❗अपने बच्चों को अन्धविश्वासी ना बनायें❗

❗अपने बच्चों को अन्धविश्वासी ना बनायें❗

 हमारे यहां पढ़ने वाले छात्रों को किताबों में पढ़ने के लिए जो मिलता है उस का उल्टा उन्हे अपने परिवार वाले, धर्मग्रंथो और धार्मिक गुरुओ से मिलता है। बस इसी का नतीजा होता है कि एक पढ़ा लिखा इंसान भी बेवकूफ जैसा बरताव करता है।

हेमेंद्र कक्षा 7 वीं का छात्र है। उसके गाँव में यज्ञ हो रहा था। यज्ञ में आए धर्मगुरु अपने प्रवचन में बता रहे थे कि गंगा शिवजी की जटाओ से निकलती है और भागीरथ उन्हे स्वर्ग से धरती पर लाये थे। 

प्रवचन खत्म होते ही हेमेंद्र ने पूछा महात्मा जी "मैंने तो हमारी किताब में पढ़ा है कि गंगा हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है❗

इस पर महात्मा जी ने कहा कि, "अभी तुम बच्चे हो धर्म-कर्म की बाते नहीं समझ पाओगे।" पास में ही बैठे दूसरे लोगों ने भी उससे कहा कि जब तुम बड़े हो जाओगे तो तुम्हें अपने आप इन सब बातो की जानकारी हो जाएगी।

दूसरे दिन हेमेंद्र ने अपनी क्लास में टीचर से पूछा कि, " सर! आप जो पढाते है उस का उल्टा महात्मा जी बताते है।" टीचर ने कहा कि,"जब तुम बड़े हो जाओगे तब समझ जाओगे।"

 आज हेमेंद्र बड़ा हो गया है फिर भी इन बातो को समझने में उसे मुश्किल हो रही है कि आखिर किसे वो सच माने और किसे झूठ ?

हर्षिता शाक्य इंटर की छात्रा थी। एक दिन उसकी माँ ने उस से कहा "तुम नहा कर रोजाना सूर्य भगवान को जल चढ़ाया करो।" इससे तुम्हें हर चीज में कामयाबी मिलेगी।

 इस पर हर्षिता बोली माँ आप को पता नहीं है कि सूर्य भगवान नहीं है। सूर्य सौर्य मण्डल का एक तारा है जो धरती से कई गुना बड़ा है❗

इस पर हर्षिता की माँ बोली "क्या वे सभी लोग बेवकूफ हैं,जो सूर्य देवता को जल चढ़ाते है। हर्षिता समझ ही नहीं पाई कि किताब की बाते सच माने या अपनी माँ की..❗

एक बार जब भूकम्प और तूफान आया तो ममता के दादा जी ने बताया कि, "धरती शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और जब शेषनाग करवट बदलता है तो वह हिलने लगती है।" 

ममता ने अपने दादा को जवाब दिया कि,"दादा जी मेरी किताब में लिखा हुआ है कि धरती अपनी धुरी पर 23 डिग्री पर झुकी हुई है। जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती है तो भूकंप आता है❗

इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हमारे समाज में देखने को मिलते हैं, जो नई पीढ़ी को परेशानी में डाल देते हैं❗

विज्ञान तर्क के आधार पर बात को पुख्ता करता है ताकि विद्यालय में पढ़ने वाले विधार्थी उसे समझें और अपने जीवन में उतारे। 

जबकि धर्म से जुड़ी किताबे यहां-वहां से इकठ्ठा की गई बातों का पुलिंदा होती हैं जिनमें अंधविश्वास भरा होता है जिससे बच्चो को यह समझ में नहीं आता कि आखिर वह किस पर विश्वास करें.❓

कुछ लोग कहते है कि ऐसा हम इसलिए करते हैं क्योंकि हमारे पूर्वज इसे मानते थे इसलिए आज हम भी मानेंगे। उनसे मेरा सवाल है कि हमारे पूर्वज जंगल मे नंगे भी घूमते थे तो आप अब क्यों नहीं घूमते? क्यों शूट-बूट पहनना पसंद करते हो❓

इसलिए मेरा सबसे निवेदन है कि सत्य को स्वीकारें और विज्ञानवादी बनें। वर्तमान सरकारें भी विभिन्न समाज परिवर्तक योजनाओं द्वारा परिवर्तन की ओर अग्रसर है तो क्यों न हम सभी सहभागिता निभाए और देश को विकासशील से विकसित बनाने में हाथ बटाएं❗

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