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मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी हैये आंख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी हैबस अपने वास्ते ही फ़िक़्रमंद हैं सब लोगयहां किसी को किसी का ख़याल थोड़ी हैपरों को काट दिया है उड़ान से पहलेये ख़ौफ़ ए हिज्र है शौक़ ए विसाल थोड़ी हैमज़ा तो तब है कि हम हार के भी हंसते रहेंहमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी हैलगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहलेग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है परवीन शाकिर #मलाल #आंख #लोग #उड़ान #हार #जीत #mushaironkidunia

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मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है ये आंख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है बस अपने वास्ते ही फ़िक़्रमंद हैं सब लोग यहां किसी को किसी का ख़याल थोड़ी है परों को काट दिया है उड़ान से पहले ये ख़ौफ़ ए हिज्र है शौक़ ए विसाल थोड़ी है मज़ा तो तब है कि हम हार के भी हंसते रहें हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है          परवीन शाकिर #मलाल #आंख #लोग #उड़ान #हार #जीत #mushaironkidunia

श्री रतन टाटा के जीवन की सबसे बड़ी खुशी

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श्री रतन टाटा के जीवन की सबसे बड़ी खुशी "मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।" यह वाक्य रतन टाटा के जीवन का वह क्षण था, जिसने उन्हें सच्चे सुख का अर्थ समझाया। जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय अरबपति श्री रतन टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा, "सर, आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली?" तब उन्होंने एक मार्मिक जवाब दिया। जीवन के चार चरणों में खुशी की तलाश रतन टाटा ने कहा, "मैंने जीवन में चार चरणों से गुजरा और अंततः मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।" पहला चरण धन और साधन संचय करने का था। इस दौरान, मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मुझे उम्मीद थी। फिर दूसरा चरण आया, जब मैंने कीमती सामान और वस्त्रों को इकट्ठा करना शुरू किया। लेकिन मुझे जल्द ही यह एहसास हुआ कि इस सुख का प्रभाव भी अस्थायी है, क्योंकि इन वस्तुओं की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती। तीसरा चरण तब आया जब मैंने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए। उस समय मेरे पास भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% हिस्सा था, और मैं...