‼️दिमागी गुलामी‼️🚥🚥🚥🚥🚥🚥जिस जाति की सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उसके मानसिक दासता के बंधन भी उतने ही अधिक होते हैं❗

‼️दिमागी गुलामी‼️
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जिस जाति की सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उसके मानसिक दासता के बंधन भी उतने ही अधिक होते हैं❗

भारत की सभ्यता पुरानी है, इसमें तो शक ही नहीं और इसलिए आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावटें भी अधिक है। मानसिक दासता प्रगति में सबसे अधिक बाधक होती है❗

हमारे कष्ट, हमारी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक समस्याएं इतनी अधिक और इतनी जटिल है कि हम तब तक उनका हल नहीं सोंच सकते जब तक की हम साफ-साफ और स्वतंत्रतापूर्वक इन पर सोचने का प्रयत्न न करें❗

वर्तमान शताब्दी के आरंभ से भारत में राष्ट्रीयता की बाढ़ सी आ गयी है, कम से कम तरुण नव शिक्षितों में। यह राष्ट्रीयता बहुँत अंशों में श्लाध्य रहने पर भी कितने ही अंशों में अंधी राष्ट्रीयता है❗

झूठ-सच जिस तरीक़े से भी हो, अपने देश के इतिहास को सबसे अधिक निर्दोष व गौरवशाली सिद्ध करने अर्थात अपने ऋषि-मुनियों, लेखकों और विचारकों, राजाओं और राज-संस्थाओं में बीसवीं शताब्दी की बड़ी से बड़ी राजनीतिक महत्व की चीजों को देखना हमारी राष्ट्रीयता का एक अंग है❗

अपने प्राचीन काल के गर्व के कारण हम अपने भूत के स्नेह में कड़ाई के साथ बंध जातें हैं और इससे हमें उत्तेजना मिलती है कि अपने पुर्वजों के धार्मिक बातों को आंख मूँदकर मानने के लिए तैयार हो जाएं❗

बारुद और उड़नखटोला में तो झूठ-सच पकड़ने की गुंजाइश है, लेकिन धार्मिक क्षेत्र में तो अंधेरे में काली बिल्ली देखने के लिए हरेक आदमी स्वतंत्र है❗

न यहां सोलहों आना बत्तीसों रत्ती ठीक-ठीक तौलने के लिए कोई तराजू है और न झूठ सच पकड़ने की कोई पक्की कसौटी❗

एक चलता-पुर्जा बदमाश है। उसने अपने कौशल, रुपये-पैसे, धोखाधड़ी और तरह-तरह के प्रलोभन से कुछ स्वार्थीयों, आंख के अंधों या कहें चमचों को मिलाकर एक नकटा पंथ कायम कर दिया और फिर लगी हजारों छोटी-मोटी, शिक्षित और मूर्ख काली और सफेद भेड़ें हां-हां कर नाक कटाने❗

जिंदगी भर वह बदमाश मौज करता रहा, मरने के बाद उसके अनुयायियों ने उसे और ऊंचा बढ़ाना शुरू कर दिया❗

अगर उस जमात को कुछ शताब्दियों तक अपने इस प्रचार में कामयाबी मिली तो फिर वह धूर्त दुनिया का महान पुरुष और पवित्र आत्मा प्रसिद्ध हो गया❗

पुराने वक्त की बातों को छोड़ दीजिए। आपने अपने आस-पास ऐसे कुछ आदमियों को देखा है जिनमें कुछ मर गए और कुछ जिंदा हैं❗

उनका भीतरी जीवन कितना घृणित, स्वार्थपूर्ण व असंयमित था। लेकिन बाहर भक्त लोग उनके दर्शन, सुमधुर अलाप से अपने को धन्य समझते थे❗

नजदीक से देखिए, ये धार्मिक महात्माओं के मठ और आश्रम ढोंग के प्रचार के लिए खुली पाठशालाएं हैं और धर्म का प्रचार-प्रसार क्या, पूरे सौ फीसदी नफे का रोजगार है। अधिकांश लोग इसमें अपने व्यवसाय के खयाल से जुटे हुए हैं❗

    🇮🇳🇮🇳🇮🇳 बोल 85 जय मूल निवासी 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

🌹जय जवान जय किसान जय विज्ञान जय भारत 🌹

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है