अन्य वर्गों की दिवाली कब होगी भविष्य की बात, परन्तु अम्बेडकर जयंती देश के scst/obc वर्ग का अवश्य प्रकाश उत्सव है। भाजपा की चाल से सावधान! #

अन्य वर्गों की दिवाली कब होगी भविष्य की बात, परन्तु अम्बेडकर जयंती देश के scst/obc वर्ग का अवश्य प्रकाश उत्सव है।      भाजपा की चाल से सावधान!

  #AkhileshYadav  ने 14 अप्रैल को '#दलित_दिवाली मनाने का ऐलान किया तो चौतरफा हंगामा हो गया। अधिकतर लोगों की आपत्ति है कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को दलित वर्ग तक सीमित क्यों किया जा रहा है। जबकि उनका योगदान सभी समाज के लिए रहा है। उन्होंने संविधान बनाया, आरबीआई की नींव डाली, महिलाओं का उत्थान किया, अर्थनीतियां बनाई और सर्वजनों के लिए तमाम काम किए।

इसपर बहुत कुछ लिखा जा सकता है, बहुत कुछ बोला जा सकता है मगर एक और एकमात्र उदाहरण से समझा जा सकता है कि ये विवाद बेवजह क्यों है। 

देश की राजधानी दिल्ली से आते हुए, उत्तर प्रदेश में प्रवेश करते ही DND के निकट एक भव्य पार्क और स्मारक दिखाई देता है।
जहां से शुरू होती है बहुजनों के इतिहास के ग्लोरिफिकेशन की कहानी। 
इस भव्य पार्क और स्मारक में सबसे ज्यादा फोकस में रखे गए हैं 'डॉक्टर भीमराव अंबेडकर' और दिखाया गया है कि उन्होंने कैसे संविधान रचकर तत्कालीन राष्ट्रपति को सौंपा और देश को नई दिशा देने का काम किया।

आप जानते हैं इस पार्क का नाम क्या है ?
'राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल' 
क्या डॉ. अंबेडकर,  गौतम बुद्ध और कांशीराम जैसे महानायकों की मूर्तियां स्थापित करके मायावती जी चाहती हैं कि इनसे सिर्फ SC वर्ग के लोग प्रेरणा लें?
क्या ये नाम 'दलित प्रेरणा स्थल' किसी मनुवादी ने रखा है ?
या मान्यवर कांशीराम और मायावती जी ने इस सुनहरे सपने को ज़मीन पर उतारा है ?

वैसे ट्रोल करने की आदत में आप इतने बहक चुके हैं कि डर है कहीं कहने लगें 'कांशीराम और मायावती' भी मनुवादी हैं।

खुद से सवाल कीजिए-
दलित यानी Oppressed को SC तक सीमित करके आप खुद बहुजनों के दायरे को सीमित तो नहीं कर रहे हैं?
इस देश के 
आदिवासी दलित नहीं है क्या ?
ओबीसी दलित नहीं है क्या ?
माइनॉरिटी दलित नहीं है क्या?
और महिलाएं दलित नहीं है क्या ?

खैर, इसपर चर्चा कभी विस्तार से।

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