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Showing posts from October, 2022

मुलायम सिंह यादव-

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मुलायम सिंह यादव-  1. जन्म- 22 नवंबर 1939 2. स्थान- सैफई, इटावा 3. शिक्षा- राजनीति शास्त्र से MA 4. 1967 में पहली बार विधायक बने, कुल 8 बार यूपी विधानसभा के सदस्य रहे. 5. 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 में विधायक बने 6. 1977 में सहकारी और पशुपालन मंत्री बने 7. 1980 में जनता दल यूपी के अध्यक्ष बने 8. 1982-85 MLC, नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद 9. 1985-87 नेता प्रतिपक्ष विधानसभा  10. 1989-91 पहली बार दो साल के लिए मुख्यमंत्री बने 11. 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की  12. 1993-95 दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री बने 13. 1996 में पहली बार लोकसभा के सदस्य बने 14. 1996-98 रक्षा मंत्री बने 15. 7 बार लोकसभा के सांसद 16. फ़िलहाल मैनपुरी से लोकसभा सांसद हैं मुलायम सिंह यादव 17. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव 18. 1993 में मुलायम सिंह यादव ने कांशीराम से हाथ मिलाया, पहली बार सपा और बसपा का गठबंधन हुआ, सपा-बसपा की सरकार बनी 19. तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं  20. मूल रूप से एक शिक्षक थे, डॉ लोहिया और चौधरी चरण सिंह के विचारों से प्रभावित हो राजनीति में आए ...

मुलायम बनना आसान नहीं-

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मुलायम बनना आसान नहीं- जब तख्त पर खड़े हो नेताजी ने मेरे गांव डुमरी में किया था भाषण....... #########################        घटना उस वक्त की है जब नेताजी माननीय मुलायम सिंह यादव जी 1987 में क्रांति रथ ले पूरे प्रदेश को मापने हेतु निकल पड़े थे।वे कई चरणों मे विभक्त अपने रथयात्रा में जब पूर्वांचल दौरे पर आए तो कुशीनगर से देवरिया को चले थे।मैं इंटरमिडीएट का छात्र था लेकिन पिताजी सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे लिहाजा राजनीति में रुचि खूब थी।        नेताजी का क्रान्ति रथ जब कुशीनगर से होते हुये मेरे गांव के चौराहे पर पंहुचा तो अब स्मृतिशेष हो चुके दीनदयाल यादव जी के साथ मैं एक तख्त का इंतजाम कर सामान्य सा चद्दर बिछा एक बैटरी से संचालित माइक लगा  नेताजी से रथ से उतर सम्बोधित करने का आग्रह कर बैठा।नेताजी रथ से उतर कुछ मिनट तख्त पर खड़े हो कांग्रेस सरकार उखाड़ फेंकने का आग्रह कर आगे बढ़ गए थे।         मुलायम सिंह यादव जी आज विशाल बरगद के रूप में जो दिख रहे हैं वह कोई एक दिन में किसी मीडिया या न्यूज चैनल की बदौलत नही...

खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है.....लेकिन प्रश्न यह कि क्यों ?क्यों खाली हाथ आए थे और क्यों खाली हाथ जाना है ?

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खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है..... लेकिन प्रश्न यह कि क्यों ? क्यों खाली हाथ आए थे और क्यों खाली हाथ जाना है ? और जब खाली हाथ ही जाना है, तो फिर कमाना किसके लिए है ? बीवी बच्चों के लिए ? बीवी बच्चे क्या करेंगे उस कमाए हुए पैसों का ? क्योंकि वे भी कमाएंगे ही और उनके बच्चे भी कमाएंगे और उनके बच्चे भी.....लेकिन होगा क्या ? उन सभी को अपनी कमाई छोडकर ही जाना है। तो फिर सारी कमाई जाएगी कहाँ पर ? बैंकों में जाएगी।  और बैंक किसका है ? रथशील्ड का। क्योंकि बैंकिंग सिस्टम का जनक रथशील्ड है और दुनिया के सभी देशों ने सरकारी बैंकों को नीलाम करके वापस रथशील्ड को सौंप दिया निजीकरण के नाम पर।  तो क्या हम इस दुनिया में रथशील्ड के लिए कमाने के लिए आते हैं ? सच तो यही है कि हम सभी रथशील्ड के कैदी हैं और उसी के लिए कमाने के लिए आते हैं। रथशील्ड कौन है ? रथशील्ड है सर्पलोक/नागलोक का प्राणी। उसे स्वर्ण चाहिए था और स्वर्ण पाने के लिए उसने मानवों का निर्माण किया। मानवों ने स्वर्ण कमाया, उस स्वर्ण को कागज की पर्ची (नोट) के बदले उसने खरीद लिया।  अभी तक मानवों के पास कागज के नोट यानि कागज की पर्च...

