जॉर्ज मैकलॉरिन 1948 में ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति थे और इसके लिए उनको एक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी (मैकलॉरिन बनाम ओक्लाहोमा स्टेट रेजिडेंट्स), उन्हें अपने साथी गोरे पुरुषों से दूर एक कोने में बैठने के लिए मजबूर किया गया था।लेकिन कॉलेज में टॉप तीन छात्रों में से एक के रूप में उनका नाम सम्मान सूची में कायम है।ये उनके शब्द हैं: "कुछ साथियों ने मुझे एक जानवर की तरह देखा, कोई भी मुझसे बात नहीं करता, शिक्षकों के लिए मैं मौजूद भी नहीं था, उन्होंने शायद ही कभी मेरे सवालों का जवाब दिया। मैंने अपने आप को इतना समर्पित किया कि उसके बाद मेरे साथी मुझे ढूढने लगे और शिक्षक मुझे ध्यान में रखने लगे। मैंने उनके लिए अदृश्य होना बंद कर दिया। "शिक्षा में हथियार से ज्यादा शक्ति होती है।

जॉर्ज मैकलॉरिन 1948 में ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति थे और इसके लिए उनको एक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी (मैकलॉरिन बनाम ओक्लाहोमा स्टेट रेजिडेंट्स), उन्हें अपने साथी गोरे पुरुषों से दूर एक कोने में बैठने के लिए मजबूर किया गया था।

लेकिन कॉलेज में टॉप तीन छात्रों में से एक के रूप में उनका नाम सम्मान सूची में कायम है।

ये उनके शब्द हैं: "कुछ साथियों ने मुझे एक जानवर की तरह देखा, कोई भी मुझसे बात नहीं करता, शिक्षकों के लिए मैं मौजूद भी नहीं था, उन्होंने शायद ही कभी मेरे सवालों का जवाब दिया। मैंने अपने आप को इतना समर्पित किया कि उसके बाद मेरे साथी मुझे ढूढने लगे और शिक्षक मुझे ध्यान में रखने लगे। मैंने उनके लिए अदृश्य होना बंद कर दिया। "

शिक्षा में हथियार से ज्यादा शक्ति होती है।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)