सम्राट असोक महान मौर्य ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने 52 ,00,000 लाख स्क्वायर किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया जिसे अखंड भारत कहा जाता था नालंदा तक्षशिला विक्रमशिला जैसे कई विश्वविद्यालय बनावाए थे जिससे विदेश से लोग शिक्षा ग्रहण करने भारत आते थे !ईसा पूर्व भारत में 500 BC से बौद्ध सभ्यता थी कोई भी भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता था.!सिकंदर आया लेकिन सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से डर कर भाग गया. सम्राट असोक महान के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट असोक महान उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर देंसेंट्रल एशिया पूरा गंधारा, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, नेपाल, म्यांमार, सब भारत का अभिन्न अंग थे.!इसलिए कहा जाता है 👇था सूर्य चमकता मौर्यो का घनघोर बदरिया डरती थी था शेर गरजता सीमाओ पर बिजली भी आहें भरती थी जय सम्राट............................🦁#Great #Samrat #Ashoka#picturechallenge #SamratAshok #highlights #viralposts2024 #trendingpost2024

सम्राट असोक महान मौर्य ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने  52 ,00,000 लाख स्क्वायर किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया जिसे अखंड भारत कहा जाता था 

नालंदा तक्षशिला विक्रमशिला जैसे कई विश्वविद्यालय बनावाए 
थे जिससे विदेश से लोग शिक्षा ग्रहण करने भारत आते थे !

ईसा पूर्व भारत में 500 BC से बौद्ध सभ्यता थी कोई भी भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता था.!

सिकंदर आया लेकिन सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से डर कर भाग गया. सम्राट असोक महान के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट असोक महान उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर दें

सेंट्रल एशिया पूरा गंधारा, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, नेपाल, म्यांमार, सब भारत का अभिन्न अंग थे.!

इसलिए कहा जाता है 👇
था सूर्य चमकता मौर्यो का घनघोर बदरिया डरती थी 
था शेर गरजता सीमाओ पर बिजली भी आहें भरती थी 

जय सम्राट............................🦁
#Great #Samrat #Ashoka
#picturechallenge 
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#highlights 
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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है