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देश में 900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल हैं. 15000+ से अधिक यूट्यूब चैनल और यूटूबर हैं जिनका 1M से ज्यादा सब्सक्रिप्शन है.900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल में 800+ न्यूज़ एंकर सवर्ण हैं.15000+ यूट्यूब चैनल में 14,000+ यूट्यूब चैनल सवर्णों का है.इन सभी ने मिलकर यूजीसी नियमों के खिलाफ रिपोर्टिंग की. OBC SC ST अधिकारों के खिलाफ रिपोर्टिंग की. Chitra TripathiAnjana Om KashyapRubika LiyaquatSushant SinhaNishant ChaturvediShubhankar MishraManak Guptaऔर शुक्ला, तिवारी, चौबे, दुबे, दीक्षित, शर्मा, उपाध्याय सब ने मिलकर यूजीसी के नए नियमों को बदनाम किया. अपनी जाति बिरादरी का खुलकर पक्ष लिया.असली मीडिया सोशल मीडिया है, जहां हम आप लिखते हैं बोलते हैं. असली मीडिया वो बहुजन चैनल हैं जो हमारे समाज का मुद्दा उठाते हैं. बहुजन मीडिया और बहुजन लोगों को आगे बढ़ाने का काम कीजिए.

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देश में 900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल हैं. 15000+ से अधिक यूट्यूब चैनल और यूटूबर हैं जिनका 1M से ज्यादा सब्सक्रिप्शन है. 900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल में 800+ न्यूज़ एंकर सवर्ण हैं. 15000+ यूट्यूब चैनल में 14,000+ यूट्यूब चैनल सवर्णों का है. इन सभी ने मिलकर यूजीसी नियमों के खिलाफ रिपोर्टिंग की. OBC SC ST अधिकारों के खिलाफ रिपोर्टिंग की.  Chitra Tripathi Anjana Om Kashyap Rubika Liyaquat Sushant Sinha Nishant Chaturvedi Shubhankar Mishra Manak Gupta और शुक्ला, तिवारी, चौबे, दुबे, दीक्षित, शर्मा, उपाध्याय सब ने मिलकर यूजीसी के नए नियमों को बदनाम किया. अपनी जाति बिरादरी का खुलकर पक्ष लिया. असली मीडिया सोशल मीडिया है, जहां हम आप लिखते हैं बोलते हैं. असली मीडिया वो बहुजन चैनल हैं जो हमारे समाज का मुद्दा उठाते हैं. बहुजन मीडिया और बहुजन लोगों को आगे बढ़ाने का काम कीजिए.

"आंकड़े गवाह हैं—हिस्सेदारी के नाम पर हमें सिर्फ हाशिए पर रखा गया है! 📊⚖️​साथियों, आज जब हम देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा यानी IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) की बात करते हैं, तो अक्सर 'योग्यता' और 'समानता' की दुहाई दी जाती है। लेकिन क्या धरातल पर वाकई सबको समान अवसर मिल रहे हैं?​भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय (DoPT) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े हमारे समाज की वास्तविक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलते हैं। देश को चलाने वाले कुल तैनात IAS अधिकारियों की संख्या पर गौर कीजिए:​✅ सामान्य वर्ग (General): लगभग 4,621 अधिकारी❌ ओबीसी (OBC): मात्र 447 अधिकारी❌ अनुसूचित जाति (SC): मात्र 332 अधिकारी❌ अनुसूचित जनजाति (ST): मात्र 176 अधिकारी​जब देश की 85% बहुजन आबादी (OBC+SC+ST) का कुल प्रतिनिधित्व प्रशासन की सबसे ऊंची कुर्सियों पर मात्र 17-18% के करीब सिमट कर रह जाए, तो क्या हम इसे एक न्यायपूर्ण व्यवस्था कह सकते हैं?​यह केवल पदों की संख्या नहीं है, बल्कि यह सवाल है उन करोड़ों लोगों की आवाज़ का, जिनकी सुनवाई इन दफ्तरों में होनी चाहिए। क्या 85% समाज में टैलेंट की कमी है? या फिर 'मेरिट' के नाम पर एक खास वर्ग का एकाधिकार आज भी बरकरार है? ✊✊​यह लड़ाई किसी जाति या वर्ग के विरोध में नहीं है, यह लड़ाई 'संवैधानिक न्याय' और 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत की है। जब तक हर समाज का व्यक्ति शासन-प्रशासन के निर्णय लेने वाले पदों पर नहीं बैठेगा, तब तक लोकतंत्र की परिभाषा अधूरी है।​जागिए, इन आंकड़ों को गहराई से समझिए और अपने संवैधानिक हक के लिए तर्कसंगत आवाज़ उठाइए।​(आंकड़े स्रोत: भारत सरकार, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट)​#anjalilodhijhansi #SocialJustice #RepresentationMatters #IAS_Stats #OBC #SC #ST #ConstitutionalRights #Equality #BahujanAwaaz #GovernanceData"

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