विज्ञान कहता है कि सोना जलता नहीं है, और रामायण कहती हैं, सोने की लंका जलकर राख हो गयी थी । कौन सही है... कृपया शोध करें

1. विज्ञान कहता है कि सोना जलता नहीं है, और रामायण कहती हैं, सोने की लंका जलकर राख हो गयी थी । कौन सही है... कृपया शोध करें । 🤔
        

2. भारतरत्न डा.अम्बेडकर के पास 32 डिग्रियां थीं, और वे 9 भाषा के ज्ञाता थे.. जिन्होंने संविधान लिखा है, और 8वी फेल अज्ञानी लोग उसमें कमियां निकाल रहे हैं ।
           

3. पंडितों के 33 करोड भगवान मिलकर भी दलितों को शुद्ध नहीं कर पाए और दलितो में इतनी ताकत है, वो भगवान को छूकर अशुद्ध कर सकता है ।
          

4. भगवान की भक्ति से सब कुछ अगर हासिल होता, तो सारे पुजारी, मंहन्त, साध्वी, अनपढ़ राजनीति में नहीं आते । याद रहे शक्तियां भगवान में नहीं, संविधान में है ।
            

5. भगवानों ने सिर्फ राक्षसों यानी आधुनिक SC ST OBC को ही क्यों हराया और वध किया । अरबी, मुगल, डच, अफगान, और अंग्रेज उनके दोस्त थे क्या । 🤔
         

7. मनु के समय नारी को शिक्षा का अधिकार ही नहीं था, तो सरस्वती किस कालेज से Ph.D. करके शिक्षा की देवी बनी... और आप में से किसको कॉलेज में पढ़ाई है ।
          

8. मन्दिर में चोरी करने वाला चोर भगवान से नहीं डरता.. बल्कि चोरी करते समय कोई इन्सान न देख ले इस बात से डरता है । कौन बड़ा है भगवान या इंसान । चोरी का मुकदमा और न्याय संविधान द्वारा होता है ना कि रामायण - महाभारत की किताब द्वारा । 👍
          

9. अगर कुदरत के कहर से किसान की फसल खराब होती है, तो उसकी भरपाई मन्दिर की दान पेटी से होने चाहिए.. क्योंकि नुकसान भगवान ने ही किया है।
           

10. शंकर अपने पुत्र गणेश को नहीं पहचान सके.. कि यह किसका बेटा है, और राम लव-कुश को नहीं पहचान सके, तो आपको क्या पहचानेंगे? यह सब झूठी कहानियां हैं ।
          

11. कोरोना में सभी मंदिर में ताला और भगवान के मुह पर मास्क लगा हुआ था...। मनुष्य बिना भगवान के जिन्दा रह सकता है, किन्तु खाना और दवाई बिना नहीं । 

12. मंदिर और उसके पत्थर के दर्शन बिना आपका कौन सा कार्य रुका है.. कृपया किसी एक रुके हुए कार्य का नाम बताये । कोरोना के समय शादियां हुई, बच्चे पैदा हुये, जिन्दा रहे, विज्ञान की दवा खाए, विज्ञान के मोबाईल से सम्पर्क में रहे, किसान की कमाई से रोटी खाए । पाखंड हटाओ विज्ञान अपनाओ ।

🇳🇪जय संविधान🇳🇪 📘

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है