विडियोकॉन पर बैंक का 42000 करोड़ का लोन था , विडियोकॉन ने अपनी कम्पनी वेदान्ता ग्रूप को बेच दी , बैंक से उन्होंने 2900 करोड़ सेटल्मेंट कर लिया । बैंक ने 39100 करोड़ रुपय NPA में डाल दिए ।

1. विडियोकॉन पर बैंक का 42000 करोड़ का लोन था , विडियोकॉन ने अपनी कम्पनी वेदान्ता ग्रूप को बेच दी , बैंक से उन्होंने 2900 करोड़ सेटल्मेंट कर लिया । बैंक ने 39100 करोड़ रुपय NPA में डाल दिए । 

2. रुचि सोया कम्पनी पर बैंक का 9400 करोड़ का बैंक लोन था । रुचि सोया को स्वामी रामदेव ने ख़रीद लिया और बैंक ने रुचि सोया के 5000 करोड़ NPA में डाल दिए । अब आपकी समझ में आया कि रामदेव क्यों चाहता था, कि मोदी सरकार आए ?? 

3. DHFL पर बैंक का 100064 करोड़ का क़र्ज़ था । पिरामल ग्रूप ने DHFL को ख़रीद लिया और बैंक ने 63000 करोड़ रुपय NPA में डाल दिए । 

4. भूषण स्टील को टाटा स्टील ने 35200 करोड़ में ख़रीद लिया और बाक़ी 18000 करोड़ रुपय बैंक ने NPA में डाल दिए । 

5. एस्सार पॉवर को माननीय अड़ानी जी ने ख़रीदा । एस्सार पॉवर पर बैंक का 12000 करोड़ का लोन था । बैंक से सेटल्मेंट मात्र 2600 करोड़ में हो गया , बाक़ी 9400 करोड़ NPA में चले गए । 

6. एस्सार स्टील को आर्सलर मित्तल ने 42000 करोड़ में ख़रीदा । बैंक का एस्सार स्टील पर 49000 करोड़ को लोन था , बैंक से 30000 करोड़ में सेटल्मेंट हो गया । 19400 करोड़ NPA में चले गए ।

यह सिर्फ़ चंद मिसालें हैं जिनसे आप समझ सकते हैं कि आपको चिंदी चोरी में उलझाकर देश को कैसे लूटा जा रहा है ।  लाखों करोड़ की लूट को चुपचाप देख रहें हैं । ऐसा क्यो है ?? 

इतना याद रखिए कि  कॉर्पोरेट आपका और आपके बच्चों का भविष्य लूट रहे हैं , देश को खोखला कर रहे हैं । 

हो सके तो देश को बचाइए , अपनें बच्चों के भविष्य को बचाइए ।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है