आधुनिक युग के #भामाशाह_अनिल_अग्रवाल जी को सादर नमन। ₹21000 करोड़ का निश्वार्थ दान :

₹21000 करोड़ का निश्वार्थ दान :
दुनियाँ में मेटल किंग के नाम से मशहूर #वेदांता_ग्रुप' के मालिक #अनिल_अग्रवाल ने अपने जीवन की सारी कमाई का 75 प्रतिशत शैक्षणिक कार्यों के लिए दान करने का एलान किया है। लन्दन में बसे अग्रवाल का ये दान भारतीय करेंसी के अनुसार 21000 करोड़ रूपए है। यह अब तक किसी भी भारतीय के द्वारा दान की जाने वाली सबसे बड़ी रकम है।

#पटना में ही 24 जनवरी 1954 को जन्मे और स्थानीय 'सर जी डी पाटलिपुत्रा हाई स्कूल' के छात्र रहे श्री अनिल अग्रवाल ने कल लन्दन में अपने परिवार की सहमति के बाद एलान किया कि वे यह रकम भारत में नि:शुल्क शिक्षा के बड़े प्रोजेक्टों में दान देना चाहते हैं और यहाँ ऑक्सफ़ोर्ड से भी बड़ी यूनिवर्सिटीज बनाना चाहते हैं जो 'नो प्रॉफिट नो लॉस' के आधार पर चलेंगी.

आधुनिक युग के #भामाशाह_अनिल_अग्रवाल जी को सादर नमन।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)