03 जून 1924 जन्मदिन-वैचारिकी पर अडिग रहने वाला ही होगा "करुणानिधि".....#########################

03 जून 1924 जन्मदिन-
वैचारिकी पर अडिग रहने वाला ही होगा "करुणानिधि".....
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        "करुणानिधि" कोई यूं ही नहीं बन जायेगा,इसके लिए वैचारिकी की भट्ठी में तपना होगा जैसा दक्षिण भारत के सोशल जस्टिश के हीरो करुणानिधि जी ने तप कर हम सबके सामने उदाहरण प्रस्तुत करने का ऐतिहासिक काम किया है।
       पेरियार रामासामी नायकर जी की विरासत व वैचारिकी को पूरे मजबूती के साथ आगे बढ़ाने वाले करुणानिधि जी ने अपना संस्मरण सुनाते हुये अपने विवाह के बारे में जो बताया है वह नई पीढ़ी के लिए एक सबक है कि विचार व जीवन साथी में यदि कोई चुनना पड़े तो विचार को चुनना चाहिए।
    करुनानिधि जी के जीवन संघर्ष का यह उदाहरण जो 1944 का है,वे बताते हैं कि उनका जिस लड़की से प्रेम था उसके माता-पिता ने विवाह करने में यह शर्त रख दी थी कि उन्हें विवाह मनुवादी पद्धति से मंगलसूत्र पहनाकर मंत्रोच्चारण के साथ करनी होगी।करुनानिधि जी उस समय तक वैज्ञानिक धारा के प्रचारक बन चुके थे लिहाजा उन्हें अपने प्यार व विचारधारा में किसी एक को चुनना था जहां करुनानिधि जी ने विचारधारा को चुनते हुये रूढ़िवादिता के समक्ष झुकने की बजाय अपने प्रेम को कुर्बान कर दिया।
      करुनानिधि जी दक्षिण भारतीय ओबीसी कम्युनिटी से आते हैं जिन्होंने अपने संघर्षों व अटल वैचारिकी की बदौलत तमिलनाडु मे द्रविडियन आन्दोलन को ठोस आधारशिला देते हुये पिछड़ो-वंचितों को लगभग उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिलवाकर एक इतिहास रचा है।
       आज महामना करुणानिधि जी का जन्मदिन है।मैं हृदय की गहराइयों से अपने इस महान नेता को कोटि-कोटि नमन करता हूँ।
-चंद्रभूषण सिंह यादव
(03 जून 2023)

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है