आरक्षण काग़ज़ पर है, ज़मीन पर नहींNEET (मेडिकल) में:OBC को 27% आरक्षण संविधान से मिला हैलेकिन 2017 के बाद ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में इसे ठीक से लागू नहीं किया गयानतीजा:👉 OBC की सीटें General को चली गईं👉 गरीब-पिछड़ा छात्र बाहर रह गयायह “योग्यता” का सवाल नहीं, नियम तोड़ने का मामला है।2️⃣ सिस्टम जनरल-फ्रेंडली बना दिया गयासरकारें अक्सर कहती हैं:“मेरिट पर सब होगा”लेकिन सच ये है:मेरिट बराबर मैदान में होती हैजब:किसी के पास कोचिंग, पैसा, अंग्रेज़ी, नेटवर्क होऔर किसी के पास नहींतो एक ही परीक्षा बराबरी की नहीं रहती👉 यही वजह है कि आरक्षण संतुलन के लिए था, एहसान के लिए नहीं।3️⃣ OBC = सबसे बड़ा वोट, सबसे कम सुरक्षाएक कड़वी सच्चाई:SC/ST के मुद्दे पर तुरंत हंगामा होता हैGeneral वर्ग का मीडिया में दबदबा हैOBC बीच में पिस जाता हैराजनीति में:OBC का नाम लिया जाता हैलेकिन नीतियों में अनदेखी होती है4️⃣ मीडिया और सोशल मीडिया का खेलअगर General की 100 सीटें जाएँ → BREAKING NEWSअगर OBC की 11,000 सीटें जाएँ → छोटा “Quick News”👉 इससे जनता को लगता है “सब ठीक है”, जबकि घपला चलता रहता है5️⃣ जातिवाद क्यों ज़िंदा है?क्योंकि:जाति का फायदा जिनको मिल रहा है, वे खत्म नहीं होने देंगेऔर जिन्हें नुकसान हो रहा है, उन्हें:“रोना बंद करो”“आरक्षण छोड़ो”“मेहनत करो” कहकर चुप करा दिया जाता हैअसली सवाल यह नहीं कि❌ आरक्षण क्यों है✅ सवाल यह है कि जो आरक्षण है, वो लागू क्यों नहीं हो रहा?एक लाइन में सच:जातिवाद इसलिए है क्योंकि सत्ता और सिस्टम बराबरी नहीं चाहता, और घपला इसलिए है क्योंकि जवाबदेही नहीं है।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है