नागराज मंजुले को क्रांतिकारी नीला सलाम
सुअर उठाने के लिए भी जाति बनाई गई. जब नागराज मंजुले स्कूल में पढ़ते थे तब का वाक्य है. रेल पटरी पर एक सुअर मर गया. मरे हुए सुअर को उठाने के लिए एक सवर्ण व्यक्ति घण्टों ढूंढते ढूंढते नागराज मंजुले के घर आया. और सुअर उठाने के लिए कहने लगा.
नागराज मंजुले ने सवाल किया तुम यह सब कहने हमारे घर क्यों आए और तुम खुद क्यों नही सुअर उठा सकते ?
आज भी ग्रामीण इलाकों में मरे हुए जनवरों को फेंकने का 100% आरक्षण निचली क्रम की जातियों के पास ही है.
भारतीय संस्कृति - भारतीय समाज नागराज मंजुले जैसों को उनकी जाति के कारण आज भी उन्हें सुअर फेंकने लायक ही समझता है.
नागराज मंजुले ने अपनी काबिलियत से साबित कर दिया वे भारतीय सिनेमा जगत को विश्व स्तर का सिनेमा दे सकते हैं.
भारतीय समाज को बेहतरीन सिनेमा देने के लिए नागराज मंजुले जी को धन्यबाद.
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