मुलायम बनना आसान नहीं-

मुलायम बनना आसान नहीं-
जब तख्त पर खड़े हो नेताजी ने मेरे गांव डुमरी में किया था भाषण.......
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       घटना उस वक्त की है जब नेताजी माननीय मुलायम सिंह यादव जी 1987 में क्रांति रथ ले पूरे प्रदेश को मापने हेतु निकल पड़े थे।वे कई चरणों मे विभक्त अपने रथयात्रा में जब पूर्वांचल दौरे पर आए तो कुशीनगर से देवरिया को चले थे।मैं इंटरमिडीएट का छात्र था लेकिन पिताजी सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे लिहाजा राजनीति में रुचि खूब थी।
       नेताजी का क्रान्ति रथ जब कुशीनगर से होते हुये मेरे गांव के चौराहे पर पंहुचा तो अब स्मृतिशेष हो चुके दीनदयाल यादव जी के साथ मैं एक तख्त का इंतजाम कर सामान्य सा चद्दर बिछा एक बैटरी से संचालित माइक लगा  नेताजी से रथ से उतर सम्बोधित करने का आग्रह कर बैठा।नेताजी रथ से उतर कुछ मिनट तख्त पर खड़े हो कांग्रेस सरकार उखाड़ फेंकने का आग्रह कर आगे बढ़ गए थे।
        मुलायम सिंह यादव जी आज विशाल बरगद के रूप में जो दिख रहे हैं वह कोई एक दिन में किसी मीडिया या न्यूज चैनल की बदौलत नहीं बल्कि अपने संघर्ष,मेहनत और कौशल की बदौलत दिख रहे हैं।वे जमीन से उठ आसमान की बुलंदियों को छुए लेकिन कभी भी जमीन नहीं छोड़े।वे जमीन से जुड़े रहे इसी नाते वे धरतीपुत्र भी कहलाते हैं।
       आप सोचिए जिस मुलायम सिंह यादव जी पर गोलियाँ चलती हों,खतरे ही खतरे हों,अभिजात्य समाज से लेकर सजातीय प्रतिद्वन्दी भी जान लेने को आतुर हो,जातिगत विद्वेष से लेकर मीडिया का चरित्र हनन लगातार जारी हो और वे कुन्दन की तरह तप कर निकल पड़ते हों कितना अद्भुत है ऐसा होना।
       मैं नेताजी का मुरीद इंटर में पढ़ते वक्त ही तब हो गया जब वे एक छोटे से तख्त पर खड़े हो मेरे गांव के चौराहे पर लोगों को सम्बोधित किये थे।ऐसा बड़प्पन और समतावादी सोच ही एक सामान्य व्यक्ति को महान बनाता है।
-चन्द्रभूषण सिंह यादव
(12 अक्टूबर 2022)

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है