RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार कहा था चारा घोटाले में ब्रा/ह्मण ज....joजों की मंशा अभियुक्तों को सज़ा देने से ज्यादा रुचि केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य को Demolished करने की थी.शिवानंद तिवारी की बात सही है. इन्होंने केस को करीब से देखा है किस तरह न्यायपालिका के द्वारा लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की कोशिश हुई.लालू प्रसाद यादव उसी दिन मनुवाद की आंखों में किरकिरी बन गए जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में पहली बार लालू प्रसाद यादव पर केस दर्ज हुआ. लालू प्रसाद यादव पर कठोर शिकंजा उन्ही की पार्टी के प्रधानमंत्री एच डी देवी गौड़ा ने शासन में कसा गया.लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और उन्ही की पार्टी के नेताओं लालू प्रसाद यादव को मिटाने की कोशिश की.लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पूरा ECO सिस्टम क्यों हो गया ?इसके दो कारण है, मनुवादी शक्तियों ने लालू प्रसाद यादव को खतरे के रूप में देखा. 1990 के बाद बिहार में कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय मुख्यमंत्री नही बन पाया.दूसरा करण जनता पार्टी के भीतर OBC नेताओं ने निजी महत्वकांक्षा के चलते लालू प्रसाद यादव को किनारे लगाना चाहा.गाली खाई, जेल गए, अपमान सहन किया और भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा अपमान लालू प्रसाद यादव के परिवार का किया जाता है.इसके बावजूद लालू प्रसाद यादव को कोई माई का लाल मिटा नही पाया.

RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार कहा था चारा घोटाले में ब्राह्.ण ज.jo.. की मंशा अभियुक्तों को सज़ा देने से ज्यादा रुचि केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य को Demolished करने की थी.

शिवानंद तिवारी की बात सही है. इन्होंने केस को करीब से देखा है किस तरह न्यायपालिका के द्वारा लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की कोशिश हुई.

लालू प्रसाद यादव उसी दिन मनुवाद की आंखों में किरकिरी बन गए जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 

1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में पहली बार लालू प्रसाद यादव पर केस दर्ज हुआ. लालू प्रसाद यादव पर कठोर शिकंजा उन्ही की पार्टी के प्रधानमंत्री एच डी देवी गौड़ा ने शासन में कसा गया.

लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और उन्ही की पार्टी के नेताओं लालू प्रसाद यादव को मिटाने की कोशिश की.

लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पूरा ECO सिस्टम क्यों हो गया ?

इसके दो कारण है, मनुवादी शक्तियों ने लालू प्रसाद यादव को खतरे के रूप में देखा. 1990 के बाद बिहार में कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय मुख्यमंत्री नही बन पाया.

दूसरा करण जनता पार्टी के भीतर OBC नेताओं ने निजी महत्वकांक्षा के चलते लालू प्रसाद यादव को किनारे लगाना चाहा.

गाली खाई, जेल गए, अपमान सहन किया और भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा अपमान लालू प्रसाद यादव के परिवार का किया जाता है.

इसके बावजूद लालू प्रसाद यादव को कोई माई का लाल मिटा नही पाया.

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My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)