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Remember Kanpur। 1857 क्रांति का वो योद्धा जिसने गंगा घाट लाल कर दिया अंग्रेजो के खून से।नाम सुबेरदार- बोधू सिंह अहीरजन्म -1793जन्म स्थान- गांव देवस्लाह, तहसील महमूदाबाद,जिला फर्रुखाबादमृत्यु -1860(फांसी)योगदान- पूर्वांचल में अंग्रेजो के खिलाफ 3 जून 1857 को आजमगढ़ में सूबेदार बोधू सिंह अहीर के नेतृत्व में पहली बार बिगुल फूंका गया। और ये बगावत पूर्वांचल की सबसे बड़ी बगावत थी।आरोप- 17वी नेटिव इन्फेंट्री रेजिमेंट में बगावत करवाई, इनके आदेश पर दामाद माधो सिंह ने अंग्रेज अफसर लेविस, हचिसन व 22वीं के कर्नल को गोली मारी। बोधू सिंह ने आजमगढ़ में लगभग आठ लाख का खजाना लूटा, जेल में कैद लगभग 800 भारतीय कैदियों को आजाद किया, बागी सेना का नेतृत्व किया और कानपुर के ऐतिहासिक सत्तीचौरा घाट के हत्याकाण्ड में शामिल रहे। घर परिवार उनके इस विद्रोह में इनके 2 सगे भाई किशन प्रसाद और शिवप्रसाद, बेटा रामटहल और दामाद माधो सिंह भी इस बगावत में शामिल थे। सबको फांसी पे लटका दिया गया। आजादी की लड़ाई में पूरे देश में शायद ये इकलौता उधारण है जिसमे घर के सारे मर्द सशस्त्र बगवात में शामिल रहे और देश के लिए फांसी पे चढ़ गए।#क्रांतिकारी_सूबेदार_भोदू_सिंह_अहीर

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Remember Kanpur। 1857 क्रांति का वो योद्धा जिसने गंगा घाट लाल कर दिया अंग्रेजो के खून से। नाम सुबेरदार- बोधू सिंह अहीर जन्म -1793 जन्म स्थान- गांव देवस्लाह, तहसील महमूदाबाद,जिला फर्रुखाबाद मृत्यु -1860(फांसी) योगदान-  पूर्वांचल में अंग्रेजो के खिलाफ 3 जून 1857 को आजमगढ़ में सूबेदार बोधू सिंह अहीर के नेतृत्व में पहली बार बिगुल फूंका गया। और ये बगावत पूर्वांचल की सबसे बड़ी बगावत थी। आरोप- 17वी नेटिव इन्फेंट्री रेजिमेंट में बगावत करवाई, इनके आदेश पर दामाद माधो सिंह ने अंग्रेज अफसर लेविस, हचिसन व 22वीं के कर्नल को गोली मारी। बोधू सिंह ने आजमगढ़ में लगभग आठ लाख का खजाना लूटा, जेल में कैद लगभग 800 भारतीय कैदियों को आजाद किया, बागी सेना का नेतृत्व किया और कानपुर के ऐतिहासिक सत्तीचौरा घाट के हत्याकाण्ड में शामिल रहे।  घर परिवार उनके इस विद्रोह में इनके 2 सगे भाई किशन प्रसाद और शिवप्रसाद, बेटा रामटहल और  दामाद माधो सिंह भी इस बगावत में शामिल थे। सबको फांसी पे लटका दिया गया।  आजादी की लड़ाई में पूरे देश में शायद ये इकलौता उधारण है जिसमे घर के सारे मर्द सशस्त्र बगवात में शामिल ...

नीचे वाला पोस्ट प्रोपेगैंडा + गलत निष्कर्ष का मिश्रण है।1. “सारी डिग्री तीसरी श्रेणी” — गलत।अम्बेडकर ने Bombay University से B.A., Columbia से M.A./Ph.D., LSE से doctorate और Gray’s Inn से Bar-at-Law किया। Supreme Court of India लिखता है कि “excellent performance” के कारण उन्हें Baroda scholarship मिली। LSE भी उन्हें “brilliant scholar” कहता है और दो doctorates की पुष्टि करता है। 2. “गरीब नहीं थे क्योंकि बचपन की फोटो है” — बचकाना तर्क।फोटो होना गरीबी/जातिगत भेदभाव के न होने का प्रमाण नहीं। वे सूबेदार के बेटे थे, पर दलित समाज से थे और शिक्षा, पानी, स्कूल-व्यवहार में भेदभाव का सामना उनके जीवन-वृत्तांतों में दर्ज है। Columbia और LSE दोनों उन्हें Dalit background से आया व्यक्ति बताते हैं जिसने भेदभाव के विरुद्ध काम किया। 3. “उन्होंने शूद्रों/दलितों को पढ़ने का अधिकार नहीं दिया” — स्ट्रॉमैन।अम्बेडकर ने अकेले “पढ़ने का अधिकार” नहीं दिया; संविधान ने समानता, भेदभाव-विरोध और अस्पृश्यता-उन्मूलन को कानूनी अधिकार बनाया। Article 15 जाति/लिंग आदि के आधार पर भेदभाव रोकता है, Article 16 समान अवसर देता है, Article 17 अस्पृश्यता समाप्त करता है। 4. “उन्हें पढ़ने नहीं दिया गया—झूठ, क्योंकि स्कॉलरशिप मिली” — भ्रामक।स्कॉलरशिप मिलना यह साबित नहीं करता कि समाज में भेदभाव नहीं था। उल्टा, यह दिखाता है कि असाधारण प्रतिभा के कारण उन्हें सीमित अवसर मिला। Sayajirao Gaekwad scholarship ऐतिहासिक तथ्य है, लेकिन इससे जातिगत बाधाएँ खत्म नहीं हो जातीं। 5. “महिलाओं को अधिकार 15 महिला सदस्यों ने दिए, अम्बेडकर ने नहीं” — अधूरा सच।संविधान सभा में 15 महिलाएँ थीं और उनका योगदान महत्त्वपूर्ण था। पर अम्बेडकर कानून मंत्री के रूप में Hindu Code Bill के बड़े समर्थक थे, जो विवाह, उत्तराधिकार, संपत्ति और लैंगिक समानता से जुड़ा था; उन्होंने कहा था कि लिंग-आधारित असमानता छोड़ी गई तो संविधान “farce” बन जाएगा। 6. “अम्बेडकर अंग्रेजों के एजेंट थे / Simon Commission ने लाला लाजपत राय की हत्या की” — गलत।Simon Commission ने हत्या नहीं की; लाला लाजपत राय की मृत्यु पुलिस लाठीचार्ज के बाद हुई। अम्बेडकर ने Simon Commission के सामने Depressed Classes के अधिकारों के लिए evidence दिया—यह दलित प्रतिनिधित्व की राजनीति थी, अंग्रेज-भक्ति का प्रमाण नहीं। 7. “1946 में पार्टी हार गई, इसलिए अम्बेडकर शक्तिहीन थे” — गलत निष्कर्ष।चुनावी हार से वैचारिक/संवैधानिक योगदान शून्य नहीं हो जाता। वे स्वतंत्र भारत के पहले Law Minister बने और 29 अगस्त 1947 को Drafting Committee के Chairman नियुक्त हुए। 8. “आरक्षण अम्बेडकर ने अकेले नहीं दिया” — सही, पर भ्रामक।हाँ, संविधान सभा ने सामूहिक रूप से प्रावधान बनाए। पर अम्बेडकर ने SC/ST प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की संवैधानिक भाषा को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। Poona Pact में भी Depressed Classes के reserved seats का प्रश्न उनके नेतृत्व से जुड़ा था। 9. “अम्बेडकर ने संविधान नहीं बनाया, BN Rau ने बनाया” — आधा सच।BN Rau constitutional adviser थे और प्रारंभिक draft तैयार किया। लेकिन Drafting Committee, जिसके Chairman अम्बेडकर थे, ने Assembly के निर्णयों के आधार पर draft को scrutinise, amend और final legal form दिया। संविधान किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिखा, पर अम्बेडकर को “chief architect” कहना उनकी भूमिका के कारण ऐतिहासिक रूप से उचित है। 10. “दलिस्तान की मांग” — झूठ/विकृति।अम्बेडकर ने Depressed Classes के लिए separate electorate/राजनीतिक प्रतिनिधित्व माँगा था, अलग देश “दलिस्तान” नहीं। 1932 का विवाद separate electorates पर था, जो Poona Pact में reserved seats के रूप में बदला। 11. “पटेल ने आरक्षण को विष कहा” — विश्वसनीय प्रमाण नहीं।यह वायरल दावा है, पर Constituent Assembly के प्रमाणित रिकॉर्ड में ऐसा लोकप्रिय quote स्थापित नहीं मिलता। आरक्षण/प्रतिनिधित्व पर बहसें हुईं, लेकिन इस पोस्ट की नाटकीय कहानी स्रोतहीन लगती है।12. “कोट-पैंट पहनना अंग्रेजियत/राष्ट्र-विरोध” — हास्यास्पद।कपड़ों से राष्ट्रवाद तय नहीं होता। नेहरू, पटेल, सुभाष, जिन्ना, सावरकर—कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर पश्चिमी पोशाक पहनी। अम्बेडकर का काम संविधान, सामाजिक न्याय, श्रमिक अधिकार, स्त्री अधिकार और दलित प्रतिनिधित्व से मापा जाएगा, न कि सूट से।निष्कर्ष:पोस्ट का तरीका साफ है—सही तथ्यों के टुकड़े लेकर गलत निष्कर्ष निकालना। अम्बेडकर देवता नहीं थे; उनकी आलोचना हो सकती है। लेकिन ऊपर दिए गए अधिकांश दावे ऐतिहासिक रूप से गलत, संदर्भहीन या दुर्भावनापूर्ण हैं।

