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Showing posts from September, 2023

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में,यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी हैभाजपा अध्यक्ष मणिपुर हालातो से डरी हुई है#मणिपुर_मे_शांति_बहाल_करो

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लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है भाजपा अध्यक्ष मणिपुर हालातो से डरी हुई है #मणिपुर_मे_शांति_बहाल_करो

ठाकुरों के पास क्या बचा? तालाब, कुआँ, गाँव और खेत।

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ठाकुरों के पास क्या बचा?  तालाब, कुआँ, गाँव और खेत।  - ठाकुर लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट के जज नहीं बने। कोलिजियम ठाकुर जज नहीं बनाता।  - सबसे बड़े 20 बिज़नेसमैन में कोई ठाकुर नहीं हैं।  - कोई भी बड़ा फ़िल्मकार ठाकुर नहीं है।  - ठाकुर स्वामित्व वाला कोई टीवी चैनल नहीं है - आर्मी चीफ़ भी ठाकुर मुश्किल से बनते हैं। पिछले बीस की लिस्ट देख लीजिए।  - जवान अब अग्निवीर हो गए। पेंशन तक नहीं मिलनी।  - प्रधानमंत्री कार्यालय में ठाकुर नहीं है।  - कला क्षेत्र और एकेडमिक्स में उनका कोई बड़ा नाम नहीं है।  - भारत रत्न उनको मिलता नहीं। - यूपीएससी के मेंबर ठाकुर नहीं बनते।  तो उनके पास बचा क्या। आधुनिक पावर सेंटर में वे कहाँ हैं? कितने हैं?  टूटती हवेलियाँ, जिनमें ज़्यादातर होटल बन गई हैं। और ये यादें कि महाराणा प्रताप का भाला कितने किलो का था!  ये उस दौर में जब देश की कुल जीडीपी में खेती का योगदान 16 परसेंट रह गया है। वह भी तब जब उसमें पशुपालन और मछली पालन को जोड़ दिया जाए।  गाँव लेकर करोगे क्या? जो गाँव से निकल गए, उन्हीं के पास समृद्धि है...

भगवा तो ये भी पहनते थेसंन्यासी भी थेचंदा भी मांगते थेलेकिन अपने एशो-आराम के लिए नहीं, स्कूल चलाने के लिए !

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भगवा तो ये भी पहनते थे संन्यासी भी थे चंदा भी मांगते थे लेकिन अपने एशो-आराम के लिए नहीं, स्कूल चलाने के लिए ! इनका नाम था स्वामी केशवानंद ! जिन्होंने स्वतंत्रतापूर्व जिला श्रीगंगानगर, बठिण्डा और जिला बहावलपुर में ५८ गांवों में स्कूलें खड़ी की। संगरिया स्कूल आज ख्यातनाम डीम्ड युनिवर्सिटी है और उसी गुरूकुल पद्धति पर नाममात्र फीस पर क्वालिटी एजुकेशन के साथ संचालित है। स्वामीजी का केशव वाटिका में बिल्कुल साधारण रहन सहन था 1952 से 1964 तक 12 साल तक सांसद भी रहे थे... एक बार हरिद्वार से कुछ पंडित संगरिया आए, स्वामी जी की ख्याती सुन केशव वाटिका गये, बातों बातों में उन्होंने वहां भागवत करने की इच्छा जताई। स्वामी जी ने हंसते हुए कहा "आप जो समझ रहे हो मैं वो साधु नहीं हुंँ, मेरा धर्म तो ये है कि सुबह उठते ही सोचता हूं आज कितने लोगों को विद्यालय से जोड़ना है और इसके लिए क्या प्रयत्न करना होगा ? यही मेरा कर्म है और यही मेरा ईश्वर है। क्षमा करना ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों में मेरी रूची नहीं है" ऐसे महापुरुष धरती पर विरले ही आते हैं । वरना वर्तमान में एक साल कोई सांसद रह ले या भगवा धारण कर ले...

एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीयअरबपति रतनजी टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा:"सर आपको क्या याद है कि आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली"?

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👉 एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय अरबपति रतनजी टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा: "सर आपको क्या याद है कि आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली"? 👉रतनजी टाटा ने कहा: "मैं जीवन में खुशी के चार चरणों से गुजरा हूं, और आखिरकार मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।" पहला चरण धन और साधन संचय करना था। लेकिन इस स्तर पर मुझे वह सुख नहीं मिला जो मैं चाहता था। ,👉फिर क़ीमती सामान और वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण आया। लेकिन मैंने महसूस किया कि इस चीज का असर भी अस्थायी होता है और कीमती चीजों की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती। फिर आया बड़ा प्रोजेक्ट मिलने का तीसरा चरण। वह तब था जब भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% मेरे पास था। मैं भारत और एशिया में सबसे बड़ा इस्पात कारखाने मालिक भी था। लेकिन यहां भी मुझे वो खुशी नहीं मिली जिसकी मैंने कल्पना की थी. 👉चौथा चरण वह समय था जब मेरे एक मित्र ने मुझे कुछ विकलांग बच्चों के लिए व्हील चेयर खरीदने के लिए कहा। लगभग 200 बच्चे थे। दोस्त के कहने पर मैंने तुरन्त व्हील चेयर खरीद लीं। लेकिन दोस्त ने जिद की कि मैं उसके साथ जाऊं और बच्चों...