समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व तथा समाजवादी पार्टी की नीतियों में आस्था रखते हुए अन्जान आदमी पार्टी का विलय की घोषणा उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ0 आशुतोष मिश्रा एडवोकेट

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व तथा समाजवादी पार्टी की नीतियों में आस्था रखते हुए अन्जान आदमी पार्टी का विलय की घोषणा उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ0 आशुतोष मिश्रा एडवोकेट उच्च न्यायालय ने की। उनके साथ अन्जान आदमी पार्टी के सचिव श्री रावेन्द्र मिश्र भी थे। इस अवसर पर चित्रकूट विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री बी.पाण्डेय उपस्थिति थे।
     आज समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय में श्री अखिलेश यादव की उपस्थिति में अन्जान आदमी पार्टी की विलय करने की घोषणा उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ0 आशुतोष मिश्रा ने करते हुए कहा कि भाजपा के कारण लोकतंत्र के सामने जो संकट आया है उसका सामना करने एवं समाजवादी पार्टी को ताकत देने के लिए विलय का निर्णय लिया गया है। अंजान आदमी पार्टी के नेताओं का मानना है कि समाजवादी सरकार द्वारा जनहित के विकास कार्यों एवं समाजवादी पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर यहां आये है।
     अन्जान आदमी पार्टी के नेतृत्व ने कहा कि भाजपा की जनविरोध की राजनीति तथा भाजपा सरकार की मनमानी व अन्यायपूर्ण रवैया के कारण आमजन संकट में है। भाजपा ने आर्थिक-सामाजिक विषमता पैदा की है। सद्भाव को बिगाड़ा है। जातिवाद का नंगा नाच भाजपा कर रही है। भाजपा राज में पीड़ित की कहीं सुनवाई नहीं है। उनका मानना है कि ऐसी सरकार को सत्ता से बाहर करने की ताकत समाजवादी पार्टी और श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही है।
     इस अवसर पर श्री अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी का झण्डा प्रदान किया तथा लाल टोपी पहनायी गयी। इन सभी नेताओं द्वारा समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की गई।
    श्री अखिलेश यादव ने अंजान आदमी पार्टी का विलय स्वीकार कर कहा कि समाजवादी पार्टी की नीतियांे से ही सामाजिक सद्भाव एवं लोकतांत्रिक समाजवादी व्यवस्था को ताकत मिलेगी। समाजवादी पार्टी की प्रतिबद्धता शोषित-पीड़ित वंचित तथा उपेक्षा के शिकार समाज को न्याय दिलाने की है।
     श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा पूंजीवाद की पोषक पार्टी है जिसमें गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है। भाजपा नौजवानों के भविश्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। बेरोजगारी के कारण अपराधों में लगातार वृद्धि होती जा रही है। भाजपा सरकार किसी भी समस्या का समाधान नहीं करना चाहती है। भाजपा के कारण ही अराजकता पैदा हो गयी है। कानून का किसी को भय नहीं है। जब स्वयं भाजपाई कानून के साथ खिलवाड़ करते है तब कानून का राज कैसे कायम हो सकता है?
     श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की आर्थिक नीतियों के कारण कारोबार चौपट हो गये हैं। भाजपा सरकार जनहित में कोई भी निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। ऐसी निकम्मी सरकार को हटाने के लिए व्यापक स्तर पर जन सहयोग की आवश्यकता है। समाजवादी पार्टी ही भाजपा को सत्ता से हटाकर पुनः लोकतंत्र को स्थापित करेगी तथा आम नागरिक के साथ न्याय का रास्ता प्रशस्त करेगी।
                                                                     (राजेन्द्र चौधरी)
                                                                      मुख्य प्रवक्ता

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है