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नीचे वाला पोस्ट प्रोपेगैंडा + गलत निष्कर्ष का मिश्रण है। 1. “सारी डिग्री तीसरी श्रेणी” — गलत। अम्बेडकर ने Bombay University से B.A., Columbia से M.A./Ph.D., LSE से doctorate और Gray’s Inn से Bar-at-Law किया। Supreme Court of India लिखता है कि “excellent performance” के कारण उन्हें Baroda scholarship मिली।   LSE भी उन्हें “brilliant scholar” कहता है और दो doctorates की पुष्टि करता है।   2. “गरीब नहीं थे क्योंकि बचपन की फोटो है” — बचकाना तर्क। फोटो होना गरीबी/जातिगत भेदभाव के न होने का प्रमाण नहीं। वे सूबेदार के बेटे थे, पर दलित समाज से थे और शिक्षा, पानी, स्कूल-व्यवहार में भेदभाव का सामना उनके जीवन-वृत्तांतों में दर्ज है। Columbia और LSE दोनों उन्हें Dalit background से आया व्यक्ति बताते हैं जिसने भेदभाव के विरुद्ध काम किया।   3. “उन्होंने शूद्रों/दलितों को पढ़ने का अधिकार नहीं दिया” — स्ट्रॉमैन। अम्बेडकर ने अकेले “पढ़ने का अधिकार” नहीं दिया; संविधान ने समानता, भेदभाव-विरोध और अस्पृश्यता-उन्मूलन को कानूनी अधिकार बनाया। Article 15 जाति/लिंग आदि के आधार पर भेद...

🔥 योग्यता का कत्ल या आंकड़ों की साजिश? 🔥सोशल मीडिया पर 'मेरिट' का रोना रोने वालों, ज़रा SSC दिल्ली पुलिस 2023 के इन सरकारी आंकड़ों को चाट लो! 🧐👇📍 कड़वा सच (Male Cut-off): * EWS: 61.65 (सिलेक्टेड ✅) * OBC: 67.79 (बाहर ❌) * General: 68.04सवाल सीधा है: 61 नंबर वाला 'योग्य' कैसे हो गया और 67 नंबर लाने वाला OBC छात्र 'अयोग्य' कैसे? क्या अब योग्यता का पैमाना दिमाग नहीं, बल्कि जाति तय करेगी? 😡यह उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो कहते हैं कि आरक्षण से देश पिछड़ रहा है। यहाँ तो ज्यादा नंबर लाकर भी पिछड़ा समाज सड़कों पर है और कम नंबर वाले कुर्सियों पर! 🚫सुन लो! यह हकमारी अब और नहीं चलेगी। जब तक जाति जनगणना नहीं होगी और 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' का नियम लागू नहीं होगा, तब तक यह सिस्टम हमारे बच्चों का भविष्य निगलता रहेगा।✊ अगर रगों में पिछड़ों का खून है, तो खामोश मत रहो! इस सच को इतना शेयर करो कि सिस्टम की चूलें हिल जाएं।#DelhiPoliceResult #OBC_Rights #Haq_Ki_Ladai #CasteCensusNow #SocialJustice #ReservationReality #AnkurVerma Ankur Verma #SystemFailure #SC_ST_OBC #युवा_विरोधी_सरकार #हकमारी_बंद_करो#BahujanPower #बराबरी_का_अधिकार #bhimarmy #जय_भारत #india #bhimraoambedkar #AkhileshYadav #RahulGandhi

