इस पोस्ट को अपने हर रिश्तेदारों तक पहुँचाएँ। उन्हें लुटने से बचाएं।
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किसी में मल्टी लेयर मार्केटिंग या पोंजी पिरामिड स्कीम या चेन मार्केटिंग स्कीम में सारा पैसा शुरुआत करने वाले ले जाते हैं। बाद में जुड़े लोग लुट जाते हैं।
चूँकि इस बिज़नेस मॉडल में किसी सामान या सर्विस का प्रोडक्शन नहीं होता, इसलिए जो पैसा होता है वह बाद में जुड़ने वालों का होता है। वही पैसा स्कीम में घूमता है। नए लोगों का जुड़ना रुका नहीं कि स्कीम गिर जाती है।
पिछले सौ साल में हर ऐसी स्कीम में लोग ठगे गए हैं। पर फिर भी नई स्कीम में लोग फँस जाते हैं। क्योंकि इसे आपके परिचित लोगों के ज़रिए आप तक पहुँचाया जाता है।
सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर ऐसी स्कीम चलाने वाली सबसे नई कटेगरी है क्योंकि वे किसी और तरीक़े से रसूख़ कमाकर उसका इस्तेमाल आपको ठगने में करते हैं।
#vivekbindra एमएलएम पोंजी स्कीम चलाने वाला आदमी है। ऐसे लोग आते रहेंगे।
मेरे कहने पर लोग अभी समझ जाएँगे। पर कल फिर ऐसी कोई स्कीम लेकर आएँगे तो उसमें फँसेंगे।
लोग दूसरे से कहेंगे कि - शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, लोभ में फंसना नहीं”
फिर उसमें खुद फँस जाएँगे।
ऐसी स्कीम पुरानी होते ही गिर जाती है क्योंकि एक समय के बाद नए लोग नहीं मिल पाते। लेकिन शिकारी तब तक लूटकर भाग चुका होता है।
विवेक बिंद्रा बस भागने ही वाला है। लेकिन जो युवा इसमें पैसे लगा चुके हैं वो डूब चुके हैं।
सरकार को विवेक के ऐसेट ज़ब्त करके कुछ पैसे लौटाने की कोशिश करनी चाहिए।
ऐसी स्कीम को कैसे पहचाने-
1. क्या आपसे कहा जा रहा है कि स्कीम में और लोगों को जोड़ो?
2. कंपनी की आमदनी कहाँ से हो रही है? उसकी फ़ैक्ट्री किधर है? वह कौन सी सर्विस दे रही है? अगर ये पता नहीं चल रहा है तो दूर से नमस्कार 🙏🏽 करें।
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