Remember Kanpur। 1857 क्रांति का वो योद्धा जिसने गंगा घाट लाल कर दिया अंग्रेजो के खून से।नाम सुबेरदार- बोधू सिंह अहीरजन्म -1793जन्म स्थान- गांव देवस्लाह, तहसील महमूदाबाद,जिला फर्रुखाबादमृत्यु -1860(फांसी)योगदान- पूर्वांचल में अंग्रेजो के खिलाफ 3 जून 1857 को आजमगढ़ में सूबेदार बोधू सिंह अहीर के नेतृत्व में पहली बार बिगुल फूंका गया। और ये बगावत पूर्वांचल की सबसे बड़ी बगावत थी।आरोप- 17वी नेटिव इन्फेंट्री रेजिमेंट में बगावत करवाई, इनके आदेश पर दामाद माधो सिंह ने अंग्रेज अफसर लेविस, हचिसन व 22वीं के कर्नल को गोली मारी। बोधू सिंह ने आजमगढ़ में लगभग आठ लाख का खजाना लूटा, जेल में कैद लगभग 800 भारतीय कैदियों को आजाद किया, बागी सेना का नेतृत्व किया और कानपुर के ऐतिहासिक सत्तीचौरा घाट के हत्याकाण्ड में शामिल रहे। घर परिवार उनके इस विद्रोह में इनके 2 सगे भाई किशन प्रसाद और शिवप्रसाद, बेटा रामटहल और दामाद माधो सिंह भी इस बगावत में शामिल थे। सबको फांसी पे लटका दिया गया। आजादी की लड़ाई में पूरे देश में शायद ये इकलौता उधारण है जिसमे घर के सारे मर्द सशस्त्र बगवात में शामिल रहे और देश के लिए फांसी पे चढ़ गए।#क्रांतिकारी_सूबेदार_भोदू_सिंह_अहीर
Remember Kanpur। 1857 क्रांति का वो योद्धा जिसने गंगा घाट लाल कर दिया अंग्रेजो के खून से। नाम सुबेरदार- बोधू सिंह अहीर जन्म -1793 जन्म स्थान- गांव देवस्लाह, तहसील महमूदाबाद,जिला फर्रुखाबाद मृत्यु -1860(फांसी) योगदान- पूर्वांचल में अंग्रेजो के खिलाफ 3 जून 1857 को आजमगढ़ में सूबेदार बोधू सिंह अहीर के नेतृत्व में पहली बार बिगुल फूंका गया। और ये बगावत पूर्वांचल की सबसे बड़ी बगावत थी। आरोप- 17वी नेटिव इन्फेंट्री रेजिमेंट में बगावत करवाई, इनके आदेश पर दामाद माधो सिंह ने अंग्रेज अफसर लेविस, हचिसन व 22वीं के कर्नल को गोली मारी। बोधू सिंह ने आजमगढ़ में लगभग आठ लाख का खजाना लूटा, जेल में कैद लगभग 800 भारतीय कैदियों को आजाद किया, बागी सेना का नेतृत्व किया और कानपुर के ऐतिहासिक सत्तीचौरा घाट के हत्याकाण्ड में शामिल रहे। घर परिवार उनके इस विद्रोह में इनके 2 सगे भाई किशन प्रसाद और शिवप्रसाद, बेटा रामटहल और दामाद माधो सिंह भी इस बगावत में शामिल थे। सबको फांसी पे लटका दिया गया। आजादी की लड़ाई में पूरे देश में शायद ये इकलौता उधारण है जिसमे घर के सारे मर्द सशस्त्र बगवात में शामिल ...