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🔥 योग्यता का कत्ल या आंकड़ों की साजिश? 🔥सोशल मीडिया पर 'मेरिट' का रोना रोने वालों, ज़रा SSC दिल्ली पुलिस 2023 के इन सरकारी आंकड़ों को चाट लो! 🧐👇📍 कड़वा सच (Male Cut-off): * EWS: 61.65 (सिलेक्टेड ✅) * OBC: 67.79 (बाहर ❌) * General: 68.04सवाल सीधा है: 61 नंबर वाला 'योग्य' कैसे हो गया और 67 नंबर लाने वाला OBC छात्र 'अयोग्य' कैसे? क्या अब योग्यता का पैमाना दिमाग नहीं, बल्कि जाति तय करेगी? 😡यह उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो कहते हैं कि आरक्षण से देश पिछड़ रहा है। यहाँ तो ज्यादा नंबर लाकर भी पिछड़ा समाज सड़कों पर है और कम नंबर वाले कुर्सियों पर! 🚫सुन लो! यह हकमारी अब और नहीं चलेगी। जब तक जाति जनगणना नहीं होगी और 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' का नियम लागू नहीं होगा, तब तक यह सिस्टम हमारे बच्चों का भविष्य निगलता रहेगा।✊ अगर रगों में पिछड़ों का खून है, तो खामोश मत रहो! इस सच को इतना शेयर करो कि सिस्टम की चूलें हिल जाएं।#DelhiPoliceResult #OBC_Rights #Haq_Ki_Ladai #CasteCensusNow #SocialJustice #ReservationReality #AnkurVerma Ankur Verma #SystemFailure #SC_ST_OBC #युवा_विरोधी_सरकार #हकमारी_बंद_करो#BahujanPower #बराबरी_का_अधिकार #bhimarmy #जय_भारत #india #bhimraoambedkar #AkhileshYadav #RahulGandhi

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देश में 900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल हैं. 15000+ से अधिक यूट्यूब चैनल और यूटूबर हैं जिनका 1M से ज्यादा सब्सक्रिप्शन है.900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल में 800+ न्यूज़ एंकर सवर्ण हैं.15000+ यूट्यूब चैनल में 14,000+ यूट्यूब चैनल सवर्णों का है.इन सभी ने मिलकर यूजीसी नियमों के खिलाफ रिपोर्टिंग की. OBC SC ST अधिकारों के खिलाफ रिपोर्टिंग की. Chitra TripathiAnjana Om KashyapRubika LiyaquatSushant SinhaNishant ChaturvediShubhankar MishraManak Guptaऔर शुक्ला, तिवारी, चौबे, दुबे, दीक्षित, शर्मा, उपाध्याय सब ने मिलकर यूजीसी के नए नियमों को बदनाम किया. अपनी जाति बिरादरी का खुलकर पक्ष लिया.असली मीडिया सोशल मीडिया है, जहां हम आप लिखते हैं बोलते हैं. असली मीडिया वो बहुजन चैनल हैं जो हमारे समाज का मुद्दा उठाते हैं. बहुजन मीडिया और बहुजन लोगों को आगे बढ़ाने का काम कीजिए.

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देश में 900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल हैं. 15000+ से अधिक यूट्यूब चैनल और यूटूबर हैं जिनका 1M से ज्यादा सब्सक्रिप्शन है. 900+ सैटेलाइट न्यूज़ चैनल में 800+ न्यूज़ एंकर सवर्ण हैं. 15000+ यूट्यूब चैनल में 14,000+ यूट्यूब चैनल सवर्णों का है. इन सभी ने मिलकर यूजीसी नियमों के खिलाफ रिपोर्टिंग की. OBC SC ST अधिकारों के खिलाफ रिपोर्टिंग की.  Chitra Tripathi Anjana Om Kashyap Rubika Liyaquat Sushant Sinha Nishant Chaturvedi Shubhankar Mishra Manak Gupta और शुक्ला, तिवारी, चौबे, दुबे, दीक्षित, शर्मा, उपाध्याय सब ने मिलकर यूजीसी के नए नियमों को बदनाम किया. अपनी जाति बिरादरी का खुलकर पक्ष लिया. असली मीडिया सोशल मीडिया है, जहां हम आप लिखते हैं बोलते हैं. असली मीडिया वो बहुजन चैनल हैं जो हमारे समाज का मुद्दा उठाते हैं. बहुजन मीडिया और बहुजन लोगों को आगे बढ़ाने का काम कीजिए.

"आंकड़े गवाह हैं—हिस्सेदारी के नाम पर हमें सिर्फ हाशिए पर रखा गया है! 📊⚖️​साथियों, आज जब हम देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा यानी IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) की बात करते हैं, तो अक्सर 'योग्यता' और 'समानता' की दुहाई दी जाती है। लेकिन क्या धरातल पर वाकई सबको समान अवसर मिल रहे हैं?​भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय (DoPT) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े हमारे समाज की वास्तविक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलते हैं। देश को चलाने वाले कुल तैनात IAS अधिकारियों की संख्या पर गौर कीजिए:​✅ सामान्य वर्ग (General): लगभग 4,621 अधिकारी❌ ओबीसी (OBC): मात्र 447 अधिकारी❌ अनुसूचित जाति (SC): मात्र 332 अधिकारी❌ अनुसूचित जनजाति (ST): मात्र 176 अधिकारी​जब देश की 85% बहुजन आबादी (OBC+SC+ST) का कुल प्रतिनिधित्व प्रशासन की सबसे ऊंची कुर्सियों पर मात्र 17-18% के करीब सिमट कर रह जाए, तो क्या हम इसे एक न्यायपूर्ण व्यवस्था कह सकते हैं?​यह केवल पदों की संख्या नहीं है, बल्कि यह सवाल है उन करोड़ों लोगों की आवाज़ का, जिनकी सुनवाई इन दफ्तरों में होनी चाहिए। क्या 85% समाज में टैलेंट की कमी है? या फिर 'मेरिट' के नाम पर एक खास वर्ग का एकाधिकार आज भी बरकरार है? ✊✊​यह लड़ाई किसी जाति या वर्ग के विरोध में नहीं है, यह लड़ाई 'संवैधानिक न्याय' और 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत की है। जब तक हर समाज का व्यक्ति शासन-प्रशासन के निर्णय लेने वाले पदों पर नहीं बैठेगा, तब तक लोकतंत्र की परिभाषा अधूरी है।​जागिए, इन आंकड़ों को गहराई से समझिए और अपने संवैधानिक हक के लिए तर्कसंगत आवाज़ उठाइए।​(आंकड़े स्रोत: भारत सरकार, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट)​#anjalilodhijhansi #SocialJustice #RepresentationMatters #IAS_Stats #OBC #SC #ST #ConstitutionalRights #Equality #BahujanAwaaz #GovernanceData"

