लखनऊ में पत्रकार अम्बरीश दुबे पर जानलेवा हमला. अत्यन्त दुखद समाचार.दलितों पिछड़ों की लगातार हो रही हत्या के बाद अब ब्राह्मणों का भी नम्बर आ गया. मैं तो समझता था कि दलित व पिछड़ों में अधिकतर सरकार के खिलाफ रहते हैं इसलिये उनको एक एक कर निपटाया जा रहा है किन्तु अब तो ब्राह्मणों को भी लगातार निपटाया जा रहा है जो सरकार के हर अच्छे बुरे कामों का अंध सपोर्टर (अधिसंख्य ब्राह्मण) रहा है. जब यादवों को चुन चुन कर निपटाया जा रहा था तो शेष लोग मजा ले रहे थे, फिर मौर्या कुशवाहा का नम्बर लगा तब भी शेष लोह मजा ले रहे थे, उसके बाद पटेलों का नम्बर आया, तो भी शेष लोग मजा ले रहे थे, और अब तो ब्राह्मणों का भी नम्बर लग गया है. और एक एक कर निपटाया जा रहा है तो भी शेष लोग चुप रहें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये. क्योंकि नफरत की राजनीति करने वालों के मुंह में तो खून का स्वाद जो लग चुका है. उसकी मौत पर मैं चुप था, मेरा नम्बर अब आया है, मेरी मौत पर तुम चुप हो अगला नम्बर तुम्हारा है.बस एक दूसरे की मौत पर खुश होते रहिये और नफ़रत के बीज बोते रहिये. देश और समाज को बरबाद करने के लिये काफी है. जय भारत.

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है