कातिल ने भी क्या वक्त चुना19 रमज़ान 2021 -मोहम्मद शहाबुद्दीन तिहाड़ जेल 24 रमज़ान 2023 -अतीक अहमद , पुलिस कस्टडी18 रमज़ान 2024 -मुख्तार अंसारी , बांदा जेल अल्लाह सभी को मग़फिरत फरमाए।

कातिल ने भी क्या वक्त चुना

19 रमज़ान 2021 -मोहम्मद शहाबुद्दीन तिहाड़ जेल 
24 रमज़ान 2023 -अतीक अहमद , पुलिस कस्टडी
18 रमज़ान 2024 -मुख्तार अंसारी , बांदा जेल

                  अल्लाह सभी को मग़फिरत फरमाए।
यह सही है कि यह तीनों कोई साधू-संत नहीं थे , दबंग थे , बाहुबली थे मगर यह भी सच है कि इन्होंने किसी गरीब को नहीं मारा ना सताया , इनकी लड़ाई उनके दौर के बाहुबलियों से ही थी , यह कलेजे वाले थे , इस लड़ाई में जीते‌ , फिर चाहे कृष्णानंद राय हों या ब्रिजेश सिंह हों या विरेन्द्र ठाकुर हों या राजू पाल।

यद्यपि कानून की नजर मे यह सब अपराध हो सकता है मगर यह भी सच है कि कानून तो सत्ता की आंखों से देखता है , कानून की अपनी आंखों पर पट्टी बधी रहती है।

यह अपने क्षेत्र में लोकप्रिय थे , सभी हिन्दू मुस्लिम गरीब जनता के चहेते थे , इन्होंने कभी किसी गरीब की लड़की का कुलदीप सिंह सेंगर की तरह बलात्कार नहीं किया , उस लड़की के परिवार को खत्म नहीं किया , इन लोगों ने कभी स्वामी चिन्मयानंद की तरह किसी गरीब की लड़की से नग्न होकर मालिश नहीं कराई किसी का बलात्कार नहीं किया , बृजभूषण शरण सिंह की तरह किसी गरीब की लड़की के स्तन , पेट और योनि नहीं सहलाई‌ , गरीब किसानों पर थार नहीं चढ़ाई , किसी जियाउल हक डिप्टी एसपी की हत्या नहीं की , किसी गरीब को मारकर मगरमच्छ के तालाब में नहीं फेंका।

अपने दौर के माफिया से लड़ते थे और बिना हिंदू मुस्लिम देखे गरीबों की मदद किया करते थे। इसीलिए 5-5 बार 8-8 बार अपने दम पर भारी वोटों से चुनाव जीतते थे।

बाकी मौजूदा दौर में तो जो सरकार के साथ है वह सही , बाकी सब गलत , मुसलमान है तो और भी गलत।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है