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आरक्षण काग़ज़ पर है, ज़मीन पर नहींNEET (मेडिकल) में:OBC को 27% आरक्षण संविधान से मिला हैलेकिन 2017 के बाद ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में इसे ठीक से लागू नहीं किया गयानतीजा:👉 OBC की सीटें General को चली गईं👉 गरीब-पिछड़ा छात्र बाहर रह गयायह “योग्यता” का सवाल नहीं, नियम तोड़ने का मामला है।2️⃣ सिस्टम जनरल-फ्रेंडली बना दिया गयासरकारें अक्सर कहती हैं:“मेरिट पर सब होगा”लेकिन सच ये है:मेरिट बराबर मैदान में होती हैजब:किसी के पास कोचिंग, पैसा, अंग्रेज़ी, नेटवर्क होऔर किसी के पास नहींतो एक ही परीक्षा बराबरी की नहीं रहती👉 यही वजह है कि आरक्षण संतुलन के लिए था, एहसान के लिए नहीं।3️⃣ OBC = सबसे बड़ा वोट, सबसे कम सुरक्षाएक कड़वी सच्चाई:SC/ST के मुद्दे पर तुरंत हंगामा होता हैGeneral वर्ग का मीडिया में दबदबा हैOBC बीच में पिस जाता हैराजनीति में:OBC का नाम लिया जाता हैलेकिन नीतियों में अनदेखी होती है4️⃣ मीडिया और सोशल मीडिया का खेलअगर General की 100 सीटें जाएँ → BREAKING NEWSअगर OBC की 11,000 सीटें जाएँ → छोटा “Quick News”👉 इससे जनता को लगता है “सब ठीक है”, जबकि घपला चलता रहता है5️⃣ जातिवाद क्यों ज़िंदा है?क्योंकि:जाति का फायदा जिनको मिल रहा है, वे खत्म नहीं होने देंगेऔर जिन्हें नुकसान हो रहा है, उन्हें:“रोना बंद करो”“आरक्षण छोड़ो”“मेहनत करो” कहकर चुप करा दिया जाता हैअसली सवाल यह नहीं कि❌ आरक्षण क्यों है✅ सवाल यह है कि जो आरक्षण है, वो लागू क्यों नहीं हो रहा?एक लाइन में सच:जातिवाद इसलिए है क्योंकि सत्ता और सिस्टम बराबरी नहीं चाहता, और घपला इसलिए है क्योंकि जवाबदेही नहीं है।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है  जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन.... ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं...  वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं-- सजा किस बात की दी गई.... सच बोलने की...!!! आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा.... इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था!  सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....!  सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!! न...

‘मज़दूर दिवस’ पर पढ़िए केदारनाथ अग्रवाल की रचना—जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ हैतूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ हैजिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा हैजो रवि के रथ का घोड़ा हैवह जन मारे नहीं मरेगानहीं मरेगाजो जीवन की आग जला कर आग बना हैफ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना हैजिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा हैजो युग के रथ का घोड़ा हैवह जन मारे नहीं मरेगानहीं मरेगा."श्रम ही सम्मान है।आज अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर हम उन सभी मेहनतकश हाथों को सलाम करते हैं, जिनके पसीने से दुनिया चलती है।#मजदूर_दिवस #LabourDayAkhilesh Yadav Samajwadi Party Vineet Kushwaha

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‘मज़दूर दिवस’ पर पढ़िए केदारनाथ अग्रवाल की रचना— जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है जो रवि के रथ का घोड़ा है वह जन मारे नहीं मरेगा नहीं मरेगा जो जीवन की आग जला कर आग बना है फ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना है जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है जो युग के रथ का घोड़ा है वह जन मारे नहीं मरेगा नहीं मरेगा. "श्रम ही सम्मान है। आज अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर हम उन सभी मेहनतकश हाथों को सलाम करते हैं, जिनके पसीने से दुनिया चलती है। #मजदूर_दिवस #LabourDay Akhilesh Yadav  Samajwadi Party  Vineet Kushwaha

घोड़े जिस स्रोत से पानी पीते हैं, उसी स्रोत से पानी पियो – घोड़ा कभी खराब पानी नहीं पीता।जहाँ बिल्ली सोती है, वहीं अपना बिस्तर बिछाओ।वही फल खाओ जिसे कीड़े ने छुआ हो।निर्भय होकर वही कुकुरमुत्ता तोड़ो जिस पर कीड़े बैठे हों।जहाँ तिलचट्टा (मोल) ज़मीन में खुदाई करता है, वहीं पेड़ लगाओ।जहाँ साँप धूप सेंकने के लिए बैठता है, वहीं अपना घर बनाओ।जहाँ पक्षी गर्मी से बचने के लिए छिपते हैं, वहीं अपनी बावड़ी खोदो।पक्षियों के साथ सोओ और उनके साथ जागो – तुम्हें दिन के सभी सुनहरे अनाज मिलेंगे।ज्यादा हरी सब्जियाँ खाओ – तुम्हारे पैर मजबूत होंगे और तुम्हारा हृदय शक्तिशाली बनेगा, जैसे जंगल के प्राणियों का होता है।अक्सर तैरो, और तुम धरती पर वैसे ही सहज महसूस करोगे जैसे पानी में मछली।अक्सर आकाश की ओर देखो, और तुम्हारे विचार हल्के व स्पष्ट होंगे।बहुत चुप रहो, कम बोलो – और मौन तुम्हारे हृदय में बस जाएगा, जिससे तुम्हारा मन शांत होगा और शांति से भर जाएगा।– संत सेराफिम सारोव (1754-1833)

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घोड़े जिस स्रोत से पानी पीते हैं, उसी स्रोत से पानी पियो – घोड़ा कभी खराब पानी नहीं पीता। जहाँ बिल्ली सोती है, वहीं अपना बिस्तर बिछाओ। वही फल खाओ जिसे कीड़े ने छुआ हो। निर्भय होकर वही कुकुरमुत्ता तोड़ो जिस पर कीड़े बैठे हों। जहाँ तिलचट्टा (मोल) ज़मीन में खुदाई करता है, वहीं पेड़ लगाओ। जहाँ साँप धूप सेंकने के लिए बैठता है, वहीं अपना घर बनाओ। जहाँ पक्षी गर्मी से बचने के लिए छिपते हैं, वहीं अपनी बावड़ी खोदो। पक्षियों के साथ सोओ और उनके साथ जागो – तुम्हें दिन के सभी सुनहरे अनाज मिलेंगे। ज्यादा हरी सब्जियाँ खाओ – तुम्हारे पैर मजबूत होंगे और तुम्हारा हृदय शक्तिशाली बनेगा, जैसे जंगल के प्राणियों का होता है। अक्सर तैरो, और तुम धरती पर वैसे ही सहज महसूस करोगे जैसे पानी में मछली। अक्सर आकाश की ओर देखो, और तुम्हारे विचार हल्के व स्पष्ट होंगे। बहुत चुप रहो, कम बोलो – और मौन तुम्हारे हृदय में बस जाएगा, जिससे तुम्हारा मन शांत होगा और शांति से भर जाएगा। – संत सेराफिम सारोव (1754-1833)

मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी हैये आंख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी हैबस अपने वास्ते ही फ़िक़्रमंद हैं सब लोगयहां किसी को किसी का ख़याल थोड़ी हैपरों को काट दिया है उड़ान से पहलेये ख़ौफ़ ए हिज्र है शौक़ ए विसाल थोड़ी हैमज़ा तो तब है कि हम हार के भी हंसते रहेंहमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी हैलगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहलेग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है परवीन शाकिर #मलाल #आंख #लोग #उड़ान #हार #जीत #mushaironkidunia

