यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है 
तो वह यह नहीं कहता कि मेरी जाति भ्रष्ट हो गई

वह कहता है मेरा धर्म भ्रष्ट हो गया

इसका अर्थ है जाति ही धर्म है

या फिर आपके धर्म का मतलब ही जाति है

चूंकि जाति में किसी को शामिल नहीं किया जा सकता

इसका मतलब है आपके धर्म में भी कोई शामिल नहीं हो सकता

कोई मुसलमान बनना चाहे वह बन सकता है 
कोई ईसाई बनना चाहे वह बन सकता है 
कोई सिक्ख बनना चाहे वह बन सकता है

लेकिन कोई हिंदू बनना चाहे तो वह नहीं बन सकता

क्योंकि कोई भी हिंदू बिना जाति का नहीं हो सकता

हर हिंदू की एक जाति होना जरूरी है

क्योंकि आपकी जाति में कोई शामिल नहीं हो सकता इसलिए आपके धर्म में भी कोई शामिल नहीं हो सकता

जिस धर्म में कोई शामिल नहीं हो सकता उसका संकट में पड़ना बिल्कुल सुनिश्चित है

भारत में क्योंकि विभिन्न जातियां साथ साथ रहती हैं इसलिए उनके बीच प्रेम वगैरह होना सामान्य बात है

लेकिन इन अलग-अलग जातियों के बीच प्रेम होने का अर्थ है आपका धर्म भ्रष्ट हो जाना 

इसलिए भारत में स्त्री का प्रेम करना धर्म विरुद्ध माना गया है

क्योंकि स्त्री अपनी मर्जी से दूसरी जाति के पुरुष से विवाह करेगी तो धर्म बिगड़ जाएगा

आप ध्यान दीजिए आपने संकट खुद ही खड़ा किया है

और आप सोचते हैं आप का संकट दूसरे धर्म वाले हैं

कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति आपके धर्म के लिए संकट नहीं है

आप खुद ही अपने धर्म के लिए संकट हैं।

साभार- हिमांशु कुमार जी

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