क्रान्तिकारी जय भीम.. 🇪🇺मैं उन नमक हरामों से पूछना चाहता हूँजो कावड़ उठाकर पत्थर के लिंग और योनि को पूजने में व्यस्त है।

क्रान्तिकारी जय भीम.. 🇪🇺

मैं उन नमक हरामों से पूछना चाहता हूँ
जो कावड़ उठाकर पत्थर के लिंग और योनि को पूजने में व्यस्त है। 
पिछले 5000 सालों में कौन सा भोलानाथ तुम्हे बचाने आया.. 
किस शिवशंकर ने तुम्हारी गुलामी की जंजीरे काटी.. 
किस नीलकंठ ने तुम्हारे गले में पड़ी थूक की हंडिया खोली.. 
किस महादेव ने तुम्हारे पिछवाड़े बंधी झाड़ू खोली.. 
आज जिस 'ओम नमः शिवाय' का जाप आज आप सब कर रहे हो इस को सुनने मात्र पर भी आपके कानो में पिघला हुआ सीशा डाल दिया जाता था और इसको जपने मात्र पर ही आपकी जुबान काट ली जाती थी
जानवरो से बदतर जिंदगी थी आपकी
उस रामराज में जिसकी परिकल्पना में आज कावड़ उठा कर हरिद्वार की दौड़ आप लगा रहे हो।
आपके बेड़िया काटने कोई भोला नही आया
आपकी बेड़िया बाबा साहब अम्बेडकर ने काटी !! 
और कहा था.. 
कि सभी दबे कुचले, दलित शोषित, पिछडो का एक ही तीर्थ है
और वो है भारतीय संसद
उस तक पहुचने के रास्ते मे आप सभी के लिए खोल रहा हूँ
तोड़ दो बेड़िया
और पहुँच जाओ संसद.. 
लेकिन तुम तो ठहरे जाहिल, लतखोर व मानसिक गुलाम जो तुम पहुँच रहे हो हरिद्वार ?
तुम्हे क्या ?
तुम खेलते रहो
यादव, चमार, पासी, भंगी, कुर्मी, कुम्हार आदि आदि।
लेकिन एक बात याद रखना
पिछली बार 5000 सालो में कोई अम्बेडकर पैदा हुआ था
हर रोज अम्बेडकर नही पैदा होते
और
तुम्हे आजादी मुफ्त में नही मिली थी।

🙏🇪🇺जय भीम 🇪🇺🙏
🇨🇮जय भारत 🇨🇮
जय संविधान📖
 जय विज्ञान🖋️
___________________________________________
Love you बाबा साहब 😍
I miss you बाबा साहब 😢
बाबा साहब अमर रहे 💐💐💐👏👏
---------------------------------------------------------------------
💞🙏🌹🇪🇺🌹🙏💞

Comments

Popular posts from this blog

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है