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मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है ये आंख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है बस अपने वास्ते ही फ़िक़्रमंद हैं सब लोग यहां किसी को किसी का ख़याल थोड़ी है परों को काट दिया है उड़ान से पहले ये ख़ौफ़ ए हिज्र है शौक़ ए विसाल थोड़ी है मज़ा तो तब है कि हम हार के भी हंसते रहें हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है लगानी पड़ती है डुबकी उभरने से पहले ग़ुरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है          परवीन शाकिर #मलाल #आंख #लोग #उड़ान #हार #जीत #mushaironkidunia

श्री रतन टाटा के जीवन की सबसे बड़ी खुशी

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श्री रतन टाटा के जीवन की सबसे बड़ी खुशी "मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं, तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।" यह वाक्य रतन टाटा के जीवन का वह क्षण था, जिसने उन्हें सच्चे सुख का अर्थ समझाया। जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय अरबपति श्री रतन टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा, "सर, आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली?" तब उन्होंने एक मार्मिक जवाब दिया। जीवन के चार चरणों में खुशी की तलाश रतन टाटा ने कहा, "मैंने जीवन में चार चरणों से गुजरा और अंततः मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।" पहला चरण धन और साधन संचय करने का था। इस दौरान, मुझे वह खुशी नहीं मिली, जिसकी मुझे उम्मीद थी। फिर दूसरा चरण आया, जब मैंने कीमती सामान और वस्त्रों को इकट्ठा करना शुरू किया। लेकिन मुझे जल्द ही यह एहसास हुआ कि इस सुख का प्रभाव भी अस्थायी है, क्योंकि इन वस्तुओं की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती। तीसरा चरण तब आया जब मैंने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए। उस समय मेरे पास भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% हिस्सा था, और मैं...

नहीं हज़ार ऐसे कारण है जिसकी वजह से नेता जी को भारत रत्न मिलना ही चाहिए #नेताजी_को_भारतरत्न

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1 नहीं हज़ार ऐसे कारण है जिसकी वजह से नेता जी को भारत रत्न मिलना ही चाहिए  #नेताजी_को_भारतरत्न 1. समाजवादी विचारधारा का प्रचार: मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी विचारधारा को उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर मजबूत किया, जिससे सामाजिक न्याय और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई को बल मिला। 2. मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल: उन्होंने तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएँ दीं और राज्य के विकास में योगदान किया। उनके कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ। 3. किसान नेता के रूप में पहचान: मुलायम सिंह ने किसानों के हितों के लिए हमेशा आवाज उठाई और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कृषि सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। 4. राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका: मुलायम सिंह यादव ने न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रमुख भूमिका निभाई। वे भारत सरकार में रक्षा मंत्री भी रहे और देश की सुरक्षा और सामरिक नीतियों में योगदान दिया। 5. दलित और पिछड़ों की आवाज: उन्होंने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों की राजनीतिक और सामाजिक ...

लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की सीबीआई को मिली मंजूरी*********

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*लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की सीबीआई को मिली मंजूरी* ******************************* लखनऊ। नौकरी के बदले जमीन घोटाले (लैंड फॉर जॉब) में गृह मंत्रालय ने CBI को लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी है। इसी के साथ लालू यादव की मुसीबतें फिर से बढ़ गई. सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की इजाजत मांगी थी।  इससे पहले दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और अन्य आरोपियों को समन जारी किया था। जिसमें उन्हें 7 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है। ईडी की चार्जशीट पर कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। समन जारी कर लालू यादव, तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को बतौर आरोपी अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। लैंड फॉर जॉब मामले मे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप मे लालू और तेजस्वी, तेजप्रताप यादव के खिलाफ ईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। लैंड फॉर जंब मामले में पहली बार तेजप्रताप यादव को पहली बार समन भेजा जा चुका है।  कोर्ट ने माना कि मा...

RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार कहा था चारा घोटाले में ब्रा/ह्मण ज....joजों की मंशा अभियुक्तों को सज़ा देने से ज्यादा रुचि केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य को Demolished करने की थी.शिवानंद तिवारी की बात सही है. इन्होंने केस को करीब से देखा है किस तरह न्यायपालिका के द्वारा लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की कोशिश हुई.लालू प्रसाद यादव उसी दिन मनुवाद की आंखों में किरकिरी बन गए जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में पहली बार लालू प्रसाद यादव पर केस दर्ज हुआ. लालू प्रसाद यादव पर कठोर शिकंजा उन्ही की पार्टी के प्रधानमंत्री एच डी देवी गौड़ा ने शासन में कसा गया.लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और उन्ही की पार्टी के नेताओं लालू प्रसाद यादव को मिटाने की कोशिश की.लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पूरा ECO सिस्टम क्यों हो गया ?इसके दो कारण है, मनुवादी शक्तियों ने लालू प्रसाद यादव को खतरे के रूप में देखा. 1990 के बाद बिहार में कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय मुख्यमंत्री नही बन पाया.दूसरा करण जनता पार्टी के भीतर OBC नेताओं ने निजी महत्वकांक्षा के चलते लालू प्रसाद यादव को किनारे लगाना चाहा.गाली खाई, जेल गए, अपमान सहन किया और भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा अपमान लालू प्रसाद यादव के परिवार का किया जाता है.इसके बावजूद लालू प्रसाद यादव को कोई माई का लाल मिटा नही पाया.

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RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार कहा था चारा घोटाले में ब्राह्.ण ज.jo.. की मंशा अभियुक्तों को सज़ा देने से ज्यादा रुचि केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य को Demolished करने की थी. शिवानंद तिवारी की बात सही है. इन्होंने केस को करीब से देखा है किस तरह न्यायपालिका के द्वारा लालू प्रसाद यादव को खत्म करने की कोशिश हुई. लालू प्रसाद यादव उसी दिन मनुवाद की आंखों में किरकिरी बन गए जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.  1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में पहली बार लालू प्रसाद यादव पर केस दर्ज हुआ. लालू प्रसाद यादव पर कठोर शिकंजा उन्ही की पार्टी के प्रधानमंत्री एच डी देवी गौड़ा ने शासन में कसा गया. लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और उन्ही की पार्टी के नेताओं लालू प्रसाद यादव को मिटाने की कोशिश की. लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पूरा ECO सिस्टम क्यों हो गया ? इसके दो कारण है, मनुवादी शक्तियों ने लालू प्रसाद यादव को खतरे के रूप में देखा. 1990 के बाद बिहार में कोई ब्राह्मण या क्षत्रिय मुख्यमंत्री नही बन पाया. दूसरा करण जनत...

