#काला_अक्षर_भैंस_बराबर , आइये आपकी भैस से ही आपको सामंतवाद, पूँजीवाद, ब्राह्मणवाद, मार्क्सवाद, लोकतंत्र, प्रजातंत्र, जैसे कठिन शब्दों का मतलब समझाएं.........
#काला_अक्षर_भैंस_बराबर , आइये आपकी भैस से ही आपको सामंतवाद, पूँजीवाद, ब्राह्मणवाद, मार्क्सवाद, लोकतंत्र, प्रजातंत्र, जैसे कठिन शब्दों का मतलब समझाएं.........
#पूंजीवाद_क्या_है? – पूंजीवादी वो है लठैत/बल लेकर आये और आपकी भैंस का दूहा दूध आपसे छीन ले जाए !
पूंजीवाद का चरम ‘पूँजी’ के एकाधिकार और संकेंद्रीकरण में हैं – पहले घरेलू उद्योग उजाड़ दो, फिर छोटे उद्योग, कल-कारखाने हड़प लो, फिर मंझोले उद्योग चौपट करो और धीरे-धीरे केवल बड़े पूंजीपति रह जाएँ या केवल एक रह जाय सारी पूंजी और संपत्ति का मालिक – एक ही बड़ी मछली बचे, सारी छोटी मछलियों को खाकर … अपने आस-पास देखिये क्या ऐसा नहीं हो रहा है? – क्या छोटी-छोटी दुकानें धीरे-धीरे बंद नहीं हो रही हैं, छोटी-छोटी फैक्टरियां, घरेलू-उद्योग? …. क्या किसान खेत-खलियान बेचकर मज़दूर नहीं बन रह हैं – खेती के उत्पादन अब उतने लाभप्रद नहीं रह गए हैं? खेती की ज़मीन बेचने में किसान ज्यादा बेहतरी समझते हैं? …. क्या आपके आस-पास मज़दूरों की संख्या नहीं बढ़ी है? मज़दूर-मंडी में सुबह मज़दूर खरीद लिए जाने के बाद भी क्या बड़ी तादाद में मज़दूर बच नहीं जाते जिनके लिए कोई काम नहीं रह जाता?
#ब्राह्मणवाद_क्या_है- अपने दिमाग में धर्म का ऐसा नशा भरे की आप खुद अपनी भैंस ब्राह्मण को दे आये और ब्राह्मण के पैर छु कर सदा आभारी रहे।
#मनुवाद_क्या_है – ऐसे विधान लिखे और पालन किये जाएँ जिससे राजा आपकी भैस छीन कर ब्राह्मण को दे दे और भैस रखने के लिए आपको कड़ी सजा दे।
#समाजवाद_क्या_है? – जब आपकी भैंस दूध न दे, तो पड़ोसी अपनी भैंस का आधा दूध आपको दे दे और जब पड़ोसी की भैंस दूध न दे, तब आप अपनी भैंस का आधा दूध उसे दे दें !
#साम्यवाद_क्या_है? – जब सारी भैंसे पूरे गांव की हों, सारा दूध पूरे गांव में बराबर बांटा जाए !
#जाती_या_वर्ग-#संघर्ष_क्या_है?- जब दबंग जाती वाले लाठी ले कर आएं और आपकी भैंस खोल ले जाएँ या जबरदस्ती भैंस दुह ले जाएँ या दूहा हुआ दूध छीन ले जाएँ और आप उनके विरोध में अपनी भैस को और दूध को बचाने के लिए लाठी उठा लें और मुक़ाबला करें तो यही संघर्ष वर्ग-संघर्ष है !
‘#बुर्ज़ुआ’#क्या_है? जब कोई आपकी सारी गाय-भैंसे-बकरियां, ज़मीन-जायदाद, कपडे-लत्ते, खेत-खलियान, घर-आँगन, सब छीन ले जाए और आप के पास पहनने को न लंगोटी हो और न भीख मांगने को कटोरा और ज़िंदा रहने के लिए आपको मज़दूरी करनी पड़े और मज़दूरी के बदले में केवल वह आदमी आपको उतना ही खाने के लिए दे कि आप ज़िंदा रहकर उसके बेगारी और मज़दूरी कर सकें, और वह खुद कुछ भी मेहनत-मज़दूरी न करे, आपके बल पर ऐश करे, आपकी सारी संपत्ति हड़प ले, आप को गुलाम और बिना पैसे का नौकर बना ले, तो वह बुर्ज़ुआ है !
#दक्षिण_पंथ_क्या_है? -१ अगर कोई आप पर धौंस जमाए और आपकी भैंस को अपनी भैंस बताये और उसे राजनैतिक या दबंगई से छीनने की कोशिश जारी रखे तो यह दक्षिण-पंथ है ! जिसके केंद्र में ईश्वर है, जो परलोक में विश्वास करता है, जो भेद-भाव में विश्वास करता है और पिछड़ेपन में विश्वास करता है और उसी के अनुरूप आचरण करता है ! ब्राह्मणवाद और दक्षिणपंथ भारत में काफी करीब है।
#वाम_पंथ_क्या_है: अगर कोई अपनी भैंस को अपनी माने और आपकी भैंस को आपकी भैंस माने तो यह वाम-पंथ है !
