखों में किरकिरी बन गए जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.  1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में पहली बार लालू प्रसाद यादव पर केस दर्ज हुआ. लालू प्रसाद यादव पर कठोर शिकंजा उन्ही की पार्टी के प्रधानमंत्री एच डी देवी गौड़ा ने शासन में कसा गया. लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और उन्ही की पार्टी के नेताओं लालू प्रसाद यादव को मिटाने की कोशिश की. लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पूरा ECO सिस्टम क्यों हो गया ? इसके दो कारण है, मनुवादी शक्तियों ने लालू प्रसाद यादव को खतरे के रूप में देखा. 1990 के बाद बिहार में कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय मुख्यमंत्री नही बन पाया. दूसरा करण जनत...