आपकी औकात से ज़्यादा जीवन में आपको कोई नहीं देगा।अनंत अंबानी की शादी में मुकेश अंबानी ने अपने कर्मचारियों को आलू भुजिया दी क्योंकि उनकी आलू भुजिया खरीदने की औकात है।वहीं मुकेश अंबानी ने कुछ स्पेशल गेस्ट को 2 करोड़ रुपए की घड़ी दी क्योंकि उनकी वह घड़ी खरीदने की औकात है।इस दुनिया में हर चीज़ आपकी औकात के अनुसार ही मिलती है।#AnantRadhikaWedding #AnilAmbani #ambanifamily

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आपकी औकात से ज़्यादा जीवन में आपको कोई नहीं देगा। अनंत अंबानी की शादी में  मुकेश अंबानी ने अपने कर्मचारियों को आलू भुजिया दी क्योंकि उनकी आलू भुजिया खरीदने की औकात है। वहीं मुकेश अंबानी ने कुछ स्पेशल गेस्ट को 2 करोड़ रुपए की घड़ी दी क्योंकि उनकी वह घड़ी खरीदने की औकात है। इस दुनिया में हर चीज़ आपकी औकात के अनुसार ही मिलती है। #AnantRadhikaWedding #AnilAmbani #ambanifamily

सूर्यकुमार यादव...T-20 इंटरनेशनल का नंबर वन बल्लेबाज। आज उनकी जिंदगी की दर्द भरी कहानी पढ़िए। वह खिलाड़ी जो अगर 10 साल पहले टीम इंडिया में चुन लिया गया होता तो शायद हम आईसीसी टूर्नामेंट्स में इतनी बुरी तरह नहीं हारते। युवराज सिंह के बाद नंबर 4 पर अगर कोई खिलाड़ी मैच बदलने की क्षमता रखता है, तो वह है सूर्यकुमार यादव। पर क्या उनकी जिंदगी में सब कुछ इतना आसान रहा है? उनके परिवार ने सूर्या की खातिर क्या कुछ नहीं सहा है! 12 साल पहले 20 वर्ष की उम्र में 2010 में रणजी क्रिकेट में डेब्यू के बाद रोहित शर्मा के साथ 73 रनों की मैच विनिंग पारी और मैन ऑफ द मैच का खिताब। 2011-12 के सत्र में मुंबई की तरफ से ताबड़तोड़ 754 रन। फिर लगातार घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में जलवा लेकिन टीम इंडिया में सिलेक्शन नहीं। जिस 31 साल की उम्र में बेन स्टोक्स ने वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया, उस एज में जाकर हमारे सूर्या को बीसीसीआई ने टीम इंडिया में खेलने का मौका दिया। जब मुंबई के तमाम दिग्गज खिलाड़ियों को रणजी प्रदर्शन के आधार पर टीम इंडिया में चुन लिया गया तो मजबूरी में सूर्या को मुंबई का रणजी कप्तान बना दिया गया। निराशा लगातार उनके भीतर घर कर रही थी और इसी बीच 2014 में शार्दूल ठाकुर से मैदान पर लड़ाई हो गई। परिणाम यह हुआ कि सूर्या ने 2015 में अचानक मुंबई की कप्तानी छोड़ दी। अब सूर्यकुमार यादव का दिल क्रिकेट ने तोड़ दिया था और वह इससे दूर जाने की सोचने लगे थे। तभी 2016 में सूर्या की शादी हुई और पत्नी देविशा ने सूर्या को पॉजिटिव रहते हुए खेल पर ध्यान लगाने को कहा। भारत में मान्यता है कि मां-बाप के कदमों में जन्नत होती है। जो अपने मां-बाप का सगा नहीं हुआ, वह दुनिया में किसी का नहीं हो सकता। खुद का भी नहीं.. ! सूर्या की मां सपना यादव हाउसवाइफ हैं और पिता अशोक यादव भाभा रिसर्च सेंटर में इंजीनियर। सूर्या अपनी मां से बेपनाह मोहब्बत करते हैं। चाहे कैसे भी हालात हों, हर मैच से ठीक पहले वह अपनी मां को फोन करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। फिर जब मैच खत्म हो जाता है, तो सूर्या एक बार दोबारा मां को फोन करते हैं और मैदान की सारी बातें बताते हैं। कुछ वैसे ही जैसे छोटा बच्चा स्कूल जाता है और लौटकर क्लास से जुड़ा हर घटनाक्रम अपनी मां को बताता है। फिर आंचल में सर रखकर गहरी नींद सो जाता है। सूर्या के पिता इंजीनियर हैं और वह मुंबई में भाभा रिसर्च सेंटर की कॉलोनी में रहते हैं। वहां ज्यादातर बच्चे साइंटिस्ट और इंजीनियर बन गए। जब सूर्या ने शिद्दत से क्रिकेटर बनने का निश्चय कर लिया तो आसपास के लोग मां-बाप को बहुत ताने देते थे। बड़ा होकर सचिन तेंदुलकर बना दीजिएगा क्या? क्यों सूर्यकुमार यादव का करियर बर्बाद करने पर तुले हैं? पढ़ाई लिखाई करवाइए जिंदगी बना लेगा, नहीं तो उम्र भर दर-दर भटकता ही रहेगा। बीसीसीआई की मेहरबानी रही कि 31 साल की उम्र तक सूर्या के परिवार वालों को जमाने की जली-कटी बातें सुननी पड़ीं। सूर्या तब अपने मां-बाप की आंखों में आंसू देख कर बहुत दुखी होते थे लेकिन कुछ बोल नहीं पाते थे। मार्च 2021 में डेब्यू के बाद टीम में जगह पक्की करने के 1 साल के भीतर दुनिया का नंबर वन टी-20 इंटरनेशनल बल्लेबाज। एक कैलेंडर ईयर में इस साल 1,000 से ज्यादा टी-20 इंटरनेशनल रन बनाने वाला पहला बल्लेबाज। भारत के लिए 40 टी-20 मुकाबलों में 179 की स्ट्राइक रेट से 1284 रन। इस T-20 वर्ल्ड कप में 6 मुकाबलों में 60 की औसत से 239 रन। वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा 190 का स्ट्राइक रेट....! यह सब जवाब है उन लोगों के लिए, जो निराशा के दौर में सूर्यकुमार यादव के परिवार पर कीचड़ उछालते थे। अगर आपके आसपास कोई सूर्यकुमार यादव शिद्दत से मेहनत कर रहा है, तो उसका साथ दीजिए। उसे नीचा मत दिखाइए। ऐसे लोग जब जवाब देने पर आते हैं तो मुंह छिपाने के लिए जगह नसीब नहीं होती। यूं ही लगातार मचाएगा अपने बल्ले से जमकर तांडवभारत को तमाम मुकाबले जिताएगा सूर्यकुमार यादव ❤️#सतीस्वी #एसएसजेपीएचएमसी #सतीशशंकरजायसवालभावीप्रधानमंत्री

