1990 में भारत में पहली बार एक क्रिकेटर की जाति सार्वजनिक रूप से बताई गई थी जब श्रीकांत को 10 की एवरेज से रन बनाने के कारण कप्तानी से हटा दिया गया था और मीडिया ने इसे ब्राह्मण उत्पीड़न का केस बनाया था।
1990 में भारत में पहली बार एक क्रिकेटर की जाति सार्वजनिक रूप से बताई गई थी जब श्रीकांत को 10 की एवरेज से रन बनाने के कारण कप्तानी से हटा दिया गया था और मीडिया ने इसे ब्राह्मण उत्पीड़न का केस बनाया था।
फिर जनसत्ता, इंडियन एक्सप्रेस के संपादक प्रभाष जोशी ने लेख लिखा कि विनोद कांबली जाति के कारण फेल हुए और गावस्कर और सचिन ब्राह्मण होने के कारण लंबे समय तक खेलते रहे।
फिर तेंदुलकर ने शर्ट के ऊपर जनेऊ पहनकर फ़ोटो सोशल मीडिया पर डाली।
फिर रैना ने टीवी कमेंट्री में बोला में ब्राह्मण हूँ।
फिर आए जडेजा, लकड़ी की बनी राजपूती तलवार भांजने।
हम लोग तो बस अभी थोड़ा सा लिख दिए हैं। अभी और लिखेंगे। क्रिकेट में जाति हम लोग लेकर नहीं आए हैं।
इतना तय है कि अब कभी वैसी भारतीय टीम नहीं बनेगी, जिसमें सात प्लेयर एक ही जाति के हों।
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