अनुकरणीय विवाह-प्रो लक्ष्मण यादव जी द्वारा अंतर्जातीय विवाहोपरांत प्रीतिभोज कार्यक्रम 04 जून 2023 को.......

अनुकरणीय विवाह-
प्रो लक्ष्मण यादव जी द्वारा अंतर्जातीय विवाहोपरांत प्रीतिभोज कार्यक्रम 04 जून 2023 को.......
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        व्यक्ति विचारों को जब अपने व्यक्तिगत जीवन मे चरितार्थ करता है तो वह न केवल अनुकरणीय होता है बल्कि समाज मे एक मील का पत्थर बन सदियों तक अपनी गाथा को अमर बना जाता है।
       दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा लक्ष्मण यादव जी को कौन नही जानता है क्योकि प्रो लक्ष्मण यादव जी देश भर में बहुजन मिशन के ऐसे कारकुन हैं
जो सामाजिक समता के लिए देश भर में विख्यात हैं और शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ अम्बेडकरिज्म/बुद्धिज्म के प्रचार-प्रसार में पूरी तल्लीनता से सन्नद्ध हैं।
       व्हाट्सएप पर प्रो लक्ष्मण यादव जी द्वारा प्रेषित विवाहोपरांत आमंत्रण पत्र में प्रो लक्ष्मण यादव जी का विवाहोपरांत प्रतिभोज 04 जून 2023 को उनके आजमगढ़ जनपद के  बैठौली गांव के आवास पर आयोजित किया गया है।
      प्रो लक्ष्मण यादव जी की पत्नी माननीया प्रिया चौहान जी मूलतः हरियाणा की मूल निवासी हैं जिनका परिवार तीन पीढ़ी से दिल्ली में रह रहा है।प्रिया चौहान जी दिल्ली यूनिवर्सिटी से (नेट-जेआरएफ) पीएचडी कर रही है।प्रिया चौहान जी हिन्दू जाति व्यवस्थानुसार अनुसूचित जाति के धोबी समाज से आती हैं।
       प्रो लक्ष्मण यादव जी व प्रिया चौहान जी ने संवैधानिक प्राविधानों के तहत 10 मई 2023 को कोर्ट मैरिज कर लिया है तथा 27 मई 2023 को दिल्ली में पारिवारिक मिलन समारोह आयोजित है।
       04 जून 2023 को प्रो लक्ष्मण यादव जी व प्रिया चौहान जी ने अपने विवाह (कोर्ट मैरिज) के बाद आजमगढ़ स्थित अपने बैठौली गांव के पैतृक आवास पर सायंकाल प्रीतिभोज का आयोजन किया है।
       हम साधुवाद समर्पित करते हैं इस शानदार वैचारिक जोड़ी प्रो लक्ष्मण यादव जी एवं प्रिया चौहान जी को जिन्होंने समाज को एक सामाजिक परिवर्तन का जबर्दस्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।पुनः-पुनः बधाई सामाजिक परिवर्तन की इस शानदार जोड़ी को!
-चंद्रभूषण सिंह यादव
(12 मई 2023)

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)