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सूर्यकुमार यादव...T-20 इंटरनेशनल का नंबर वन बल्लेबाज। आज उनकी जिंदगी की दर्द भरी कहानी  पढ़िए। वह खिलाड़ी जो अगर 10 साल पहले टीम इंडिया में चुन लिया गया होता तो शायद हम आईसीसी टूर्नामेंट्स में इतनी बुरी तरह नहीं हारते। युवराज सिंह के बाद नंबर 4 पर अगर कोई खिलाड़ी मैच बदलने की क्षमता रखता है, तो वह है सूर्यकुमार यादव। पर क्या उनकी जिंदगी में सब कुछ इतना आसान रहा है? उनके परिवार ने सूर्या की खातिर क्या कुछ नहीं सहा है!  12 साल पहले 20 वर्ष की उम्र में 2010 में रणजी क्रिकेट में डेब्यू के बाद रोहित शर्मा के साथ 73 रनों की मैच विनिंग पारी और मैन ऑफ द मैच का खिताब। 2011-12 के सत्र में मुंबई की तरफ से ताबड़तोड़ 754 रन। फिर लगातार घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में जलवा लेकिन टीम इंडिया में सिलेक्शन नहीं। जिस 31 साल की उम्र में बेन स्टोक्स ने वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया, उस एज में जाकर हमारे सूर्या को बीसीसीआई ने टीम इंडिया में खेलने का मौका दिया।  जब मुंबई के तमाम दिग्गज खिलाड़ियों को रणजी प्रदर्शन के आधार पर टीम इंडिया में चुन लिया गया तो मजबूरी में सूर्या को मुंबई का रणजी कप्तान ...

यें है 15 ऐसे महत्वपूर्ण कानून और कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को जानने चाहिए अति आवश्यक हैं।01. पुलिस अधिकारी आपकी FIR लिखने से मना नही कर सकते, ऐसा करने पर उन्हें 6 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है|~ भारतीय दंड संहिता, 166A02. कोई भी होटल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों न हो, आपको फ्री में पानी पीने और वाशरूम का इस्तेमाल करने से नही रोक सकता है |~ भारतीय सरिउस अधिनियम 188703. कोई भी शादीशुदा व्यक्ति किसी अविवाहित लड़की या विधवा महिला से उसकी सहमती से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है तो यह अपराध की श्रेणी में नही आता है |~ भारतीय दंड संहिता व्यभिचार, धारा 49804. ड्राइविंग के समय यदि आपके 100ml ब्लड में अल्कोहल का लेवल 30mg से ज्यादा मिलता है तो पुलिस बिना वारंट आपको गिरफ्तार कर सकती है |~ मोटर वाहन एक्ट, 1988, सेक्शन -185,20205. किसी भी महिला को शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले गिरफ्तार नही किया जा सकता है |~ आपराधिक प्रक्रिया संहिता, सेक्शन 4606. यदि दो वयस्क लड़का या लड़की अपनी मर्जी से लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाहते हैं तो यह गैर कानूनी नही है | और तो और इन दोनों से पैदा होने वाली संतान भी गैर कानूनी नही है और संतान को अपने पिता की संपत्ति में हक़ भी मिलेगा |~ घरेलू हिंसा अधिनियम, 200507. एक पुलिस अधिकारी हमेशा ही ड्यूटी पर होता है चाहे उसने यूनिफार्म पहनी हो या नही | यदि कोई व्यक्ति इस अधिकारी से कोई शिकायत करता है तो वह यह नही कह सकता कि वह पीड़ित की मदद नही कर सकता क्योंकि वह ड्यूटी पर नही है |~ इंडियन पुलिस एक्ट, 186108. कोई भी कंपनी गर्भवती महिला को नौकरी से नहीं निकाल सकती, ऐसा करने पर अधिकतम 3 साल तक की सजा हो सकती है|~ मातृत्व लाभ अधिनियम, 196109. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 में वाहन चालकों को हेलमेट लगाने का प्रावधान है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 128 में बाइक पर दो व्यक्तियों का बैठने का प्रावधान है। लेकिन ट्रैफिक पुलिस के द्वारा गाड़ी या मोटरसाइकिल से चाबी निकालना बिलकुल ही गैर कानूनी है इसके लिए आप चाहें तो उस कांस्टेबल/अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी कर सकते हैं |~ मोटर वाहन अधिनियम10. टैक्स उल्लंघन के मामले में, कर वसूली अधिकारी को आपको गिरफ्तार करने का अधिकार है लेकिन गिरफ्तार करने से पहले उसे आपको नोटिस भेजना पड़ेगा । केवल टैक्स कमिश्नर यह फैसला करता है कि आपको कितनी देर तक हिरासत में रहना है |~ आयकर अधिनियम, 196111. केवल महिला पुलिसकर्मी ही महिलाओं को गिरफ्तार कर थाने ला सकती है| पुरुष पुलिसकर्मियों को महिलाओं को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है| इतना ही नहीं महिलाएं शाम के 6 बजे से सुबह के 6 बजे के बीच पुलिस स्टेशन जाने से मना कर सकती हैं। एक गंभीर अपराध के मामले में मजिस्ट्रेट से लिखित आदेश प्राप्त होने पर ही एक पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला को गिरफ्तार कर सकता है।~ दंड प्रक्रिया संहिता,197312. यदि आप किसी कंपनी से किसी त्यौहार के मौके पर कोई गिफ्ट लेते हैं तो यह रिश्वत की श्रेणी में आता है | इस जुर्म के लिए आपको सजा भी हो सकती है |~ विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) 201013. कोई भी दुकानदार किसी उत्पाद के लिए उस पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक रुपये नही मांग सकता है परन्तु उपभोक्ता, अधिकतम खुदरा मूल्य से कम पर उत्पाद खरीदने के लिए दुकानदार से भाव तौल कर सकता है |~ अधिकतम खुदरा मूल्य अधिनियम, 201414. यदि आपका ऑफिस आपको सैलरी नही देता है तो आप उसके खिलाफ 3 साल के अन्दर कभी भी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं | लेकिन यदि आप 3 साल के बाद रिपोर्ट करते हैं तो आपको कुछ भी हासिल नही होगा|~ परिसीमा अधिनियम, 196315. यदि आप सार्वजनिक जगहों पर "अश्लील गतिविधि" में संलिप्त पाये जाते हैं तो आपको 3 महीने तक की कैद भी हो सकती है| परन्तु "अश्लील गतिविधि" की कोई स्पष्ट परिभाषा नही होने के कारण पुलिस इस कानून का दुरूपयोग करती है |~ भारतीय दंड संहिता की धारा 294(नोट: संविधान एवं कानून द्वारा प्राप्त अपने अधिकरों संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु आज ही राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति मुख्यालय के अधिकारिक सोशल मीडियाएकाउंट, और कुटुंब एप को फॉलो करें। धन्यवाद

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यें है 15 ऐसे महत्वपूर्ण कानून और कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को जानने चाहिए अति आवश्यक हैं। 01. पुलिस अधिकारी आपकी FIR लिखने से मना नही कर सकते, ऐसा करने पर उन्हें 6 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है| ~ भारतीय दंड संहिता, 166A 02. कोई भी होटल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों न हो, आपको फ्री में पानी पीने और वाशरूम का इस्तेमाल करने से नही रोक सकता है | ~ भारतीय सरिउस अधिनियम 1887 03. कोई भी शादीशुदा व्यक्ति किसी अविवाहित लड़की या विधवा महिला से उसकी सहमती से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है तो यह अपराध की श्रेणी में नही आता है | ~ भारतीय दंड संहिता व्यभिचार, धारा 498 04. ड्राइविंग के समय यदि आपके 100ml ब्लड में अल्कोहल का लेवल 30mg से ज्यादा मिलता है तो पुलिस बिना वारंट आपको गिरफ्तार कर सकती है | ~ मोटर वाहन एक्ट, 1988, सेक्शन -185,202 05. किसी भी महिला को शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले गिरफ्तार नही किया जा सकता है | ~ आपराधिक प्रक्रिया संहिता, सेक्शन 46 06. यदि दो वयस्क लड़का या लड़की अपनी मर्जी से लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाहते हैं तो यह गैर कानूनी नही है | और तो और इन दोनों से पैदा होने व...