बुद्धवाद क्या है :- है जो मानववाद में विश्वास करता है, जिसके केंद्र में मनुष्य है, जो इहलोक में विश्वास करता है, जो समता-समानता और प्रगति में विश्वास करता है और उसी के अनुरूप आचरण करता है !
‘#क्रांति’ #क्या_है? :- जब आपकी सारी गाय-भैंसे-बकरियां, ज़मीन-जायदाद, कपडे-लत्ते, खेत-खलियान, घर-आँगन, सब छीन लिए जाएँ और आप के पास पहनने को न लंगोटी हो और न भीख मांगने को कटोरा, आपको मज़दूरी करनी पड़े और मज़दूरी के बदले में केवल उतना मिले कि आप ज़िंदा रहकर मज़दूरी कर सकें, …. और आप मज़दूरी करने से मना कर दें और सचमुच किसी की मज़दूरी न करें, और इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार हों और सब लोग मिलकर एक साथ ऐसा करें, तो यह ‘क्रांति’ है … ऐसे हालत में आपको भिखारी और मज़दूर बनानेवाला खुद-ब-खुद ख़त्म हो जाएगा क्योंकि उसकी ज़िन्दगी आपकी मज़दूरी से चलती है !
#मार्क्सवाद:- मजदूर को उसकी मजदूरी और हक़ दिलाने वाली विचारधारा है, ये दुनिया को मालिक और मजदूर दो भागों में देखती है ।विचार की मृत्यु नहीं होती, विचार कभी मरता नहीं, वह केवल अप्रांसगिक हो सकता है,मार्क्सवाद एक विचार है, अतः उसके मरने का सवाल ही नहीं उठता, और वह अप्रांसगिक भी नहीं हो सकता … क्योंकि उसका आधार विज्ञान है
…… यानि कि वह केवल तर्कों पर नहीं बल्कि तथ्य और प्रमाण पर आधारित है !!!
#जनता_क्या_है :- जनता भैंस है जो मूलनिवासी है और अपने हिसाब से चलना चाहती है पर धर्म और मीडिया द्वारा उनकी राजनैतिक वफ़ादारी तय की जाती है ….. पेट भर खाने को मिल जाए उसी में खुश हो जाती है ….. खूब दूध देती है …. कई बार गाय के धोखे में खिला भी दी जाती है …. डिमांड में कम है ….. उसके ऊपर कौआ बैठे या बगुला उसे फर्क नहीं पड़ता ….. उत्पाती बच्चे कितना भी मारे-पीटें, चलती अपनी ही चाल से है, ज्यादा उत्पात किया तो पूँछ मार के गिरा दिया ज़मीन पर …. शेर तकको खदेड़ देती है – जैसे भैंस पानी में चली जाती है, वैसे ही व्यवस्था भी पानी में बैठ जाती है …
#इतिहास_क्या_है :- आपकी भैस की पूर्वजों की ऐसी कहानी जिसे मान लेने के आलावा आपके पास दूसरा कोई चारा नहीं, क्योंकि इतिहास विजेता लिखवाता है और विजेता के शब्द ही इतिहास है सच चाहे जो भी हो।
#व्यस्था_क्या_है? :- व्यस्था भैंस की पूँछ है जो कौवों-बगुलों को भगा देती है, उत्पाती लडकों को गिरा देती है, और जब उठ जाती है तो व्यवस्था गोबर कर देती है – जिससे सब के चूल्हे जलते हैं और सबके खेतों में जिसकी खाद से सबसे अच्छी फसल होती है – सुख-समृद्धि-शांति आती है !
अगर आदिम साम्यवाद के बाद सामंतवाद और सामंतवाद के बाद पूँजीवाद आया है तो पूँजीवाद के बाद समाजवाद और समाजवाद के बाद साम्यवाद क्यों नहीं आ सकता?
#डेमोक्रेसी_या_लोकतंत्र_क्या_है: ये युद्ध की जगह वोट द्वारा सर्कार चुनने का जनाधिकार है। लोकतंत्र वो ताकत है जिससे भैंस अपने मालिक को बदलने, मिटाने और हटाने का काम कर सकती है। सदियों की मानव शोषण की बीमारी पर शोध करने के अनुभव के बाद डेमोक्रेसी जैसी दवाई निकल कर आयी है जिसकी खो जाने के बाद आपकी खाल निकाल कर बाजार में आपके ही हाथों बिकवाई जायेगी।
अंततः
#अम्बेडकरवाद_क्या_है: कानून या संविधान के नज़र में सब बराबर हैं सबको न्याय पाने का और सुखी रहने का अधिकार है कोई किसी का मालिक नहीं, कोई किसी का शोषण नहीं कर सकता और ये सब केवल कोरी बाते न हों इनको कानून बनाकर लागू किया जाए।
#जय_भीम💐
#रिपोस्ट:- written by 14th April 2019
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