जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारीजातिगत जनगणना, हक हमारा आरक्षण बढ़ाना होगा, बेईमानी पर रोक लगाना होगा।

सुनिए साथियों।
मल्लाह,धानुक, कानू, केवर्त, नोनिया, बिन्द, बेलदार, बरई, तमोली (चौरसिया), तेली, दांगी, कुल्हैया, हलुवाई,कहार, कमकर, कुशवाहा, यादव, कुर्मी, कलवार, सोनार, रोनियार,सूढी, कसेरा, केशरवानी, ठठेरा,कोस्ता,  गद्दी, घटवार, चनउ, जदुपतिया, जोगी, नालबंद,  परथा, मोदक/मायरा,  पनसारी, मोदी,  , कमलापुरी वैश्यल, माहुरीवैश्यर, बंगी वैश्य, बर्नवाल, अग्रहरि, पोद्दार, कसौधन, गंधबनिक, बाथम, गोलदार, कमलापुरी वायल,  रौतिया, शिवहरी, सूत्रधार, सुकियार,  भाट/भट/ब्रह्मभट्ट/राजभट, जट,मडरिया,दोनवार,
सुरजापुरी, मलिक,राजवंशी, छीपी, गोस्वामी, सन्यासी, अतिथ, गोसाई, जति,  ईटफरोश, गदहेडी, सैंथवार, कपरिया,  कलन्दर, कोछ, केवट, कादर, कोरा, कोरकू, खटवा,  खतौरी, खंगर, खटिक, खेलटा, गोड़ी, गंगई, गंगोता, गंधर्व, गुलगुलिया, चांय, चपोता,  टिकुलहार, ढेकारू, तमरिया, तुरहा, तियर, धामिन, धीमर, धनवार,  नाई, नामशुद्र, पाण्डी, पाल, प्रधान, पिनगनिया, पहिरा, बारी,  सेखड़ा, बागदी, भुईयार, भार, भास्कर, माली, मांगर, मदार,  मझवार, मारकन्डे, मोरियारी, मलार, मौलिक, राजधोबी, राजभर, रंगवा, वनपर, सौटा, संतराश, अघोरी, अबदल, कसाब, चीक, डफाली, धुनिया, धुनिया, नट, पमरिया, भठियारा,भाट (मुस्लिम) मेहतर, लालबेगीया, हलालखोर,भंगी(मुस्लिम) मिरियासीन, मदारी, मोरशिकार, साई/फकीर/दिवान/मदार, मोमिन,जुलाहा, अमात, चुडीहार, प्रजापति, राईन या कुंजरा, सोयर, ठकुराई, नागर, शेरशाहबादी, बक्खो, अदरखी, छीपी, तिली, इदरीसी, सैकलगर, रंगरेज, सिंदुरिया बनिया, कथबनिया, मुकेरी, बढई, पटवा, कमार, देवहार, सामरी वैश्य,  पैरघा/परिहार, जागा, लहेरी, राजवंशी,  अवध बनिया 

आपकी ओबीसी हैं, आपकी जनसंख्या 60% है। किन्तु सरकारी नौकरी मात्र 21% है।  किन्तु मोदी सरकार में सरकार को चलाने वाले 89 सचिवों में आपकी संख्या शून्य है। आपसे तो बेहतर स्थिति में  3 एसटी, 1 दलित समाज के लोग है। ऐसे में आपके बच्चों की नौकरी जनसंख्या के मुताबिक नहीं लगती है। जबकि अगड़ी जातियों के लड़कों की नौकरी दलित समाज के बच्चों से भी कम नंबर पर हो रहा है क्योंकि उन्हें 49.5% जेनरल और 10% EWS कोटा यानी एक तरीके से कुल 60% आरक्षण दे दिया गया है।

मोदी सरकार के आने के बाद आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाए गए हैं। आपके पास जमीन कम था, किंतु साल 1990 में मंडल कमीशन के दो सिफारिश लागू होने के बाद आपके समाज के लोगों को थोड़ा बहुत सरकारी नौकरी मिलने लगा था, आपके बच्चें कालेजों में पढ़ने पहुंचने लगे थे। आप बराबरी के रास्ते की तरफ आगे बढ़ने लगे थे किंतु अगड़ों की वर्चस्व वाली मोदी सरकार आने के बाद आपके समाज को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सरकारी नौकरी एकदम कम कर दिया गया। सारा काम प्राइवेट कंपनियों को दिया जाने लगा। .... और आप भी जानते हैं कि प्राइवेट कंपनियों में अच्छे पोस्ट पर आपके समाज के बहुत कम लोगों को नौकरी मिलती है। यदि नौकरी मिल भी गई तो भेदभाव कर नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। ऐसे में आपके सामने कोई रास्ता नहीं बचा है। यदि अभी नही चेते तो अब आपके बच्चें फैक्ट्रियों में मजदूरी, कामगार बन कर रह जायेंगे।

नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव की सरकार ने आपकी आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति आधारित जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण करना शुरू किया ताकि आपकी आरक्षण को 27% से बढ़ा कर, आपके लिए आर्थिक नीतियां बना कर आपके बच्चों, आपके समाज के लिए उत्थान का काम किया जा सके। किंतु अदालत से मिलकर साजिश रच दिया गया, वो अदालत जहां आपकी जाति का, आपके वर्ग का कोई जज नहीं होता है, उस अदालत के माध्यम से बीजेपी के लोग यूथ फॉर इक्वलिटी संगठन के माध्यम से जाति आधारित जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण को रूकवाने में वे लोग सफल रहें। कमाल ये है कि रूकवाने के लिए केस दायर करने वाले, फैसला सुनाने वाले सब के सब एक जाति के हैं।

आज  समतामूलक समाज का स्वप्नद्रष्टा राज्यऋषि शाहू जी महाराज,शहीद जगदेव बाबू की शहादत, वीपी मण्डल का योगदान, आरएल चंदापुरी का संघर्ष, कर्पूरी ठाकुर की विरासत आज इन बेईमानों के सामने लाचार सी है। क्योंकि आपको अपने हित की परवाह नहीं है। आप यदि नहीं जगेंगे, अपने तरक्की से चिढ़ने वाले, रोकने वाले की पहचान नहीं करेंगे तो आपके बच्चें का भविष्य लौट कर 50 साल पीछे की ओर जायेगा जब आप रोज अपमानित किए जाते थे। यदि आपके साथ अभी न्याय नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरने से पहले दीवारों पर लिख दीजिए।

जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी
जातिगत जनगणना, हक हमारा 
आरक्षण बढ़ाना होगा, बेईमानी पर रोक लगाना होगा।

यदि नहीं चेते तो आपके आने वाली पीढ़ियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। अभी अपने आसपास देख लीजिए, आपके समाज में 2004 से 2004 तक 10 नौकरी मिला होगा तो 2014 से अब तक यह संख्या आधा से भी कम हो गया होगा। अपने लिए न सही अपने आने वाली नस्लों के लिए जगिए, जागरूक बनिए। यह संदेश अपने ओबीसी समाज से सैकड़ों साथियों को छपवा कर या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजिए, समझाइए। इतिहास आपको जागरूक इंसान के रुप में दर्ज करेगा। वंचित समाज के लिए यह भी बड़ी सेवा होगी।

साभार -Rishideo Kumar

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