कहावत है? धोबी का कुत्ता घर का न घाट का,ज्यादातर लौग मजाक मजाक मै कह जाते है,सभी ने सुनी भी होगी।
कहावत है?
धोबी का कुत्ता घर का न घाट का,ज्यादातर लौग मजाक मजाक मै कह जाते है,सभी ने सुनी भी होगी।
गाडगे जी वो नाम है जो सत्य का साथ देते थे वो भी आग की तरह,जैसे आग लगने पर गन्दगी साफ हो जाती है और आग पवित्र ही वनी रहती है आग मै कोई परिवर्तन नही होता
जव तिलक ने शिक्षा नेतागिरी नौकरी मै शुद्रो और स्त्रीयाँ का विरोघ किया था,कहाँ था तेली तमोली,कुर्मी आदी जातीयो का क्या काम है शिक्षा राजनीति मै क्या संसद मै हल चलायेगे।
तव गाडगे जी ने तिलक का विरोघ किया था और वो सफल भी हुऐ।
उनका साथ खडे होने वाले थे अम्बेडर जी,अम्बेडर जी गाडगे जी के मित्र थे, और दोनो ने एक दूसरे का साथ जीवन भर दिया।
गाडगे जी ने अम्बेडर जी का कभी भी विरोघ नही किया,न ही अम्बेडर जी ने कभी गाडगे जी का विरोघ किया।
दोनो ने साथ साथ अंघविश्वास पर चोट की थी।
लेकिन अभी अभी नये नये गाडगे भक्त पेदा हुऐ है जो अम्बेडर को जमकर कोष रहे गाली दे रहे है।
कह रहे है कानून काँफी पेष्ट है।
वो न तो गाडगे वादी है न अम्बेडर वादी है वो केवल अंघभक्त वादी है।
उन्ही लौगो पर ये कहावत सच होती है,धोबी का कुत्ता घर का न घाट का।
वो दोगले धोबी है जो अम्बेडर का विरोघ कर रहे है,सभी धोबी विरोध कर रहे है ऐसा नही है बस कुछ चंद लौग।
मै ये नही कह रहा की किसी जाती घर्म के साथ हिसा करो।
हिसा नही करना है बल्की सतर्क रहना है तर्कपूर्ण सत्य पर विश्वास करना है।
पाट्रीबाजी से दूर रहे समाज वादी बने,अंघभक्ति से मुक्ति की ओर चले।
किसी को ठेस लगे तो माफ करना,कभी कभी सत्य से ठेस लग जाती है।
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