"आंकड़े गवाह हैं—हिस्सेदारी के नाम पर हमें सिर्फ हाशिए पर रखा गया है! 📊⚖️​साथियों, आज जब हम देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा यानी IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) की बात करते हैं, तो अक्सर 'योग्यता' और 'समानता' की दुहाई दी जाती है। लेकिन क्या धरातल पर वाकई सबको समान अवसर मिल रहे हैं?​भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय (DoPT) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े हमारे समाज की वास्तविक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलते हैं। देश को चलाने वाले कुल तैनात IAS अधिकारियों की संख्या पर गौर कीजिए:​✅ सामान्य वर्ग (General): लगभग 4,621 अधिकारी❌ ओबीसी (OBC): मात्र 447 अधिकारी❌ अनुसूचित जाति (SC): मात्र 332 अधिकारी❌ अनुसूचित जनजाति (ST): मात्र 176 अधिकारी​जब देश की 85% बहुजन आबादी (OBC+SC+ST) का कुल प्रतिनिधित्व प्रशासन की सबसे ऊंची कुर्सियों पर मात्र 17-18% के करीब सिमट कर रह जाए, तो क्या हम इसे एक न्यायपूर्ण व्यवस्था कह सकते हैं?​यह केवल पदों की संख्या नहीं है, बल्कि यह सवाल है उन करोड़ों लोगों की आवाज़ का, जिनकी सुनवाई इन दफ्तरों में होनी चाहिए। क्या 85% समाज में टैलेंट की कमी है? या फिर 'मेरिट' के नाम पर एक खास वर्ग का एकाधिकार आज भी बरकरार है? ✊✊​यह लड़ाई किसी जाति या वर्ग के विरोध में नहीं है, यह लड़ाई 'संवैधानिक न्याय' और 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत की है। जब तक हर समाज का व्यक्ति शासन-प्रशासन के निर्णय लेने वाले पदों पर नहीं बैठेगा, तब तक लोकतंत्र की परिभाषा अधूरी है।​जागिए, इन आंकड़ों को गहराई से समझिए और अपने संवैधानिक हक के लिए तर्कसंगत आवाज़ उठाइए।​(आंकड़े स्रोत: भारत सरकार, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट)​#anjalilodhijhansi #SocialJustice #RepresentationMatters #IAS_Stats #OBC #SC #ST #ConstitutionalRights #Equality #BahujanAwaaz #GovernanceData"

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My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)