ऐसी है धरतीपुत्र मुलायम सिंह की हनक"

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"ऐसी है धरतीपुत्र मुलायम सिंह की हनक" 1993 में दूबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद मुलायम सिंह यादव की एटा की निधौंली कला में जनसभा थी. उस समय नेताजी निधौंली कला से विधायक भी थे. जनसभा में भारी भीड़़ थी. मुलायम सिंह को सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आए थे. 👉नेताजी ने मंच से ही लोगो से उनकी समस्याओं के बारे में पूछा. भीड़ में से समस्या संबंधी सवाल उठा कि नेताजी आपने पानी टंकी तो बनवा दी लेकिन उसमें पानी आता ही नही..? 👉नेताजी ने भीड़ से कहा हमारा हेलिकॉप्टर लखनऊ पहुंचने से पहले आपके घरों की टोटियों में पानी आ जाएगा.... यह हमारा आप लोगो से वादा है. इतना सुनते ही अधिकारियों में हड़कम्प मच गया. सारा विभाग सक्रिय हो गया. 👉जनसभा समाप्त हुई. उसके बाद कस्बे से गुजरती जनता ने जो दृश्य देखा वह दंग रह गई....लोगो ने देखा कि खुली हुई टोटियों से पूरे फोर्स के साथ पानी निकल रहा है। 👉इससे लोगो के मन में अपने नेता की प्रति भरोसा व सम्मान और अधिक बढ़ गया. जिंदाबाद नेताजी. आप यथाशीघ्र स्वस्थ हो. #धरतीपुत्र

जब गांव वालो ने भूखे रहकर मुलायम सिंह के लिए जुटाया चंदा

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जब गांव वालो ने भूखे रहकर मुलायम सिंह के लिए जुटाया चंदा 1960 के दशक में राममनोहर लोहिया जी की रैली इटावा और आसपास के जिलों मे होती तो मुलायम सिंह उसमें जरूर शामिल होते. समय के साथ मुलायम सिंह समाजवादी धारा में रमने लगे. छात्र जीवन से ही मुलायम सिंह गरीबों, किसानो की बात करने लगे. समाजवादी आंदोलनों में भाग बढ़-चढ़कर शामिल होते. समय के साथ मुलायम सिंह  पढ़ाई और राजनीति एक साथ करने लगे. अब 1967 का चुनाव आ गया. उस समय तक जसवंत नगर के विधायक नत्थू सिंह जी, मुलायम सिंह के व्यक्तित्व और राजनीतिक कौशल के कायल हो चुके थे. उन्होने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलायम सिंह को टिकट देने की अपील की. टिकट मुलायम सिंह को मिल भी गया. नत्थू सिंह जसवंतनगर के बगल की सीट करहल से चुनाव लड़ने चले गए. मुलायम सिंह अब संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से उम्मीदवार थे. प्रचार करने के लिए उनके पास संसाधन के नाम पर केवल साइकिल थी. मुलायम सिंह के दोस्त दर्शन सिंह साइकिल चलाते और मुलायम सिंह पीछे बैठकर गांव गांव प्रचार करने लगे. प्रचार के लिए गाड़ी खरीदने भर का पै...

#भारत_के_सच्चे_राष्ट्रभक्त #मा०_मुलायम_सिंह_यादवधरती पुत्र,,,,,,, पहलवान,,,,

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#भारत_के_सच्चे_राष्ट्रभक्त    #मा०_मुलायम_सिंह_यादव धरती पुत्र,,,,,,, पहलवान,,,,      बात 1996 से 1998 की है जब मा० मुलायम सिंह यादव भारत के रक्षा मंत्री थे । जब उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लिया कि देश की रक्षा के लिए जो भारतीय जवान सीमा पर शहीद होगा , उनकी डेड बॉडी उनके घरवालों को ससम्मान वापिस लौटाई जाए और ससम्मान अंतिम संस्कार हो ।    इस फैसले से पहले कोई जवान अगर शहीद होता था तो उनका अंतिम संस्कार सरहद पर ही कर दिया जाता था और उनके घर वालो को पत्राचार के मध्यम से घर वालो को सूचित किया जाता था । न ही घर वाले अपने बेटे , अपने भाई , अपने पति या अपने पिता के अंतिम दर्शन कर पाते और न ही अंतिम संस्कार कर पाते । तत्कालीन रक्षा मंत्री  " मा० मुलायम सिंह यादव जी "  का ये फैसला एतिहासिक था ।  अब आप बताइए कि नेता जी ने इस फैसले के बाद कितनी बार अपनी चुनावी सभा में अपने आपको देश भक्त बताया हो या इस फैसले पर वोट मंगा हो ।    मा० मुलायम सिंह यादव को बहुत बहुत धन्यवाद !!! भारत के सैनिकों को सम्मान देने के लिए ।  Akhilesh Y...