लखनऊ-उत्तर प्रदेश में 37 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज कीकन्नौज से अखिलेश यादव 170922 वोटों से जीतेमैनपुरी से डिंपल यादव 221639 वोट से जीतींआजमगढ़ से धर्मेंद्र यादव 161035 वोटों से जीतेगाजीपुर से अफजाल अंसारी 124861 वोटों से जीतेकैराना से इकरा हसन 69116 वोटों से जीतींमुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक 24672 वोटों से जीतेरामपुर से मुहिबुल्ला 87434 वोटों से जीतेमुरादाबाद से रुचिवीरा 105762 वोटों से जीतींसंभल से जियाउर्रहमान बर्क 121494 वोट से जीतेफिरोजाबाद से अक्षय यादव 89312 वोट से जीतेआंवला से नीरज मौर्य 15969 वोटों से जीतेखीरी से उत्कर्ष वर्मा 34329 वोटों से जीतेबदायूं से आदित्य यादव 34991 वोटों से जीतेधौरहरा से आनंद भदौरिया 4449 वोटों से जीतेमोहनलालगंज से आरके चौधरी 70292 वोट से जीतेसुल्तानपुर से रामभुआल निषाद 43174 वोट से जीतेप्रतापगढ़ से शिवपाल सिंह पटेल 66206 वोट से जीते इटावा से जितेंद्र कुमार दोहरे 58419 वोट से जीतेजालौन से नारायण अहिरवार 53898 वोट से जीतेबांदा से कृष्णा पटेल 71210 वोटों से जीतींफतेहपुर से नरेश उत्तम पटेल 33199 वोटों से जीतेकौशांबी से पुष्पेंद्र सरोज 103944 वोटों से जीतेबस्ती से राम प्रसाद चौधरी 100993 वोट से जीतेफैजाबाद से अवधेश प्रसाद 54567 वोट से जीतेअंबेडकरनगर से लालजी वर्मा 137247 वोट से जीतेश्रावस्ती से रामशिरोमणि वर्मा 76673 वोट से जीतेलालगंज से दारोगा प्रसाद सरोज 115023 वोट से जीतेसंतकबीरनगर से पप्पू निषाद 92170 वोट से जीतेघोसी लोकसभा से राजीव राय 162943 वोट से जीतेबलिया से सनातन पांडेय 43384 वोटों से जीतेजौनपुर से बाबूसिंह कुशवाहा 99335 वोटों से जीतेमछलीशहर से प्रिया सरोज 35850 वोटों से जीतींचंदौली से चौधरी बिरेंद्र सिंह 21565 वोटों से जीतेरॉबर्ट्सगंज से छोटे लाल 129234 वोटों से जीतेएटा लोकसभा से देवेश शाक्य 28052 वोटों से जीतेसलेमपुर से रमाशंकर राजभर 3573 वोटों से जीते!@highlightSamajwadi PartyCongress PartyAkhilesh YadavRahul Gandhi CongressAnees Rajaमुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड-उत्तर प्रदेशमुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेडश्याम लाल पालSyed Iftekhar HusainBrijendra Singh#samajwadipartyallahabad

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लखनऊ-उत्तर प्रदेश में 37 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की कन्नौज से अखिलेश यादव 170922 वोटों से जीते मैनपुरी से डिंपल यादव 221639 वोट से जीतीं आजमगढ़ से धर्मेंद्र यादव 161035 वोटों से जीते गाजीपुर से अफजाल अंसारी 124861 वोटों से जीते कैराना से इकरा हसन 69116 वोटों से जीतीं मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक 24672 वोटों से जीते रामपुर से मुहिबुल्ला 87434 वोटों से जीते मुरादाबाद से रुचिवीरा 105762 वोटों से जीतीं संभल से जियाउर्रहमान बर्क 121494 वोट से जीते फिरोजाबाद से अक्षय यादव 89312 वोट से जीते आंवला से नीरज मौर्य 15969 वोटों से जीते खीरी से उत्कर्ष वर्मा 34329 वोटों से जीते बदायूं से आदित्य यादव 34991 वोटों से जीते धौरहरा से आनंद भदौरिया 4449 वोटों से जीते मोहनलालगंज से आरके चौधरी 70292 वोट से जीते सुल्तानपुर से रामभुआल निषाद 43174 वोट से जीते प्रतापगढ़ से शिवपाल सिंह पटेल 66206 वोट से जीते  इटावा से जितेंद्र कुमार दोहरे 58419 वोट से जीते जालौन से नारायण अहिरवार 53898 वोट से जीते बांदा से कृष्णा पटेल 71210 वोटों से जीतीं फतेहपुर से नरेश उत्तम पटेल 33199 वोटों से जीते कौशांबी से पुष्पेंद्र सरो...

mayank yadav .....156.8 km ph speeding man

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21 वर्षीय रफ्तार के सौदागर मयंक यादव को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए चुना जाना था, लेकिन हैमस्ट्रिंग की चोट की वजह से यह मौका हाथ से चला गया। मयंक यादव ने दिल्ली सर्किट में अपनी बाउंसर से कई बल्लेबाजों को घायल किया है। मयंक यादव ने IPL के मंच पर धमाकेदार शुरुआत करते हुए अपनी तूफानी गति से क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। लखनऊ सुपर जाइंट्स के लिए अपना पहला मैच खेल रहे 21 वर्षीय खिलाड़ी ने 155.8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर दर्शकों को चौंका दिया। 24 में से 9 की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी। उन्होंने जॉनी बेयरस्टो, जितेश शर्मा और प्रभसिमरन सिंह के विकेट लिए। जैसे ही मयंक को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया, डेल स्टेन और ब्रेट ली जैसे जाने-माने क्रिकेट दिग्गज सोशल मीडिया पर उनकी प्रचंड गति की सराहना करते हुए प्रशंसा के स्वर में शामिल हो गए। मयंक दिल्ली के पंजाबी बाग के रहने वाले हैं और प्रतिष्ठित सॉनेट क्लब में ट्रेनिंग करते हैं। मयंक यादव के IPL डेब्यू पर कई लोगों को यह पता चला था कि वह पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली के क्रिकेट सर्किट के प्रशंसकों के बीच ए...