मुलायम सिंह यादव-

मुलायम सिंह यादव- 

1. जन्म- 22 नवंबर 1939
2. स्थान- सैफई, इटावा
3. शिक्षा- राजनीति शास्त्र से MA
4. 1967 में पहली बार विधायक बने, कुल 8 बार यूपी विधानसभा के सदस्य रहे.
5. 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 में विधायक बने
6. 1977 में सहकारी और पशुपालन मंत्री बने
7. 1980 में जनता दल यूपी के अध्यक्ष बने
8. 1982-85 MLC, नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद
9. 1985-87 नेता प्रतिपक्ष विधानसभा 
10. 1989-91 पहली बार दो साल के लिए मुख्यमंत्री बने
11. 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की 
12. 1993-95 दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री बने
13. 1996 में पहली बार लोकसभा के सदस्य बने
14. 1996-98 रक्षा मंत्री बने
15. 7 बार लोकसभा के सांसद
16. फ़िलहाल मैनपुरी से लोकसभा सांसद हैं मुलायम सिंह यादव
17. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव
18. 1993 में मुलायम सिंह यादव ने कांशीराम से हाथ मिलाया, पहली बार सपा और बसपा का गठबंधन हुआ, सपा-बसपा की सरकार बनी
19. तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं 
20. मूल रूप से एक शिक्षक थे, डॉ लोहिया और चौधरी चरण सिंह के विचारों से प्रभावित हो राजनीति में आए
21. 1965 में करहल के जैन इंटर कॉलेज में नौकरी की
22. 1967 में साइकिल से अपना चुनाव प्रचार शुरू किया
23. मुलायम सिंह के राजनीतिक गुरू नत्थू सिंह थे 
24. राजनीति में शून्य से शिखर की यात्रा 
25. धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव
26. नेताजी 
27. जिसका जलवा क़ायम है, उसका नाम मुलायम है 
28. मिलनसार, यारों के यार, अपनापन, छोटे-बड़े सभी को सम्मान 
29. दिल खोलकर किसी की तारीफ़ करना
30. पक्ष और विपक्ष दोनों को सम्मान 
31. अपने से ज़्यादा परायों का काम 
32. फूलन देवी को सांसद बनाया
33. परमाणु समझौते के मुद्दे पर लेफ़्ट का साथ छोड़ कांग्रेस की सरकार बचाई 
34. कुश्ती, पहलवानी 
35. कन्या विद्याधन, बेरोज़गारी भत्ता, पढ़ाई दवाई और सिंचाई मुफ़्त
36. 15 जुलाई 1966 का के डॉ लोहिया ने बंद का आह्वान किया था, जिसे मुलायम सिंह ने सफल बनाया था, लाठीचार्ज भी हुआ था. मुलायम सिंह के जीवन का यह एक टर्निंग प्वाइंट था 
37. 1966 में मुलायम सिंह यादव और डॉ लोहिया की पहली मुलाक़ात इटावा में हुई 
38. 1967 में जब मुलायम सिंह यादव पहली बार विधानसभा पहुँचे तो लोग उन्हें बधाई दे रहे थे  मुलायम जी के ऊपर उसी दौरान हमला हो गया ।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है