बिहार की जाति जनगणना ने एक और मिथक को ग़लत साबित कर दिया है कि कुर्मी, यादव और कुशवाहा ओबीसी का सारा हिस्सा खा जाते हैं। अब तक बिना फैक्ट और आँकड़ों के इन तीन जातियों के खिलाफ बहुत ज़हर बोया गया। अब जाति जनगणना से फैक्ट सामने आ गया है। बिहार में तीनों जातियों की मिलाकर कुल आबादी 21 फ़ीसदी है लेकिन सरकारी नौकरी इन तीन जातियों के सिर्फ 6.7% कर्मचारी हैं। अब ये मान लेने में कोई हर्ज नहीं है कि सबका हिस्सा सवर्ण जातियाँ खा रही है। जब तक उनके ज़्यादा खाने पर कंट्रोल नहीं होगा, तब तक बाक़ी सभी जातियों के पेट पिचके रहेंगे। नौकरियाँ तो सीमित हैं। उनका न्यायपूर्ण बँटवारा होना चाहिए।
बिहार की जाति जनगणना ने एक और मिथक को ग़लत साबित कर दिया है कि कुर्मी, यादव और कुशवाहा ओबीसी का सारा हिस्सा खा जाते हैं।
अब तक बिना फैक्ट और आँकड़ों के इन तीन जातियों के खिलाफ बहुत ज़हर बोया गया।
अब जाति जनगणना से फैक्ट सामने आ गया है।
बिहार में तीनों जातियों की मिलाकर कुल आबादी 21 फ़ीसदी है लेकिन सरकारी नौकरी इन तीन जातियों के सिर्फ 6.7% कर्मचारी हैं।
अब ये मान लेने में कोई हर्ज नहीं है कि सबका हिस्सा सवर्ण जातियाँ खा रही है। जब तक उनके ज़्यादा खाने पर कंट्रोल नहीं होगा, तब तक बाक़ी सभी जातियों के पेट पिचके रहेंगे।
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