चैन मिलता नहीं है ना दिन रैन में,तुम हो उलझे कहां लेन देन में,हमरे जीवन की उखड़ी पड़ी पटरियां,आग लगि जाए तुम्हरी बुलेट ट्रेन में।
चैन मिलता नहीं है ना दिन रैन में,
तुम हो उलझे कहां लेन देन में,
हमरे जीवन की उखड़ी पड़ी पटरियां,
आग लगि जाए तुम्हरी बुलेट ट्रेन में।
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