नागराज मंजुले को क्रांतिकारी नीला सलाम

नागराज मंजुले को क्रांतिकारी नीला सलाम 
सुअर उठाने के लिए भी जाति बनाई गई. जब नागराज मंजुले स्कूल में पढ़ते थे तब का वाक्य है. रेल पटरी पर एक सुअर मर गया. मरे हुए सुअर को उठाने के लिए एक सवर्ण व्यक्ति घण्टों ढूंढते ढूंढते नागराज मंजुले के घर आया. और सुअर उठाने के लिए कहने लगा.

नागराज मंजुले ने सवाल किया तुम यह सब कहने हमारे घर क्यों आए और तुम खुद क्यों नही सुअर उठा सकते ?

आज भी ग्रामीण इलाकों में मरे हुए जनवरों को फेंकने का 100% आरक्षण निचली क्रम की जातियों के पास ही है. 

भारतीय संस्कृति - भारतीय समाज नागराज मंजुले जैसों को उनकी जाति के कारण आज भी उन्हें सुअर फेंकने लायक ही समझता है.

नागराज मंजुले ने अपनी काबिलियत से साबित कर दिया वे भारतीय सिनेमा जगत को विश्व स्तर का सिनेमा दे सकते हैं.

भारतीय समाज को बेहतरीन सिनेमा देने के लिए नागराज मंजुले जी को धन्यबाद.

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है