‘मज़दूर दिवस’ पर पढ़िए केदारनाथ अग्रवाल की रचना—जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ हैतूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ हैजिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा हैजो रवि के रथ का घोड़ा हैवह जन मारे नहीं मरेगानहीं मरेगाजो जीवन की आग जला कर आग बना हैफ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना हैजिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा हैजो युग के रथ का घोड़ा हैवह जन मारे नहीं मरेगानहीं मरेगा."श्रम ही सम्मान है।आज अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर हम उन सभी मेहनतकश हाथों को सलाम करते हैं, जिनके पसीने से दुनिया चलती है।#मजदूर_दिवस #LabourDayAkhilesh Yadav Samajwadi Party Vineet Kushwaha
‘मज़दूर दिवस’ पर पढ़िए केदारनाथ अग्रवाल की रचना—
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है
तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है
जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है
जो रवि के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा
जो जीवन की आग जला कर आग बना है
फ़ौलादी पंजे फैलाए नाग बना है
जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है
जो युग के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा.
"श्रम ही सम्मान है।
आज अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर हम उन सभी मेहनतकश हाथों को सलाम करते हैं, जिनके पसीने से दुनिया चलती है।
#मजदूर_दिवस #LabourDay
Akhilesh Yadav
Samajwadi Party
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