दिलों का ज़िक्र ही क्या है मिलें मिलें न मिलेंनज़र मिलाओ नज़र से नज़र की बात करो--सूफ़ी तबस्सुम
देखे हैं बहुत हम ने हंगामें मोहब्बत के
आग़ाज़ भी रुस्वाई अंजाम भी रुस्वाई
--सूफ़ी तबस्सुम
सामाजिक न्याय की लड़ाई में और समाज को संगठित करने में जो भी हमारी भूमिका और हमारा प्रयास हो सकेगा और गरीबों को विधिक सहायता और जो भी सहायता हो सके कि हम अपने पूरे सामर्थ्य और कर्तव्य निष्ठा के साथ करते रहेंगे और इसमें सभी जुड़ने वाले आने वाले सभी एडवोकेट और अन्य लोगों का स्वागत और अभिनंदन है धन्यवाद
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